आए दिन समाचार पत्रों, सोशल व इलेक्ट्रोनिक मीडिया में गडढा युक्त सड़कों से होने वाली दुर्घटनाओं में लोगों के जान जाने की घटनाएं अब रोज ही मिलने लगी हैं। सरकार द्वारा समय समय पर इनका निर्माण बजट खर्च कर कराया जाता है। कमियां मिलने पर जांच भी होती है। शर्तों के विपरीत इनके टूटने पर कार्रवाई के बाद निर्माणकर्ता ठेकेदार या एजेंसी पर क्या कार्रवाई हुई यह पता नहीं चल पाता। परिणामस्वरूप केंद्र व प्रदेश की सरकार द्वारा आम आदमी को सुरक्षित यात्रा कराने के लिए सड़क सुरक्षा माह जागरुकता के लिए चलाए जाते हैं। लेकिन कई दशक से यह देखने में आ रहा है लेकिन गडढा मुक्त सड़कें कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। नौ साल पहले जब यूपी के सीएम योगी ने सड़कों को गडढामुक्त बनाने का ऐलान किया था और इसके लिए विभागों को बजट भी दिया गया। मगर सड़कें जैसी पहले थी लगभग ६० प्रतिशत वैसी या उससे भी ज्यादा खराब नजर आती है क्योंकि दो सड़कों का कहीं निर्माण होता है तो चार टूट जाती हैं। किस अधिकारी की देखरेख में यह बनी इस पर कितना बजट खर्च हुआ इसकी क्या शर्तें भी इनका मनन कर कार्रवाई नहीं होती इसलिए छह माह पहले सड़क बनी थी अब टूट गई। दो सप्ताह बाद ही टूटने लगी जैसे शीर्षकों से समाचार खूब मिलने लगे।
सवाल उठता है कि आखिर इसके लिए दोषी कौन है। वैसे तो नियमों के अनुसार निर्माण मानक के अनुसार समय से पूरा ना कराने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी कम नहीं होती क्योंकि एक तो यह यातायात के चलते दिन में निर्माण कार्य ठेकेदार से मिलीभगत कर कराते हैं जिससे बनने और सड़क सूखने से पहले ही उस पर वाहन चलने लगते हैं। कहीं पर कच्ची होने की वजह ये गडढे पड़ जाते हैं या किनारों से टूटने लगती है। मोटा बजट खर्च होता है सुविधाएं सरकारी मंशा के अनुकूल नहीं मिल पाती। मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की भावनाओं के अनुसार मजबूत सड़कों का निर्माण हो और अनुबंध की शर्तों के तहत बनेऔर अगर कहीं कमी रहती है तो ठेकेदार व निर्माण कर्ता एजेंसी से उसे दोबारा बनवाया जाए और जुर्माना लगाने के साथ उसे काली सूची में डाला जाए क्योंकि आम आदमी की मेहनत की कमाई जो टैक्स के रूप में सरकार को मिलती है और उससे यह सड़कें बनती है मगर सही ना बनाकर अपना बैंक बैलेंस और सुविधाएं बढ़ाने की व्यवस्था ठेकेदार और निर्माणकर्ता एजेंसी की बढ़ती ही जा रही है। आम आदमी या तो घायल हो रहे हैं या अपनी जान से हाथ धो रहे हैं। नागरिकों की इस बारे में कही जा रही बातों में मैं भी सहमत हूं कि विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों, आवास विकास, पीडब्लयूडी सड़क राजमार्ग, कैंट बोर्ड द्वारा जो सड़कें बनवाई जाती हैं उनकी गुणवत्ता की जांच सांसद और विधायक के साथ तकनीकी के जानकारों से कराई जानी चाहिए और कमी मिलने पर भुगतान पर रोक लगाई जाए। अधिकारियों पर भी निगाह रखी जाए कि वो ठेकेदार से मिलीभगत कर किसी भी रूप में अन्य कार्य का भुगतान करने में सहयोगी ना हो पाए।
एक बात काफी सुनने को मिलती है कई साल पूर्व मेरठ नगर निगम में मणिशंकर मिश्रा नगरायुक्त थे उनके द्वारा कई ठेकेदारों का भुगतान रोका गया लेकिन उनके जाते ही सहायक नगरायुक्त ने पुरानी पत्रावली गायब कर ठेकेदार का भुगतान करा दिया। जबलपुर की एक खबर तीन चार दशक पूर्व पढ़ने को मिली कि एक अधिकारी ने तालाब खुदवाया जब दूसरा आया तो उसने पूछा कि यह क्यों खुदा तो संबंधित बाबू बोला कि उन्होंने खुदवाया था आप बंद करा दीजिए। यह कुछ किस्से नहीं मीडिया की खबरें और जानकारों की चर्चा से उभरकर आती हैं। मुझे लगता है नियम कानून तो बहुत बन चुके अब जरुरी है कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और प्रदेशों के निर्माण विभागों को इस बात पर ध्यान देना होगा कि ठेकेदार भले ही किसी को कुछ दे रहा हो मगर अनुबंध के अनुसार सड़क या भवन नहर हो या तालाब ना बनाने पर काली सूची में डालकर जुर्माना लगाया जाए और बिना भुगतान के निर्माण के लिए मजबूर किया जाए क्योंकि आम आदमी किसी की मिलावट या बैंक बैलेंस बढ़ाने का खामियाजा क्यों भुगते।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
Trending
- हिंदू धर्म जीवन जीने का तरीका, आस्था साबित करने के लिए मंदिर जाना जरूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
- उदयनिधि जी हार से बौखलाएं नहीं आपके कारण ही आपकी पार्टी की आज यह स्थिति है, सनातन परंपरा एक विचारधारा है जिसे मिटाने की कोशिश करने वाले रहे नहीं मानने वाले आज भी नजर आते हैं
- पेपर लीक और परीक्षा रद होने का खामियाजा कब तक भुगतेंगे परीक्षार्थी
- जिनपिंग ने ट्रंप के चीन पहुंचने से पहले दिखाए तेवर
- भारत में लांच 55 से 85 इंच डिस्प्ले के साथ Sony BRAVIA 3 II
- पीएम मोदी की अपील के बीच मूडीज ने घटाया भारत का ग्रोथ अनुमान
- जिम ट्रेनर ने बेहतर बॉडी के नाम पर लगाए स्टेरॉयड इंजेक्शन, युवक का कूल्हा डैमेज
- वैश्विक संकट के दौर में प्रधानमंत्री मोदी का राष्ट्र निर्माण का महामंत्र
