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    जनप्रतिनिधि दें ध्यान! कवि हरिओम पंवार, सुधाकर आशावादी, सौरभ सुमन, ईश्वर चंद गंभीर को अभी तक क्यों नहीं नवाजा गया राष्ट्रीय सम्मानों से

    adminBy adminJanuary 29, 2026Updated:January 29, 2026No Comments3 Views
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    हमारी सरकारें हर वर्ष अच्छी सोच और सराहनीय कार्य करने तथा राष्ट्रीय सोच रखने वालों को बढ़ावा देने तथा देश हित में हिन्दू-मुस्लिम सिख ईसाई भारत में हम सब है भाई-भाई की भावनाओं के साथ सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देने के साथ ही देश के स्वर्णीम विकास में अपने-अपने तरीके से युवा पीढ़ी सहित सभी नागरिकों को प्रेरणा देने की कोशिश कर रही विभूतियों को विभिन्न पुरस्कारों व सम्मानों से केन्द्र और प्रदेश की सरकारों द्वारा सम्मानित कर उन्हें प्रोत्साहित करने के अलावा औरों को भी यह प्रेरणा देने की वह भी अच्छा काम करें हर संभव कोशिश की जा रही है। लेकिन हमेशा ही ऐसा लगता है कि कुछ पात्र विभूतियों को पुरस्कार जो अनेक क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से सक्रिय है उनकी ओर अभी इस संदर्भ में चयन कमेटी के सदस्यों का ध्यान शायद नहीं जा पा रहा है ऐसा क्यों है यह तो नाम छांटने और उन पर अंतिम निर्णय लेने तथा इस ओर पात्रों की ओर ध्यान दिलाने के काम करने वालों को सोचना है। लेकिन मेरी निगाह में अलग-अलग क्षेत्रों मे ंकाम कर रहे इन लोगों को सम्मानित हर प्रकार से राष्ट्रीय प्रदेश मंडल और जिला स्तर पर सरकार और उसकी तरफ से प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया जाना चाहिए।
    वैसे तो सम्मान पाने वालों की अलग-अलग क्षेत्रों में एक लम्बी सूची तैयार हो सकती है और इस काम को जिम्मेदारों को अपने स्तर पर कराया जाना चाहिए। फिलहाल आज हम कुछ क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से सक्रिय विभूतियों की ओर सबका ध्यान दिलाकर यह चाहते हैं कि इन्हें आगे लाकर उनका स्वागत और सम्मान कराने के साथ ही उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाने का प्रयास हमारे जनप्रतिनिधियों को करना चाहिए।
    हरिओम पंवार
    आज हम इस मामले में अग्रणी रूप से सम्मान के हकदार समाज में रचनात्मक सोच, देशभक्ति की भावना बढ़ा रहे कवियों की ओर दिला रहे हैं। इस कड़ी में सबसे पहले हम बात करें पिछले कई दशक से अपनी वीर रस की जोश से भरी कविताओं के माध्यम से युवाओं को अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित और समाज में सद्भाव व भाईचारा व राष्ट्रीय एकता को बल देने लगे अंतराष्ट्रीय कवि हरिओम पंवार की ओर जिम्मेदारों का ध्यान दिलाना चाहते हैं। जब से होश संभाला हरिओम पंवार जी की कविता दिल्ली दरबार के चर्चे खूब सुनने को मिले जिनमें पूर्व सरकारों की कमियों को उजागर कर एक प्रकार से नई सरकारोंको लाने और नए लोगों को मौका देने का मार्ग कम या ज्यादा करते चले आ रहे। बताते चले कि अभी पिछले दिनों गणतंत्र दिवस पर प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान से अलंकृत यह नई सदी का भारत है यह 62 वाला दौर नहीं हम भी दुनिया के दादा हैं दिल्ली और लाहौर नहीं जैसी भावना को बढ़ावा देकर यह मानने वाले कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ ससक्त वैश्वीक मंच है निर्णायक भूमिका निभाने वाला राष्ट्र है अपनी कविताओं से हर बिन्दु पर नागरिकों का ध्यान खींचने और कविता पाठ से खूब तालियां बटोरने वाले हरिओम पंवार निष्पक्ष सोच से सोचे तो हरिओम पंवार वर्तमान सरकार की राष्ट्र व जनहित की नीतियों को बढ़ाने और समाज को संगठित करने में भूमिका निभा रहे हैं ऐसा भी नहीं है कि शासन चलाने वाले उन्हें पहचानते न हों मगर पता नहीं वह क्या कारण रहे कि उन्हें अभी तक उनकी देशभक्ति और रचनात्मक सोच के लिए पद्म विभूषण या पद्मश्री केंद्र सरकार से क्यों नहीं नवाजा गया।
    सुधाकर आशावादी
    अगर ध्यान से देखें तो होश संभालने से अब तक देशहित की सोच रखने वाले साहित्य को बढ़ावा देने और अपनी कविताओं से रचनात्मक संदेश देने और सभी को जोड़ने का काम कर रहे अभी तक लगभग 30 किताबें विभिन्न विषयों पर लिख चुके श्री सुधाकर आशावादी जिनके लेखन आदि पर बच्चे पीएचडी भी कर चुके है और उसे अपनाकर आगे भी बढ़ रहे हैं इस क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्यों को नजरअंदाज तो किया ही नहीं जा सकता उसके सरल स्वभाव नई सोच को बढ़ावा देने और पूरी तौर पर आम आदमी की भांति सरल जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त करने के जो प्रयास किये जा रहे हैं उसके लिए अभी तक उन्हें कई पुरस्कार प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर मिल जाने चाहिए थे।
    सौरभ सुमन जैन
    नई उम्र के कविता पाठ करने के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय श्री सौरभ सुमन जैन आजकल वर्तमान सरकार की नीतियों को अपने कविता पाठ के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही राष्ट्रहित में खूब काम कर रहे हैं अब तक सरकार का ध्यान सम्मान और पुरस्कार देने के मामले में इनकी तरफ क्यों नहीं गया यह मतदाताओं में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
    कवि ईश्वर चंद गंभीर
    वैसे तो छोटे-बड़े श्रंगार रस, वीर रस का गुणगान अपनी कविताओं से करने वाले कवियों की कमी नहंी है लेकिन ईश्वर चंद गंभीर जो कविताओं और गीतों के माध्यम समयानुकूल समाज के हर क्षेत्र में अच्छी सोच और युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के अतिरिक्त यहां से लेकर मुंबई तक अपनी सोहरत का सिक्का जमा रहे हैं और जनसमस्याओं के समाधान का काम भी कविता पाठ के साथ ही इनके द्वारा किया जा रहा है अगर पिछले एक दशक की अवधि में देखें तो कवि ईश्वर चंद गंभीर का नाम हर अच्छे कार्य को बढ़ावा और करने वालों को प्रोत्साहन देने का किया जा रहा है। अपनी व्यवहार कुशलता और स्पष्टवादिता के लिए वह अब खूब जाने-पहचाने जाते हैं छोटे-बड़े मंचों पर कविता पाठ और समयानुकूल गीत गाकर माहौल बनाने और तालियां बटोरने में अग्रणी है लेकिन आम आदमी को बढ़ावा देने की बात करने वालों की नजर इनकी तरफ अभी तक क्यों नहीं गयी वह विषय सोचनीय है।
    हो सकता है कि इस क्षेत्र में सक्रिय और महत्वपूर्ण विभूतियों की ओर मेरा ध्यान नहीं जा पाया हो और अगर किसी को लगता है कि उन्हें भी इस कॉलम में जगह दी जाये तो वह ऐसे व्यक्तित्व के स्वामियों का विवरण और कार्य क्षेत्र तथा उपलब्धियों से हमे लिखित में भेजकर अवगत करा दें मगर फिलहाल मेरा अपने क्षेत्र में रहने वाले सांसद, विधायक वह बड़े राजनेता जिनकी पहुंच सरकार तक हों वह आगे आये और अपने क्षेत्र में निवास करने वाली किसी भी क्षेत्र की विभूतियों को उनकी रचनाओं और लोकप्रियता तथा समाज में उनके कार्यों को ध्यान में रख केन्द्र व प्रदेश सरकारों से राष्ट्रीय पर्वों पर दिये जाने वाले पुरस्कारों व सम्मानों से अलंकृत कराने और महिमामंडन कराने के लिए आगे आये जिससे अन्य प्रतिभाओं को बढ़ावा मिले और वह भी सर्वजन सुखायरू सर्वजन हितायरू की सोच के साथ आगे बढ़े।
    प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई
    मजीठियां बोर्ड यूपी के पूर्व सदस्य सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के राष्ट्रीय महामंत्री, संपादक व पत्रकार

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