मेरठ 13 मई (प्र)।मई की शुरुआत के साथ ही आम आदमी की जेब पर एक और मार पड़ी है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और अन्य रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली दवाएं 15 से 20 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं। ब्रांडेड के साथ-साथ जेनरिक दवाओं के दाम भी बढ़े हैं। इस बढ़ोतरी का सीधा असर लंबे समय इलाज करा रहे मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब हर महीने अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के अनुसार दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह कच्चे माल की लागत और परिवहन खर्च में इजाफा है। अपनी लागत संतुलित करने के लिए कंपनियों ने दवाओं के दाम बढ़ा दिए हैं। इस बढ़ोतरी में ब्रांडेड दवाओं के साथ-साथ जेनरिक दवाएं भी शामिल हैं।
हवाई ईंधन, समुद्री माल भाड़ा बढ़ने से दवाओं की ढुलाई लागत बहुत ऊपर चली गई है। पश्चिमी एशिया के तनाव के कारण जहाजों को लंबे रास्तों से चलाना पड़ रहा है, इंश्योरेंस और सुरक्षा शुल्क भी बढ़े हैं। इससे शिपिंग लागत 30 प्रतिशत तक बढ़ गई। चीन, यूरोप और अन्य देशों से आने वाली दवा सामग्री की लागत बढ़ने से दवा कंपनियों को दाम बढ़ाने पड़े हैं। ज्यादातर दवाओं की पहचान उनके एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रिडिएंट ) से होती है, जिसे आम भाषा में साल्ट कहा जाता है। डायबिटीज की सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली दवाओं में आमतौर पर मेटफार्मिन साल्ट का उपयोग होता है। इसके अलावा ग्लाइमेपिराइड, ग्लिसजाइड, सिताग्लिप्टिन और एम्पाग्लिफ्लोजिन जैसी दवाओं का साल्ट भी चीन, यूरोप और कुछ एशियाई देशों से आयात होता है। इनकी लाजिस्टिक लागत बढ़ गई है।
पैरासिटामाल का साल्ट भी चीन और यूरोप से आता है, इसकी कीमत 20-40 प्रतिशत तक बढ़ी है। इसी वजह से बुखार, और सर्दी-जुकाम की दवाओं के दाम भी ऊपर चले गए हैं। इसके अलावा ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक, गैस की दवाओं के दाम भी बढ़े हैं। बाजार में कई दवाओं पर 20 से 25 रुपये प्रति पत्ता तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दवा कारोबारियों के लिए भी मार्जिन निकालना और बाजार संतुलित रखना चुनौती बन गया है। मौसम में उतार-चढ़ाव के चलते वायरल, जुकाम और बुखार के मरीज बढ़ने से दवाओं की मांग भी बढ़ी है, जिससे बाजार में कीमतों का असर और ज्यादा महसूस किया जा रहा है।
ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन महामंत्री रजनीश कौशल का कहना है कि डायबिटीज और कोलेस्ट्राल की दवाओं की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। आगे भी इन दवाओं के दाम बढ़ने का अनुमान है। शुगर की दवाई का 10 गोलियों का पत्ता जो पहले 100 रुपये का मिलता था, अब वह 115 रुपये का मिल रहा है। ब्लड प्रेशर की जो दवाई 100 रुपये में मिलती थी अब वह 120 में मिल रही है।
होलसेलर एंड रिटेलर केमिस्ट एसोसिएशन महामंत्री घनश्याम मित्तल का कहना है कि 1.5 दिन पहले ही कोलस्टाल की दवा अटोरवा 40 का 10 गोलियों का पत्ता 202 रुपये का था, जो अब 206 रुपये का हो गया है। शुगर की टेंग्लिन टेबलेट का 10 गोलियों का पत्ता 15 दिन पहले 239 रुपये का था, अब 262 रुपये का हो गया है। ब्लड प्रेशर की दवा ओलमी 10 का पत्ता पहले 134 रुपये का था, अब 148 रुपये का हो गया है। इंसुलिन के भी दाम बढ़े हैं। पिछले सप्ताह कई कंपनियों ने नई रेट लिस्ट जारी की है। कुछ ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में पहले ही 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है। आने वाले समय में यह वृद्धि 20 ऽ प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

