मेरठ, 01 जून (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी शहरों के सुनियोजित विकास के लिए हर संभव प्रयासरत नजर आ रहे हैं तथा अवैध निर्माण, सरकारी भूमि घेरने और कच्ची कालोनी काटने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश उनके द्वारा दिये जाते रहे हैं बीते दिनों मेरठ विकास प्राधिकारण मेडा के उपाध्यक्ष मेरठ मंडलायुक्त जी द्वारा विभाग के अधिकारियों से अवैध निर्माणों की सूची मांगी गयी यह विश्वास से कहा जा सकता है कि पूरी तौर पर अवैध निर्माणों का चर्चा नहीं किया गया होगा यह बात इसलिए कही जा सकती है कि लावड़ रोड पर कैश कॉलेज और गंगोत्री कालोनी के निकट विकास कपूर और दीपक धवन के द्वारा भूखंड संख्या 24-25 नंबर पर सरकार की सभी निर्माण नीतियों का उल्लंघन कर मानचित्र के नाम पर रिहायशी भूमि का उपयोग परिवर्तित कराये बिना कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स खड़ा कर दिया गया और आगे भी निर्माण जारी रहा है।
बताते चलें कि इस भूमि पर माननीय न्यायालय में मामला चल रहा बताते हैं और सभी प्रकार के निर्माण पर पूरी रोक इस प्लॉट पर है। फिर भी लोगों का कहना है कि जोन प्रभारी जेई और एई की मिलीभगत से सारे नियमों को ताक पर रख नाली के किनारे ही निर्माण कर लिया गया। नीचे मार्केट बनाने के बाद अब प्रथम तल पर लिंटर डाल लिया गया और आसपास के नागरिकों का कहना है कि तीसरे तल पर भी लिंटर डालने की तैयारी चल रही है मेडा के अफसर अवैध निर्माणकर्ता को कितना सपोर्ट कर रहे है इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक खबर के रूप में शिकायत 2 मार्च 2026 को की गयी लेकिन उसका कितना फर्जी निस्तारण किया गया है कि उसका अंदाजा इससे लगता है कि उसमें फोटो 24 फरवरी 2026 की लगायी गयी है। जिससे यह अंदाज लगाया जा सकता है कि मेडा के अवैध निर्माण रोकने से संबंध अधिकारी कितने बड़े स्तर पर अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के तहत अवैध निर्माणों को बढ़ावा दे रहे हैं। क्योंकि जो मैन रोड से जगह वाहन खड़े करने आदि के लिए नियम से छोड़ी जानी चाहिए वह भी इसमें नहीं छोड़ी गयी है और ना ही मानचित्र पास किस प्रकार से हुआ है वह भी बाहर नहीं लगाया गया है और यह बिल्डिंग कागजों में सील लगी हुई है।
पूर्व में जो दैनिक केसर खुशबू टाईम्स की खबर के रूप मंें शिकायत की गयी थी उसमें दिये गये बिन्दुओं और तथ्यों को पूरी तौर पर नजरअंदाज कर 1973 की धाराओं का हवाला देकर निर्माणकर्ता विकास कपूर और दीपक धवन को बचाने की कोशिश मेडा के अधिकारियों ने किस प्रकार से की है वह इससे पता चलता है। जानकारों का कहना है कि विकास कपूर और दीपक धवन अवैध निर्माण करने के मामले में काफी बदनाम है और इनके विरूद्ध कैंट बोर्ड आदि में भी मामले विचाराधीन है बताये गये है।
पूर्व में इनकी हुई शिकायत इस प्रकार से है:
मेरठ विकास प्राधिकरण मेडा के अवैध निर्माण रोकने के दावे और उन्हें तोड़ने के बयानों के बावजूद मेरठ विकास प्राधिकरण की सीमा में अवैध निर्माणों की बाढ आ गयी है शायद ही कोई ऐसा लिंक मार्ग हो जहां प्रदेश सरकार की निर्माण नीति के विपरीत अवैध निर्माण न हो रहे हों । इनके आसपास के लोगों और जानकारों के कहे अनुसार यह सब कॉमर्शियल और रिहायशी कॉम्पलेक्स मेडा के अवैध निर्माण रोकने से संबंध विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से ही बनकर तैयार हो रहे हैं।
बताते चलें कि नॉ प्रोफेट नॉ लॉस पर आम आदमी को घर की छत और गरीब को व्यवसाय के लिए माध्यम उपलब्ध कराने एवं शहरों के सुनियोजित विकास और सौंदर्यकरण के लिए बनाए गये विकास प्राधिकारण अब इनके बिलकुल विपरीत काम करने लगे हैं ऐसा प्राधिकारण की सीमा में सैंकड़ों जगह दिखाई दे सकता है।
मामला रूड़की रोड से लावड़ रोड पर जाने वाले कैश कॉलेज से आगे और उधर से आते हुए पहले एक रिहायशी भूमि पर कैश कॉलेज वाली साईड में कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स का निर्माण युद्धस्तर पर हो रहा है बताते हैं कि इस जमीन पर स्टे है इसलिए जानकारों के अनुसार इस जमीन पर ना तो कोई निर्माण हो सकता है और ना ही कोई नक्शा पास हो सकता फिर भी दिन रात मानचित्र का बोर्ड लगाकर निर्माण कार्य चल रहा है। पहले तो नक्शा पास ही नहीं हो सकता फिर भू उपयोग परिवर्तित नहीं कराया गया इतना ही नहीं जो साढ़े चार मीटर जगह सड़क से छोड़कर निर्माण होना चाहिए उसे नजरअंदाज कर सरकारी नाली से ही साईड और बैक छोड़े बिना सड़क चल रहा निर्माण और दूसरी मंजिल पर लेंटर डाले जाने की तैयारी चल रही है निर्माण सीधे-सीधे कॉमर्शियल नजर आ रहा है इतना ही नहीं इसके बाहर मानचित्र अगर पास है तो उसका चित्र भी नहीं लगाया गया है कुछ लोगों का कहना है कि मेडा के अधिकारी आते हैं और निर्माणकर्ता से बतियाकर मुस्कराते हुए चले जाते हैं इसका क्या मतलब हो सकता है यह किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है।
माननीय मुख्यमंत्री जी अब तो इन अवैध निर्माणों के कारण लगने वाले जाम से परेशान नागरिक यह कहने लगे हैं कि इससे तो अच्छा है कि मेडा का नाम अवैध निर्माण कराओ विभाग रख दिया जाये तो कम से कम सरकार को कुछ तो किसी ना किसी रूप में प्राप्त होगा ही अभी तो मौखिक चर्चा अनुसार क्षेत्र के अवैध निर्माण रोकने से संबंध एई और जेई और अन्य अधिकारियों का बैंक बैलेंस और सुविधा ही बढ़ाई बताई जा रही हैं।
नोट: माननीय मुख्यमंत्री जी की अवैध निर्माणों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करने के आदेशों के बावजूदों के बन रहे इस कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स
- अगर कोई स्टे हैं तो नक्शा कैसे पास हुआ।
- क्या निर्माणकर्ता ने भू उपयोग परिवर्तित कराया।
- निर्माण सरकार की निर्माण नीति के तहत है या नहीं।
- अगर नक्शा पास हुआ तो कितनी जगह में क्या बनाने और अब क्या बन रहा है।
- निर्माण में मानचित्र भी प्रदर्शित नहीं किया गया है।
- सहित ऐसे अनेक बिन्दु जो सरकार द्वारा निर्माणों के लिए निर्धारित किये गये हैं उन सभी को ध्यान में रखते हुए जांच की जाये ऐसा क्षेत्र के अमन पसंद नागरिकों का मत है।

