ग्रेटर नोएडा,23 जनवरी। इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में गुरुवार को दो और बिल्डर को गिरफ्तार किया गया। दोनों लोटस ग्रीन प्रोजेक्ट से जुड़े हैं। वहीं एसआईटी ने घटनास्थल और नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर में जांच की।
नोएडा सेक्टर-150 में भूखंड में भरे पानी में डूबने से 16 जनवरी की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई थी। पीड़ित पिता राजकुमार मेहता की तहरीर पर पुलिस ने दो बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, जिसमें एक बिल्डर अभय सिंह को पुलिस पहले ही न्यायिक हिरासत में जेल भेज चुकी है. वहीं, पुलिस ने इस मामले में लोटस ग्रीन से जुड़े बिल्डर रवि बंसल, निवासी फरीदाबाद और सचिन करनवाल निवासी साहिबाबाद को नॉलेज पार्क क्षेत्र से गिरफ्तार किया। इसके साथ ही उनके दफ्तरों को सील कर दिया गया.
डीसीपी साद मियां खान ने बताया कि पकड़े गए दोनों बिल्डरों के नाम जांच में सामने आए हैं। इस घटना में उनकी लापरवाही उजागर हुई है। बुधवार को पांच अन्य बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिनमें से एक एमजेड विजटाउन के मालिक अभय कुमार को जेल भेजा जा चुका है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद लगातार यह मामला सुर्खियों में था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का संज्ञान लेकर तुरंत तीन सदस्यीय एसआईटी टीम का गठन किया. 21 जनवरी को एसआईटी की टीम नोएडा प्राधिकरण दफ्तर पहुंची थी और उसके बाद तीन सदस्यीय टीम ने घटना स्थल का भी निरीक्षण किया था. आज एक बार फिर एसआईटी की टीम फिर से उसी जगह पहुंची जहां पर यह हादसा हुआ था. करीब आधे घंटे तक टीम मौके पर मौजूद रही और घटनास्थल से कुछ साक्ष्य भी प्राप्त किया. इस दौरान नोएडा ज्वाइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा भी मौजूद रहे.
SIT की टीम ने जुटाए सबूत
एसआईटी की टीम करीब 6 बजे के आसपास नोएडा के सेक्टर 150 घटनास्थल पर पहुंची और वहां स्पीड ब्रेकर से लेकर गाड़ी गिरने की दूरी को चिहिंत किया, क्योंकि जिस जगह यह हादसा हुआ था उसे ठीक 20 मीटर पहले एक सड़क पर ब्रेकर था, जिस पर किसी भी तरह की मार्किंग नहीं की गई थी. घने कोहरे के वक्त इसी ब्रेकर से मृतक युवराज मेहता की गाड़ी होकर गुजरी और सीधे बिल्डर की साइट पर करीब 70 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरी थी जिसमें पानी भरा हुआ था. करीब आधे घंटे चली जांच में एसआईटी की टीम ने यह जानने की कोशिश की, आखिर सड़क निर्माण में क्या लापरवाही हुई और क्यों सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया. टीम ने यह भी देखा कि हादसे के वक्त ना तो वहां पर कोई रिफ्लेक्टिंग लाइट थी और ना ही घटना स्थल पर कोई भी बैरिकेडिंग.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब इस मामले का संज्ञान लिया तो तीन सदस्य एसआईटी टीम का गठन किया और इस टीम से 5 दिन के अंदर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए. रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि आखिरकार इस हादसे में प्रशासन प्राधिकरण और पुलिस, फायर विभाग, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ इन सभी की कहां-कहां लापरवाही रही. रिपोर्ट में दोषी बिल्डरों संबंधित प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य विभाग के अधिकारियों की स्पष्ट जानकारी दी जाएगी.

