मथुरा, 13 मई (ता)। ब्रज की ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने की दिशा में राज्य पुरातत्व सर्वेक्षण ने एक बड़ा कदम उठाया है। यमुना किनारे स्थित द्वापरयुगीन इतिहास के साक्षी कंस किला की जल्द ही कायाकल्प होने जा रही है। विभाग ने इस प्राचीन किले को संरक्षित कर इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इसकी घोषणा भी की है।
राज्य पुरातत्व विभाग प्रदेश के 40 स्मारकों, पुरातत्व स्थलों को संरक्षित करने जा रहा है। इसमें मथुरा का कंस किला भी शामिल है। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे इस किले की दीवारें और बुर्ज समय की मार से जर्जर हो चुके हैं। संरक्षण कार्य के अंतर्गत किले की नींव को मजबूती दी जाएगी और प्राचीन वास्तुकला को बिना नुकसान पहुंचाए उसकी मरम्मत की जाएगी।
किले के भीतर प्रकाश व्यवस्था और पर्यटकों के लिए पैदल पथ का निर्माण भी किया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद मथुरा आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह एक नया आकर्षण केंद्र होगा। कंस किले के आधुनिक स्वरूप में आने से यहां आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और विश्राम घाट के साथ-साथ अब कंस किला भी पर्यटन सर्किट का हिस्सा बनेगा।
कंस किला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह स्थापत्य कला का भी अनूठा उदाहरण है। 16 वीं शताब्दी में राजा मानसिंह द्वारा इसके पुनरुद्धार के प्रमाण मिलते हैं। क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई आगरा के प्रभारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी ने बताया कि इस संबंध में अभी कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। आदेश प्राप्त होने पर कार्य योजना तैयार की जाएगी।
कंस किला मरम्मत न होने के कारण जर्जर हो रहा है। दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं थीं, लेकिन उप्र. ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा पत्थर लगवाया गया। सफाई भी नहीं रहती है। कुछ हिस्सा सही कराया गया है, जिसमें आरएसएस के स्वयंसेवक रहते हैं। शाखा लगती हैं।
दीर्घ विष्णु मंदिर के प्रवक्ता रामदास चतुर्वेदी ने कहा कि कंस किला द्वापरकालीन माना जाता है। यहां कंस का दरबार लगता था। यहां भैरोनाथ व काल भैरव का मंदिर भी है। कंस किला के एक तरफ चिंताहरण और एक तरफ बैकुंठनाथ् महादेव हैं।
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