लखनऊ 03 जुलाई। राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू एक गैंग बनाकर वीआईपी दर्शन करवाने के खेल में हर महीने लाखों रुपये की वसूली करता था। जेल गए आरोपी उसके गैंग के साथी थे। रोजाना रकम का बंटवारा होता था यह खेल प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अधिक बढ़ गया था। एसआईटी जांच में इसका खुलासा हुआ है। दरअसल मंदिर में सामान्य श्रद्धालु कतारों में दर्शन करते हैं। इसमें काफी वक्त लगता है। वहीं, वीआईपी प्रोटोकॉल में चंद मिनट में दर्शन हो जाते हैं। इसके लिए वीआईपी पास ट्रस्ट की ओर से जारी होते हैं, जो निशुल्क हैं, लेकिन इसी में पूरा खेल होता था श्रद्धालुओं को आसानी से भव्य दर्शन करवाने की बात बताकर रुपये वसूले जाते थे। यह गैंग आपस में मिलकर लाखों रुपये का वारा न्यारा करता था।
होटल, होम स्टे वालों के जरिये फैला जाल
आरोपियों ने अयोध्या के दर्जनों होटल, होम स्टे और धर्मशालाओं में संपर्क कर रखा था। वहां ठहरने वाले श्रद्धालुओं से होटल या होम स्टे मालिक वीआईपी दर्शन करवाने की बात करते थे। प्रति श्रद्धालु 500 से 1000 रुपये तक वसूले जाते थे। श्रद्धालु आर्थिक रूप से अधिक मजबूत होने पर दो-दो हजार या उससे भी अधिक रकम लेते थे। उसके बाद ये सभी टिन्नू एंड कंपनी से संपर्क कर डिटेल साझा करते थे। ये सभी वीआईपी पास बनवाकर दर्शन करवाते थे।
चंद मिनट में तैयार करते थे पास
होटल से श्रद्धालुओं को लाने की जिम्मेदारी अनुकल्प, करुणेश, मनीष, अविनाश और लवकुश आदि की रहती श्री फिर टिन्नू चंपत, अनिल मित्र और गोपाल राव की आईडी का इस्तेमाल कर पास बना देता था। इन छह के अलावा कई और वहां के कर्मी इस पूरे खेल में शामिल हैं।
विशेष अवसरों पर इनकी होती थी चांदी
वीआईपी रूट व गेट के पास एक नाम सबसे अधिक चर्चा में है, वह है छोटू का। जिस किसी को वीआईपी दर्शन करने हो, वह छोटू से संपर्क करे, तत्काल जाएगा। क्योंकि छोटू ने भी टिन्नू व अन्य कई लोगों से संपर्क बना रखा है। रकम लेकर दर्शन करवाता है और फिर रकम का बंटवारा होता है।

