सीतापुर 10 फरवरी। कम उम्र के बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखने के लिए जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने ठोस पहल की है। उन्होंने सभी विद्यालयों को आदेश दिया है कि जब तक अपरिहार्य न हो पांचवीं तक के बच्चों को होमवर्क, प्रोजेक्ट वर्क आदि मोबाइल पर न भेजा जाए। बेसिक शिक्षा अधिकारी अखिलेश प्रताप सिंह ने इस आदेश के बाद सभी स्कूलों को इसका पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
उल्लेखनीय है कि गाजियाबाद में मोबाइल फोन वापस लेने पर तीन बच्चियों ने नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान ने भी इसको लेकर चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारियों को पत्र लिखा था। ऐसी घटनाएं सामाजिक तौर पर चिंता का कारण बन रही है।
मोबाइल फोन का जरूरत से ज्यादा प्रयोग करने से बच्चों में मानसिक व नेत्र की विकृतियां आ रही हैं। बच्चों में बढ़ती मोबाइल फोन की लत मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रही है। दरअसल, कोरोना काल में विद्यालयों से आनलाइन कक्षा व गृहकार्य का माध्यम मोबाइल ही बना था। इसके बाद से बच्चों में मोबाइल के प्रति बढ़ता आकर्षण घातक बनता जा रहा है। वह आनलाइन गेमिंग आदि का शिकार बन रहे हैं।
जिलाधिकारी डा. राजा गणपति आर ने कहा कि बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम करने के लिए डायरी पर ही होमवर्क और प्रोजेक्ट वर्क दिए जाने की व्यवस्था को जिले में प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए बीएसए को निर्देशित किया है, इसकी निगरानी भी कराई जाएगी।
बच्चों की एकाग्रता में आती है कमी
जिला अस्पताल के मनोरोग चिकित्सक डा. प्रांशू अग्रवाल ने बताया कि मोबाइल स्क्रीन पर देर तक नजरें टिकाए रहने से बच्चों में एकाग्रता की कमी आती है। वह एकांत व मोबाइल की ही तलाश में रहने लगते हैं। लोगों से बातचीत करने का तौर तरीका नहीं सीख पाते हैं। ऐसे बच्चे अक्सर छोटी-छोटी बातों पर चीखने, चिल्लाने लगते हैं। भूख कम हो जाना, नींद न आना और तनाव आदि गंभीर मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं।
वहीं, जिला अस्पताल के नेत्ररोग विशेषज्ञ डा. पीके सिंह ने बताया कि ज्यादा देर तक मोबाइल फोन पर लगे रहने के कारण बच्चों की आंखों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। निकट से मोबाइल फोन देखने के कारण दूर की वस्तुएं स्पष्ट नजर नहीं आती हैं, इस समस्या को मायोपिया कहा जाता है। इसके अलावा बच्चों की आंखों में जलन, धुंधला दिखाई देना, सिरदर्द, कम उम्र में चश्मा लगने जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं।

