नई दिल्ली 14 जुलाई। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में प्रोजेक्ट में देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों के बैंक खातों पर रोक लगा दी है। साथ ही कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया है।
शीर्ष कोर्ट ने नियामक प्राधिकरणों के लचर रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा, ऐसा लगता है कि सरकारी तंत्र और बिल्डर के बीच मिलीभगत है। इससे घर खरीदने वालों की दुर्दशा हो रही है, जो पूरी कीमत चुकाने के बावजूद दो दशक से अपने घर से वंचित हैं।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने यह टिप्पणी वरिष्ठ नागरिकों की ओर से घरों का कब्जा पाने के लिए 20 साल से किए जा रहे संघर्षों पर गौर करने के बाद की कोर्ट कैंसर से उबरों रीता टिक्कू व लोकेश टिक्कू की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिन्होंने सेक्टर-53 में पाश्र्वनाथ एक्जॉटिका में जीवनभर की अपनी बचत लगाई थी आदेश का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश देने के साथ कोर्ट ने कहा, इस दौरान न तो किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाया जाएगा, न ही फ्लैट का कब्जा तीसरे पक्ष को दिया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2006 में आवासीय इकाइयां आवंटित की गई थी। इसके बाद 2007 की शुरुआत में फ्लैट खरीदार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। लगभग 1.78 करोड़ रुपये की पूरी कीमत चुकाने के बावजूद उन्हें कब्जा नहीं मिला जबकि 2013 में ही कब्जा मिल जाना था। दो दशक बाद भी परियोजना अधूरी है। याचिकाकर्ताओं ने 2021 में हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण से अपने पक्ष में आदेश हासिल किए थे, जिनमें मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। हालांकि बिल्डर ने न तो आदेश को चुनौती दी और न ही इनका पालन किया।
पुलिस बिल्डरों के साथ मिली है या जिम्मेदारी निभाने में नाकाम
सीजेआई ने कहा, आदेश लागू करने की प्रक्रिया बेकार साबित हुई है। जब हरियाणा रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट 2016 (रेरा) ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए, तो उन्हें भी लागू नहीं किया गया। कोर्ट को बताया गया, कोर्ट के कर्मचारी को भी बिल्डर के परिसर में घुसने से रोका गया और पुलिस ने प्रभावी मदद नहीं दी। सीजेआई ने कहा, पूरी तरह लगता है, स्थानीय पुलिस या तो बिल्डरों के साथ मिली हुई है या वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रही है।

