लखनऊ 21 फरवरी। यूपी राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की ओर से उद्योगों के लिए जमीन आवंटन में करोड़ों रुपए की धांधली हुई। यूपीसीडा के अधिकारियों ने मनमाने ढंग से नियमों की अनदेखी कर जमीन का आवंटन किया। आयुष विभाग में भी अस्पतालों के संचालन से लेकर दवाओं की खरीद में गड़बड़ियां सामने आई हैं।
राज्य आयुष सोसायटी ने दवा कंपनियों पर इतना भरोसा जताया कि सैंपल जांच के बिना ही दवा खरीद को मंजूरी दी। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ। CAG ने यूपीसीडा और आयुष विभाग को कामकाज में सुधार की नसीहत भी दी है।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने गुरुवार को विधानसभा में आयुष महकमे की साल 2018-19 से 2022-23 तक अवधि और यूपीसीडा की 2017-18 से मार्च 2024 तक की CAG की रिपोर्ट पेश की है।
योगी सरकार ने फरवरी- 2018 में यूपी में इन्वेस्टर्स समिट आयोजित किया था। इसमें 8 लाख करोड़ से अधिक के एमओयू साइन हुए थे। सरकार ने फरवरी- 2022 में भी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित किया था। इसमें देशी-विदेशी कंपनियों और औद्योगिक समूहों ने 33.50 लाख करोड़ के एमओयू साइन किए थे।
निवेशकों को औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए सबसे पहली जरूरत जमीन है। उद्योग लगाने के लिए जमीन देना यूपीसीडा की जिम्मेदारी है।
CAG रिपोर्ट में सामने आया कि 2019-20 और 2022-23 में एक भी नई जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ। 2017-18 से 2022-23 के बीच सिर्फ एक साल ही लक्ष्य पूरा हुआ। सरकार का कहना है कि किसानों और स्थानीय लोगों के विरोध के कारण जमीन अधिग्रहण में दिक्कत आई।
CAG ने खुलासा किया कि यूपीसीडा ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नीलामी में शामिल होने वाले बोली दाताओं को जमीन का आवंटन किया। इतना ही नहीं, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं की। ठेकेदारों को 1 करोड़ से 63.41 करोड़ रुपए तक के 27 कॉन्ट्रैक्ट बॉन्ड उनकी बोली क्षमता का आकलन किए बिना जारी किए गए। 11 काम 61 से 2612 दिन की देरी से पूरे हुए। 14 काम मार्च 2024 तक अधूरे थे।
यूपीसीडा को 2017-18 से 2022-23 के बीच 5263 एकड़ जमीन देनी थी, लेकिन सिर्फ 2052 एकड़ (करीब 39%) ही अधिग्रहीत हो सकी। आवंटियों से 6714.4 करोड़ रुपए वसूलने थे, लेकिन 4185.06 करोड़ (करीब 62%) ही वसूले जा सके।
CAG रिपोर्ट में खुलासा किया कि इनकम टैक्स छूट हासिल नहीं करने से 184.43 करोड़ रुपए आयकर जमा करना पड़ा। राज्य के दो सार्वजनिक उपकरणों को ऋण समझौते के बिना 52.84 करोड़ रुपए का ऋण दिया।
CAG रिपोर्ट के मुताबिक, कोसी कोटवन-2 में 300 करोड़ की परियोजना के लिए 28,011.15 वर्गमीटर जमीन उस कंपनी को दे दी गई, जिसकी नेटवर्थ सिर्फ 1.04 लाख रुपए थी। बाद में उसे समय बढ़ाकर सितंबर 2024 तक कर दिया गया।
कोसी कोटवन एक्सटेंशन-1 में भी कम आय वाली कंपनियों को 40-41 करोड़ के प्रोजेक्ट के नाम पर भूखंड दे दिए गए। कंपनियां समय पर पैसा जमा नहीं कर सकीं, फिर भी 864 दिन बाद जुर्माना लेकर मामला चलाया गया। आखिर में नीति और दरें बदलने पर आवंटन रद्द करना पड़ा।

