Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • सड़ा मीट, खराब सब्जियां और एक्सपायर्ड दूध, 5-स्टार होटलों के खाने का सच आया सामने
    • मथुरा में कारसेवा के लिए पूजा शुरू: चित्रगुप्त पीठ में हवन-यज्ञ, बैठक के बाद साधु-संत करेंगे शंखनाद
    • 12 अगस्त को लगेगा साल का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण, दिन में छा जाएगा अंधेरा
    • UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई भी शुल्क, सरकार ने कर दिया क्लियर
    • 70 की उम्र में भी प्रमोद कुमार साइकिल पर ला रहे कांवड़
    • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुभाष चंद्र त्यागी की विशेष अपील की खारिज
    • बिजनौर सांसद चंदन चौहान ने की दौराला-हस्तिनापुर-बिजनौर रेल लाइन निर्माण की मांग
    • मूर्ति पूजा को बड़ा अपराध बताने वाले मुफ्ती पर मुकदमा दर्ज
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»जरुरत के अनुसार दूध की उपलब्धता हेतु वस्तुओं पर दूध से बनी वस्तुओं पर समयानुकुल रोक लगाई जाए जिससे बच्चों व जरुरतमंदों को यह आसानी से उपलब्ध हो सके
    देश

    जरुरत के अनुसार दूध की उपलब्धता हेतु वस्तुओं पर दूध से बनी वस्तुओं पर समयानुकुल रोक लगाई जाए जिससे बच्चों व जरुरतमंदों को यह आसानी से उपलब्ध हो सके

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJune 1, 2026No Comments6 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    देश और दुनिया में दूध का बहुत महत्व है। मां के दूध के बाद अगर कोई चीज बच्चों को स्वस्थ बनाती है तो कहा जाता है कि वो गाय का दूध और वो ना तो फिर भैंस का दूध बच्चों को दिया जाता है। इस दुग्ध दिवस की शुरुआत क्यों पड़ी वो तो अलग बात है लेकिन २००१ में दूध उत्पादन बढ़ाने के दृष्टिकोण से हर साल आज के दिन दुग्ध दिवस मनाया जाता है। देश में आंकड़ों के अनुसार ३२ करोड़ से अधिक मवेशी हैं जिनमें गाय भैंस व अनेको मवेशी शामिल है। दूध उत्पादन के लिहाज से ७४२ करोड़ से अधिक भेड व १४.८८ बकरियां भी बताई जाती हैं। ऐसा नहीं है कि दुग्ध उत्पादन दिवस मनाये जाने के बाद इस क्षेत्र में सुधार ना हुआ हो लेकिन दूध का उत्पादन बढ़ने के साथ ही कुछ लालची लोगों ने दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए जानवरों को इंजेक्शन लगाने शुरू किए और कई प्रकार का ऐसा चारा जो मवेशियों को नुकसान पहुंचाता है का उपयोग खूब हो रहा है। प्लास्टिक में ना कोई सामान लेना चाहिए ना उपयोग करना मगर एक जानकारी अनुसार पीले रंग की चौकर जैसी कोई चीज थोक में आती है फिर उसे प्लास्टिक के ड्रम में भरकर मवेशी पालकों को बेचा जाता है। उससे दूध तो बढ़ जाता है लेकिन भविष्य में नुकसान की उम्मीद ज्यादा होती है। यह साल दूध उत्पादन बढ़ाने की थीम पर मनाया जा रहा है। अच्छा है कुछ जागरूकता बढ़ेगी मगर खपत के मुकाबले शुद्ध दूध की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती पशुपालकों व आम आदमी के लिए बनकर रह गई है। लेकिन यह अच्छी बात है कि इस क्षेत्र में किसानों व महिलाओं की रुचि बढ़ाई जा रही है। जिससे मिलावटी दूध पीने से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को शुद्ध दूध और उसके पोषक तथ्य उपलब्ध हो सके जितना समाचार पत्रों में पढ़ने को मिलता है उसके हिसाब से यह कहा जा सकता है कि अपने देश में बीते पांच साल में भी अभी तक उतना उत्पादन दूध का नहीं बढ़ा है जितना बढ़ना चाहिए था। यह जरुर है कि बढ़ाने के चक्कर में नुकसान दायक इंजेक्शन और चारा देकर नागरिकों व जानवरों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। मगर यह कह सकते हैं कि ३५ सहकारी डेरी सक्रिय हैं। पूरे देश में ४८ हजार से अधिक महिला नेतृत्व वाली दुग्ध सहकारी समितियां मांग के हिसाब से काम कर रही हैं। कुल मिलाकर गौशालाओं में आज जो दुग्ध दिवस मनाया जा रहा है मुझे लगता है इसमें आने वालों को एक शपथ लेनी चाहिए कि हम दुग्ध में कोई ऐसी वस्तु नहीं मिलाएंगे जो पशुओं व बच्चों को नुकसान पहुंचाती हो। कुछ आंकड़ों के अनुसार दुग्ध क्षेत्र में भारत आगे बढ़ रहा है। इससे तो इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि हर क्षेत्र में हमारे यहां विस्तार और विकास की लहर चल रही है। तो दुग्ध उत्पादन बढ़ना है। सरकार इसके लिए सुविधा और आर्थिक साधन भी जरुरत अनुसार उपलब्ध कराने में पीछे नहीं है। मुझे लगता है कि दुग्ध उत्पादकों को एक शपथ दिलानी चाहिए कि हम उच्च क्वालिटी के खल चौकर के साथ घास और बरसीम का चारा जानवरों को खिलाएंगे। उससे दूध बढ़ाने का काम होगा। इंजेक्शन और नुकसान वाली कोई भी चीज दूध देने वाले जानवरों को नहीं खिलाई जाएगी।
    यह भी जरुरी है कि सरकार को दूध की खपत कम हो और आसानी से उपलब्ध हो सके इसके उपाय करने होंगे। गर्मी में दूध का उत्पादन कुछ कम होता है तो मेरा मानना है कि शादी विवाह और हलवाई के यहां दूध पर प्रतिबंध लगाया जाए क्योंकि अनेको ऐसी सामग्री आ रही है जो दूध से बनी वस्तुओं के मुकाबले स्वादिष्ट होती है। साथ ही हम पड़ोसी देश के बारे में अच्छी राय ना रखते हो लेकिन मिलावटखोरों को सजा देने के मामले में हमें उनका रास्ता अपनानाचाहिए। एक समाचार पढ़ा था कि मिलावटी दूध बेचने वालों को चीन में फांसी दी गई। भले ही हमारे यहां फांसी देना मानवीय दृष्टिकोण से सही ना माना जाता हो लेकिन ऐसी सजा दी जा सकती है जिससे कोई मिलावट की चीज ना बेचे। वैज्ञानिकों ने कई ऐसी सस्ती उपयोगी व्यवस्था की है जिससे दूध में मिलावट का पता चल जाता है। हर व्यक्ति को दूध की टेस्टिंग करने में बहुत फायदा होगा। पानी मिलाने की बात को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि दूध की कीमत बढ़ाने में उपभोक्ता हीलाहवाली करता है। इससे अगर थोड़ा पानी मिलाया जाए कोई समस्या नहीं है। डॉक्टर दूध पीने को ही मना करते हैं और जरुरी है कि उसकी वसा घटाने के लिए ज्यादा पानी मिलाने या मलाई हटाने के साथ ही हम सप्रेटा का उपयोग भी कर सकते हैं। मगर बात वो ही है कि लालच और जल्दी धनवान होने की जो अभिलाशा बढ़ रही है उससे मुक्त होकर हमें दूध का उत्पादन बढ़ाने की ओर सोचना होगा। क्योंकि मैंने बचपन में देखा है कि दुधारु पशुओं को हरी घास बरसीम का उपयोग भी दूध की ब ढ़ोत्तरी में काफी फायदेमंद होगा क्योंकि कई सालों तक जंगलों से घास खोदकर बेचनी पड़ी तो उस समय एक गठठर दस पैसे में बिकता था अब भले ही उसकी कीमत सौ रुपये हो गई हो लेकिन काफी उपयोगी सिद्ध हो रही है।
    सरकार ने अनेक गौशालाएं खोलने वालों को प्रोत्साहन देने की कोशिश की है और बजट भी दिया जा रहा है। डेयरी संचालक जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए गर्म कपड़े पहना रहे हैं और सर्दी से बचाने के लिए कूलर चला रहे हैँ। मैंने बचपन में गाय भैसों की देखभाल की और कितना ही सर्दी गर्मी हो उसका असर जानवरों पर नहीं पड़ता क्योंकि किसी किसान व व्यक्ति को कपड़े पहनाते या कूलर चलाते नहीं देखा गया। पुआल जानवरों के नीचे बिछा दी जाती थी और ऊपर से टाट डाल देते थे। अगर इन्हें उपयोग किया जाए तो सर्दी में पसीना आने लगता है क्योंकि एक समय मेरे परिवार में ओढ़ने को रजाई गददे नहीं थे तो पुआल बिछाते थे जिससे सर्दी नहीं लगती थी। सही बात तो यह है कि दूध उत्पादक जानवरों को अपना अन्नदाता मानकर अगर बिना मिलावट उत्पादन बढ़ाएंगे तो नागरिक स्वस्थ रहेंगे और बचे पैसे से देश के विकास और बच्चों की पढ़ाई पर लगाया जा सकता है। दुग्ध दिवस पर सभी पशुपालकों को शुभकामनाएं देते हुए आग्रह करता हूं कि इनकी देखभाल करने और दूध उत्पादन के लिए मिलावट से बचे क्योंकि ऐसे लोगों को इसका काफी प्रकोप झेलना पड़ता है और मिलावटी दूध पीने के बाद परिवार जो बददुआ देता है वो भी कभी कभी लग जाती है। मिलावट से बचों और खुद स्वस्थ रहकर दूसरों को भी स्वस्थ रखों।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

    sampadkiya tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    websitemarketing2019@gmail.com
    • Website

    Related Posts

    सड़ा मीट, खराब सब्जियां और एक्सपायर्ड दूध, 5-स्टार होटलों के खाने का सच आया सामने

    August 9, 2026

    मथुरा में कारसेवा के लिए पूजा शुरू: चित्रगुप्त पीठ में हवन-यज्ञ, बैठक के बाद साधु-संत करेंगे शंखनाद

    August 9, 2026

    12 अगस्त को लगेगा साल का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण, दिन में छा जाएगा अंधेरा

    August 9, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.