नई दिल्ली, 26 जनवरी। आज भारत 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परेड की सलामी ली। इस साल परेड का विशेष सांस्कृतिक विषय स्वतंत्रता का मंत्र- वंदे मातरम््य था। यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला लॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा इस गौरवशाली लम्हे के साक्षी बने। देश के राज्यों में भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराया गया। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित हो रही भव्य परेड में देश की सांस्कृतिक विविधता, सेना की ताकत और लोकतांत्रिक मूल्यों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिलेगी। यह दिन 26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने की वर्षगांठ पर मनाया जाता है। इसी संविधान ने भारत को एक संप्रभु और लोकतांत्रिक गणराज्य का स्वरूप दिया।
कर्तव्य पथ पर परेड में भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर जॉइंटनेस के जरिए जीत्य नाम का एक दमदार ट्राई-सर्विसेज झांकी पेश की, जो बदली हुई रक्षा क्षमताओं के जरिए ताकत, एकता और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा का प्रतीक है। ऑपरेशन सिंदूर में जीत की याद में ड्रोन शक्ति और इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर दिखाया गया। गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर दिव्यास्त्र और शक्तिबाण का प्रदर्शन किया गया। भारत ने कर्तव्य पथ पर अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए सूर्यास्त्र और ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम, आकाश वेपन सिस्टम और अभ्रा मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम का प्रदर्शन किया। नाग मिसाइल सिस्टम और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल प्रदर्शित किए गए।
भारतीय नौसेना और वायु सेना ने 77वें गणतंत्र दिवस परेड में सबका ध्यान खींचा, 2026 के गणतंत्र दिवस फ्लाईपास्ट के दौरान एक खास सिंदूर फॉर्मेशन दिखाया। इस फ्लाईपास्ट में श्स्पीयरहेड्य फॉर्मेशन में 2 राफेल, 2 मिग-29, 2 सुखोई-30 और 1 जगुआर शामिल थे, जो ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना की भूमिका को समर्पित था। हालांकि इस कार्यक्रम का मुख्य विषय श्वंदे मातरम्य के 150 साल था, लेकिन भारतीय सेना का ऑपरेशन सिंदूर कर्तव्य पथ पर परेड में खास तौर पर दिखाया गया।
वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर कर्तव्य पथ पर एक विशेष प्रस्तुति दी गई, जिसमें पूरे भारत की सांस्कृतिक विविधता को एक सूत्र में पिरोकर पेश किया गया, जिसे देखकर सभी दर्शक अभिभूत हो गए। आयुष मंत्रालय की झांकी में भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति को दर्शाया गया। इसके बाद कौशल विकास उद्यमशीलता की झांकी प्रदर्शित की गई। इसके बाद छत्तीसगढ़ की झांकी निकाली गई, जिसमें डिजिटल विकास और बलिदानियों के प्रति सम्मान को प्रदर्शित किया गया।
इसके बाद गृह मंत्रालय की झांकी निकाली गई, जिसमें भारतीय न्याय संहिता को लागू करने और गुलामी की सोच को मिटाने को प्रदर्शित किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश की झांकी निकली, जिसमें राज्य के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को दर्शाया गया।
उत्तर प्रदेश की झांकी में दिखी बुंदेलखंड की शाश्वत भव्यता
उत्तर प्रदेश की झांकी बुंदेलखंड की शाश्वत भव्यता को दिखाती है, जो इसकी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक उत्तर प्रदेश के गतिशील और तेजी से आगे बढ़ते विजन के साथ खूबसूरती से मिलाती है। सामने वाले हिस्से में एकमुख लिंग है, जो कालिंजर की सबसे मशहूर पत्थर की मूर्तियों में से एक है, जो बुंदेलखंड की गहरी आध्यात्मिक जड़ों और असाधारण वास्तुकला विरासत का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश की झांकी की थीम- एकमुखीलिंग, छत्तीसगढ़ की स्वतंत्रता का मंत्र, वंदे मातरम्, तमिलनाडु की समृद्धि का मंत्र, आत्मनिर्भर भारत, गुजरात की थीम- स्वदेशी मंत्री, स्वावलंबन, वंदे मातरम्, नगालैंड की हॉर्नबिल फेस्टिवल – संस्कृति, पर्यटन और आत्मनिर्भरता, पंजाब की श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित, केरल की वॉटर मेट्रो और 100श् डिजिटल साक्षरता, हिमाचल प्रदेश री देवभूमि, वीरभूमि, राजस्थान की बीकानेर आर्ट को समर्पित रही।

