नई दिल्ली 06 जुलाई। साल 2026 का सावन का महीना शिव भक्तों के लिए न केवल आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील रहने वाला है। इस बार सावन के महीने में एक दुर्लभ और बड़ी खगोलीय घटना होने जा रही है, जहां मात्र 16 दिनों के भीतर दो बड़े ग्रहण देखने को मिलेंगे।
सावन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण और रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, साल 2026 का सावन कई मायनों में खास है क्योंकि इस पावन महीने को सूर्य और चंद्रमा दोनों ही ग्रहण प्रभावित करेंगे। सावन की अमावस्या तिथि पर सूर्य ग्रहण लगेगा, जबकि सावन की पूर्णिमा, जिस दिन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन मनाया जाता है, उस दिन चंद्र ग्रहण का साया रहेगा। इस संयोग ने श्रद्धालुओं और ज्योतिषियों के बीच गहरी चिंता और जिज्ञासा पैदा कर दी है कि यह बदलाव शुभ होगा या अशुभ।
देश-दुनिया पर पड़ेगा गहरा असर ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आकाश मंडल में होने वाली ऐसी बड़ी घटनाओं का प्रभाव केवल आम व्यक्ति पर ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया की राजनीति और अन्य क्षेत्रों पर भी देखने को मिलता है। 16 दिनों के भीतर दो ग्रहणों का होना बड़े और संवेदनशील बदलावों का संकेत माना जा रहा है।
अगस्त 2026 में दूसरा सूर्य ग्रहण कब?
साल 2026 का दूसरा और आखिरी सू्र्य ग्रहण 12 अगस्त सावन अमावस्या के मौके पर लगेगा। इसे कई लोग हरियाली अमावस्या के नाम से भी जानते हैं। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण रहने वाला है, लेकिन भारत में दृश्यमान नहीं होगा। जिस वजह से भारत में सूतक काल नहीं लगेगा।
अगस्त 2026 में दूसरा चंद्र ग्रहण कब?
अगस्त 2026 में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण के ठीक 15 दिन बाद यानी श्रावण मास की पूर्णिमा पर लगेगा। यह 28 अगस्त 2026 को लगेगा।
इस दिन भारत में रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। सूर्य ग्रहण की ही तरह यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जिस वजह से भारत में इस दिन राखी मनाई जा सकेगी।
सावन में लगने वाले सूर्य और चंद्र ग्रहण का प्रभाव
सूर्य या चंद्र ग्रहण का इंसानी जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इस दौरान सेहत का ध्यान रखने के साथ बड़े बुजु्र्गों की सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए।
किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों को करने से बचना चाहिए। इसके अलावा कोई भी ऐसा बड़ा फैसला लेने से बचें, जो आपके भविष्य के लिए निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
ग्रहण पर क्या करें क्या नहीं
घर से बाहर न निकलें।
सूतक तथा ग्रहण काल में मूर्त स्पर्श, अनावश्यक खाना पीना, संसर्ग आदि से बचना चाहिए।
ग्रहण काल में चंद्रमा अथवा सूर्य को सीधे न देखा जाए।
खुले में खाद्य सामग्री न रखें।
संक्रमण व विकिरण से बचने के लिए तुलसी का प्रयोग करें।
ग्रहण काल में गर्भवती होने से जन्म लेने वाली संतान पर शारीरिक प्रभाव पड़ता है।
ग्रहण के दौरान पूजा न करें।
ग्रहण काल में महामृत्युंजय का पाठ करने से ग्रहण का कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा एवं अनेकों रोगों से मुक्ति मिलेगी।

