पूर्व वर्षों की भांति आज देश के ७७वें गणतंत्र दिवस पर भारतीय संविधान लागू होने की स्मृति के रूप में इस दिवस को समृद्धि का परिचय देने हेतु दिल्ली के कर्तव्य पथ पर बड़ा आयोजन हुआ। जिसमें हम आजादी के बाद जो तरक्की देश में हुई उससे आम आदमी को परिचित कराने का प्रयास अनेकता में एकता की झांकियां प्रस्तुत कर देते हैं। हम सब जन गण मन की भावना को आत्मसात कर इस गणतंत्र दिवस पर हमेशा की भांति आजादी के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों, शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धासुमन भेंट करते हैं क्योंकि आज जिस आजादी के माहौल में सांस ले रहे हैं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र महान भारत के निवासी हैं। यह सभी जानते हैं कि आजादी के बाद बहुत से सुधार हुए। सुरक्षा जनसंचार और विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी क्रांति आई। एक जमाना था जब हम सुंई बनाने के लिए भी सोचते थे और आज हम स्वदेशी सामग्री और हथियार आदि बना रहे हैं। सब जानते हैं कि हर साल कर्तव्य पथ जो पहले राजपथ कहलाता था भी हमे आकर्षित करता है क्योंकि यहां निकलने वाली झांकियों में देश की तरक्की का सपना नजर आता है जो अब लगभग पूरा हो चुका है। स्थिति यह हो गई है कि पूरा विश्व इस मौके पर यह जानना चाहता है कि भारत में कितनी तरक्की हुई।
दोस्तों सरकार अपने देश की भलाई प्रगति और रक्षा व नागरिकों की सुविधाओं के लिए प्रयास करती है। उसी का परिणाम है कि आजाद भारत में जिस दल की सरकार बनी उसने देशहित में काम करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। वर्तमान में डेढ़ दशक से प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने कई बाधाओं को पार कर ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियान चलाए। पूरी दुनिया में देश और पीएम का नाम सम्मान से लिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी अपने समकक्ष राष्ट्राध्यक्षों से लोकप्रियता में आगे हैं। कहने का मतलब है कि हम सब मिलकर एकता और अखंडता को मजबूत करने और सरकार के कार्यों को आगे बढ़ाने में सहयोग दे रहे हैं।
लेकिन ७७वें गणतंत्र दिवस पर यह कहने में कोई हर्ज महसूस नहीं करता हूं कि कुछ नौकरशाहों के कारण कागजी आंकड़ेबाजी, गरीबी बेरोजगारी भ्रष्टाचार, लापरवाही पूरी तौर पर रूक नहीं पा रही है। आज भी सब सुविधाएं अफसरों को देने के बाद भी गरीब आदमी ठिठुरते हुए रात गुजारने को मजबूर हैं। कई लोग भरपेट रोटी नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। मुझे लगता है कि आम आदमी को बेरोजगारी गरीबी भ्रष्टाचार से मुक्त कराने और जिम्मेदार अफसरों पर सख्त कार्रवाई की बड़ी आवश्यकता से इनकार नहीं कर सकते। आओ इस ७७वें गणतंत्र दिवस पर यह संकल्प करे कि हम अहिंसक रूप से महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर चलते हुए जरुरतमंदों की मदद को आगे बढ़ें और कुछ गलत होने पर जिम्मेदार पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों व सरकार जनप्रतिनिधियों को सूचित करें और सोशल मीडिया का उपयोग कर सकते हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के मुददे पर यही कहा जा सकता है कि हम जातिवाद को छोड़कर सफेदपोश बहरुपिये और भ्रष्टों को आगे लाने और इन्हें सजा दिलाने के लिए सुविधाओं का उपयोग कर जिम्मेदारों तक अपनी बात पहुंचाएं। इस समय देश में राजनीतिक दलों के सहयोग से पूर्ण बहुमत की सरकार है। जिसे कोई निर्णय लेने में सोचने की आवश्यकता नहीं है। बहुमत के आधार पर फैसले कर लोगों को सस्ता सुलभ न्याय चिकित्सा और भरपेट रोटी उपलब्ध कराने के निर्णय लिए जाएं और सांसद विधायक मंत्रियों से मिलकर टूटी सड़कों, गंदगी, बढ़ते प्रदूषण को रोकने पर ध्यान दे तो सभी का भविष्य सुखमय हो सकता है। जनता अब जागरूक हो चुकी है। भले डर या शर्म व समर्पण के चलते आवाज ना उठा रही हो। इस अवसर पर कहना चाहता हूं कि जिन पड़ोसी देशों को हमने पैदा किया वो हमें आंख दिखा रहे हैं और हमारे भाईयों की हत्या कर रहे हैं। सरकार को ऐसे निर्णय लेने चाहिए कि पड़ोसी देश आंख दिखाने से बाज आएं और स्वच्छता खुशहाली भयमुक्त वातावरण की बात होती है उसकी बहाली के लिए काम होना चाहिए। शक्तिशाली देश भी हमारी अनदेखी करने की स्थिति में नहीं है ऐसा खबरों से अंदाजा लगा सकते हैं। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और अन्य नेताओं के मार्गदर्शन में रामराज्य का सपना पूरा करने का प्रयास करें। मेरा मानना है कि हमारे पूर्वजों ने संविधान की रचना कर आम आदमी को जो सुविधाएं सम्मान दिलाने का प्रयास किया था हमें उन भावनाओं का आदर करते हुए उनकी इच्छा को भी पूरा करने का प्रयास करना चाहिए। तभी हम संविधान और उसके रचयिता का सम्मान करने का दावा कर सकते हैं। इसी के साथ सभी को गणतंत्र दिवस की बधाई शुभकामनाएं देते हुए सबकी खुशहाली और निरोगी जीवन की कामना करते हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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