देश के गांवों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश के चलते अब किसी के घर पहुंचने के लिए संकेतों की जरुरत नहीं होगी। अब मोबाइल स्क्रीन पर दिख रही सड़कें मंजिल तक पहुंचा देगी। सभी जानते हैं कि दशकों से जब हम किसी नए गांव में जाते हैं तो ग्रामीणों से पता पूछते हैं। उनके बताए जाने वाले संकेत नीम पीपल के पेड़ हैंडपंप चौपाल की ओर आप जाइये वहीं पर मकान है जहां आपको जाना है। लेकिन अब ग्राम पंचायत मंत्रालय द्वारा अन्य मंत्रालयों के सहयोग से देश के सभी गांवों को सड़क के नाम से प्रसिद्धि देने के प्रयास किए जा रहे हैं जिसके तहत देश के ३.३८ लाख गांव अधिसूचित किए जा चुके हैं। एक जानकारी के अनुसार मंत्रालय ने प्रस्तावित रोड कोडिंग सिस्टम को डिजिटल ग्राम और प्रधानमंत्री ग्राम योजना के तहत जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया है। सड़कों का वर्गीकरण मुख्य क्लास रोड व अन्य सड़कों के रुप में किया जाएगा जिसका क्यू आर कोड ग्राम पंचायत मंत्रालय को सड़को के नाम को डिजिटल नाम देने की तैयारी की गई है।
अब हम किसी गांव में अपने परिचित के यहां आसानी से तो पहुंच जाएंगे लेकिन जब पहली बार वहां जाते थे और बार बार पता पूछने का जो लुत्फ आता था और बताने वाला यह जानकारी करता था कि किसने यहां जाना है और रिश्तेदार का नाम बताने पर पता बता देता था। अब पेड़ मंदिर कुंए जैसी पहचान पूछनी नहीं पड़ेगी और ना बताने वाले रहेंगे। अगर ध्यान से देखे तो भावनाओं से जुडृे यह शब्द अपने लगते थे लेकिन हर क्षेत्र में प्रगति हो रही है तो यह कैसे बच सकते हैं। यही कहा जा सकता है कि देश के लगभग ६ लाख गांव के सर्वे ऑफ विलेज मैपिंग विद डिकोडिंग टेक्नॉलॉजी परियोजना के तहत ३.३८ लाख गांव अधिसूचित होंगे और तीन लाख गांवों का ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। इसके पूरा होते ही गांवों की अंदरुनी सड़कों को जोड़ने और वहां पर अपनों के घर पहुंचने का मार्ग साफ हो जाएगा। मेरी निगाह में ग्राम पंचायत मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत जो यह प्रयास किया जा रहा है वो बहुत सराहनीय और जनोपयोगी है बस यह जरुर है कि जब तक हम जिंदा है तब तक हमें पता होगा कि पहले हम यहां पीपल नीम आदि के नाम से बताए जाने वाले मार्गो पर जाकर दादी नानी के घर पहुंचते थे और अब सरपट वहां पहुंचेंगे लेकिन हमारी अगली पीढ़ी को यह जानकारी नहीं होगी और जब उसे बताया जाएगा तो वह पूछा करेंगे कि क्या कभी इन नामों से भी घरों तक पहुंचा जा सकता था। पीएम मोदी के नेतृत्व में किए गए इस प्रयास के अच्छे परिणाम निकलेंगे और पैसा व समय बचेगा तथा हमारी यादें भी इन्हीं से जुड़ जाएंगी वो संकेत मंदिर कुएं वाले हमारी सुनहरी यादों का प्रतीक हो जाएंगे।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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