तिरुवनंतपुरम, 14 जुलाई (ता)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने गत दिवस भाजपा और आरएसएस पर मंदिरों को संघ के लिए ‘वसूली केंद्र’ बनाने का आरोप लगाया। अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि यह आस्था के नाम पर बने ‘चोरी के कारोबारी मॉडल’ को दर्शाता है। खेड़ा ने यहां कांग्रेस की केरल इकाई के मुख्यालय में प्रेसवार्ता में कहा कि कांग्रेस उन लाखों श्रद्धालुओं की ओर से यह मुद्दा उठा रही है, जिन्होंने राम मंदिर के निर्माण और देवता को चढ़ावे के तौर पर अपनी मेहनत की कमाई, गहने और कीमती सामान दान दिए थे। इस कथित चोरी को ‘दिन-दहाड़े डकैती’ कहते हुए उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भक्तों के चढ़ावे की चोरी नहीं, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में लोगों की आस्था, भरोसे और विश्वास की ‘लूट’ भी है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश पर गठित ट्रस्ट को मंदिर की देखरेख, तीर्थयात्रियों की व्यवस्था और भक्तों के चढ़ावे की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन ट्रस्ट अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा और उसने भक्तों की आस्था के साथ विश्वासघात किया। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर राम मंदिर के निर्माण का राजनीतिक श्रेय लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि हकीकत यह है कि इसका निर्माण शीर्ष अदालत के फ़ैसले के बाद हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि भक्तों के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में वे अब ‘रंगे हाथों पकड़े’ गये हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुप हैं। आरएसएस चुप है। अमित शाह नदारद हैं। दिन-दहाड़े हुई इस लूट की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?’’ उन्होंने आरोप लगाया कि कोई व्यक्ति या वरिष्ठ लोगों का समूह है जिसे बचाया जा रहा है। हमें नहीं पता कि यह सुरक्षा दिल्ली से मिल रही है या नागपुर से। खेड़ा ने कहा कि भाजपा और आरएसएस को हिंदुओं की आस्था के साथ ‘धोखा’ देने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने बदरीनाथ के मंदिरों और मध्यप्रदेश के बगलामुखी मंदिर से जुड़ी कथित अनियमितताओं की खबरों का ज़िक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अवसंरचना क्षेत्र की बड़ी कंपनी एलएंडटी के अयोध्या राम मंदिर को लगभग मुफ़्त में बनाने और एक पत्थर आपूर्तिकर्ता के बहुत कम कीमत पर पत्थर देने की पेशकश के बावजूद, ट्रस्ट ने इस प्रोजेक्ट पर लगभग 2,100 करोड़ रुपये खर्च किए और 500 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से पत्थर खरीदे। खेड़ा ने ट्रस्ट द्वारा 86 करोड़ रुपये में आसपास की ज़मीन खरीदने पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कहा तो यह जा रहा है कि इस ज़मीन का इस्तेमाल मवेशियों का चारा उगाने के लिए किया जा रहा है, जबकि मंदिर से कोई गौशाला जुड़ी नहीं है।
उन्होंने मौजूदा ट्रस्ट को भंग करने की मांग करते हुए कहा कि मंदिर प्रबंधन के लिए धार्मिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ईमानदार लोगों से मिलकर एक नया निकाय बनाया जाना चाहिए।
खेड़ा ने ट्रस्ट के खातों, दान, चढ़ावे और ज़मीन के लेन-देन की ‘डिजिटल फॉरेंसिक’ जांच और व्यापक ‘फॉरेंसिक ऑडिट’ की मांग की। खेड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद ने तीन दशकों से भगवान राम के नाम पर चंदा इकट्ठा किया है। उन्होंने दावा किया कि यह चोरी का एक कारोबारी मॉडल है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिरों को आरएसएस के ‘वसूली केंद्रों’ में बदल दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भक्तों के पैसे का इस्तेमाल आलीशान पार्टी कार्यालयों के निर्माण में किया जा रहा है।
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