सर्दी और कोहरे की मार से बच्चों और अभिभावकों को बचाने के लिए आज से प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित सभी स्कूल बदले हुए समय सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक खुलेंगे। माननीय मुख्यमंत्री जी का यह निर्णय अपने आप में बच्चों और अभिभावकों के हित का है। इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए वो कम है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक भी इससे पूर्ण संतुष्ट नजर आते है।
माननीय मुख्यमंत्री जी बच्चें सब एक समान है शिक्षा भी लगभग एक ही हिसाब से दी जाती है। इसीलिए हिन्दी मीडियम स्कूलों के बच्चे भी सरकारी और गैर सरकारी उच्च पदों पर आसीन होकर देश प्रदेश का मान सम्मान बढ़ा रहे है। ऐसे में मोटी फीस और विभिन्न नामों पर अन्य वसूली करने वाले नियम विरूद्ध या अवैध रूप से बनी बड़ी बड़ी ईमारतों आदि में संचालित इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी ठंड और गर्मी लगती है और कोहरा भी उन्हें सताता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए इंग्लिश मीडियम सीबीएसई और आईसीएससी स्कूलों का समय भी प्रदेश और देश में सुबह 10 बजे से 3 बजे तक अन्य की भांति किया जाए छूट्टियां घोषित करने की बजाए।
माननीय मुख्यमंत्री जी लगभग 10 बजे तक ठंड भी कम हो जाती है और कोहरा भी छट जाता है और बच्चें भी स्कूल आने और अभिभावक भी उन्हें भेजने की स्थिति में होते है। लेकिन हो क्या रहा है आम के आम और गुठलियों के दाम वाली ग्रामीण कहावत को चरितार्थ करते हुए स्कूल संचालक सीधे सीधे या अपने कुछ कृपा पात्रों अथवा सिप्पेसलारों के माध्यम से कभी कोहरे तो कभी ठंड और कभी बारिश के नाम पर स्कूलों में छुट्टियां करने की मांग उठाते है और फिर विभिन्न स्तरों से दबाव बनाने की कौशिश भी की जाती है। क्योंकि अवकाश घोषित होने पर पूरी फीस मिलती है काम से छुटकारा होता है प्रतिदिन स्कूल में क्लास लगने से फायदा नहीं होने वाले खर्च से भी मुक्ति मिल जाती है इसलिए इन्हें अवकाश कराने से कोई नुकसान नहीं होता है। शायद इसलिए अब यह मांग भी उठने लगी है कि स्कूल में अवकाश तो फीस क्यों? अभिभावकों की यह मांग पूरी तौर पर उचित है कि सभी स्कूलों में खुलने का समय 10 बजे तथा बंद होने का समय 3 या 4 बजे हो चाहे वो इंग्लिश मीडियम हो हिन्दी मीडियम अवकाश घोषित करने की बजाए और अब अगर अवकाश घोषित करना भी पड़ता है तो बारिश को छोड़ अवकाश के अन्य दिनों की फीस स्कूल के कलंडर और छात्रों की डायरी के अनुसार समाप्त होनी चाहिए। यह तो सरकार भी नीति है जब काम नही ंतो पगार क्यों? और वैसे भी संविधान में सबकों एक समान अधिकार प्राप्त है तो फिर बच्चों और अभिभावकों के साथ दो तरह की नीति ठीक नहीं है। इसलिए सभी जिलों के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये जाए कि सीबीएसई और आईसीएसई तथा अन्य इंग्लिश मीडियम स्कूलों में जो जबरदस्ती के अवकाश ठंड व कोहरे के नाम पर घोषित होते है या तो वो बंद हो या इस दौरान की फीस माफ की जाए। क्योंकि बिना कुछ दिये आप कुछ भी खर्चों के नाम पर कैसे ले सकते है।
(प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी संपादक पत्रकार)

