लखनऊ,28 नवंबर। मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में नए मतदाताओं के नाम जुड़ने व विवरण बदलने पर छह फरवरी के बाद उन्हें 15 दिनों के भीतर ही वोटर आईडी कार्ड मिल जाएगा। यूपी की मतदाता सूची में 15.44 करोड़ वोटर हैं। बीएलओ घर-घर जाकर मतदताओं से गणना प्रपत्र भरवा रहे हैं। छह फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
मतदाता को वोटर आईडी कार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को चुनाव आयोग ने तेज किया है। तैयार वोटर आईडी कार्ड को डाक विभाग की मदद से होम डिलीवरी के माध्यम से मतदाता के घर पहुंचाया जाएगा। हर चरण में मतदाता के पंजीकृत मोबाइल फोन पर एसएमएस के माध्यम से अलर्ट भेजा जाएगा। जिससे मतदाता देख सकेंगे कि कब तक उन्हें उनका वोटर आईडी कार्ड मिल जाएगा। फिलहाल, हर चरण में एसएमएस अलर्ट की सुविधा दी गई है। यही नहीं अपना ई-वोटर आईडी कार्ड वह ईसीआईनेट एप या फिर चुनाव आयोग की वेबसाइट से भी इसे डाउनलोड कर सकेगा। यूपी में चार दिसंबर तक बीएलओ मतदाताओं से गणना प्रपत्र भरवा कर जमा करेंगे। फिर ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन नौ दिसंबर को किया जाएगा। फिर दावे और आपत्तियां नौ दिसंबर से लेकर आठ जनवरी तक मतदाता कर सकेंगे।
2003 के बाद शादी तो मायके का ब्योरा दें
ऐसी महिलाएं जिनकी शादी वर्ष 2003 के बाद हुई है। वह अपने मायके का विवरण गणना प्रपत्र पर भरें। अपने माता-पिता, बाबा-दादी और नाना-नानी का डिटेल भर सकती हैं। किसी भी तरह की कठिनाई होने पर अपने बीएलओ से जानकारी हासिल कर सकती हैं।
वर्ष 2003 के बाद पड़ोसी देश नेपाल से ब्याहकर आई महिलाओं के लिए मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मुसीबत बन गया है। इन महिलाओं के लिए दिक्कत है कि वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट में इनका नाम नहीं है। जिनका नाम उस मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें अपने माता-पिता का नाम, पता, उनका वोटर आईडी कार्ड आदि की जानकारी देनी है। हालांकि इन महिलाओं के लिए परेशानी यह है कि उनके माता-पिता तो नेपाल में मतदाता हैं।
उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में नेपाल से रोटी-बेटी का संबंध है। पारंपरिक तौर पर नेपाल की लड़कियों से शादियां होती रही हैं। ऐसे जिलों में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, गोरखपुर, गोंडा, बस्ती, बहराइच, कुशीनगर, देवरिया आदि शामिल हैं। इन सभी जिलों में एसी महिलाओं की संख्या लाखों में है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची में जिन महिलाओं का नाम नहीं है, वे एसआईआर की प्रक्रिया में परेशान हैं। समाजवादी पार्टी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेंद्र मिश्रा बताते हैं कि उनके विधान सभा क्षेत्र शोहरतगढ़ में इस दिक्कत से तमाम परिवार परेशान हैं। जिन जिलों में पारंपरिक तौर पर नेपाल से शादियां होती हैं, वहां के लिए एसआईआर में निर्देश स्पष्ट नहीं हैं।
पीलीभीत में रहने वाले कृष्णा की शादी नेपाल की गीता से वर्ष 2015 में हुई थी। कृष्णा भी अब एसआईआर की प्रक्रिया में पत्नी का नाम जुड़वाने के लिए बीएलओ से समाधान पूछ रहे हैं, लेकिन बीएलओ के पास उनके सवाल का जवाब नहीं है। वह 2003 का विवरण मांग रहा है। प्रदीप इस पूरी प्रक्रिया में काफी परेशान हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा।
सिद्धार्थनगर की चरिगवां ग्राम पंचायत में रहने वाले प्रदीप की भी शादी नेपाल की निवासी रहीं किरण से वर्ष 2003 के बाद हुई थी। प्रदीप कहते हैं कि बीएलओ से इस समस्या के बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि फॉर्म में जो भी कॉलम हैं, वही जानकारी भरनी है। अब प्रदीप पत्नी का नाम जुड़वाने के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
पीलीभीत में रहने वाले कमल कुमार लोधी की शादी नेपाल में काठमांडू की रहने वाली प्रतिभा महारजन से वर्ष 2018 में हुई थी। बाद के वर्षों में उनका नाम मतदाता सूची में भी दर्ज हो गया। 2003 की मतदाता सूची में जिनका नाम नहीं है, उन्हें अपने माता-पिता के वोटर कार्ड का ब्योरा देना है। प्रतिभा यह जानकारी कैसे दें क्योंकि उनके माता-पिता तो नेपाल के हैं।
नेपाल ही नहीं, अन्य देशों की भी ब्याहताओं को दिक्कत
न केवल नेपाल बल्कि अन्य देशों से ब्याह कर भारत आई महिलाओं को भी इस तरह की समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। उनके लिए भी दिक्कत यही है कि 2003 की मतदाता सूची में उनका नाम न होने पर उन्हें भी अपने माता-पिता को भारत का मतदाता साबित करने के लिए पूरा ब्योरा देना है, जबकि उनका मायका भारत में नहीं है।
उत्तर प्रदेश सीईओ नवदीप रिणवा का कहना है कि अभी जितनी सही जानकारी है, उतना फॉर्म भरकर जमा करें। बाद में ऐसे लोगों को पहले से तय किए दस्तावेजों में से कोई सौंपना होगा।

