कानपुर 01 अप्रैल। किडनी की खरीद-फरोख्त और अवैध ट्रांसप्लांट में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की उपाध्यक्ष एवं आहूजा अस्पताल की संचालिका डॉ. प्रीति आहूजा समेत दो डॉक्टर, तीन अस्पताल संचालक और एक दलाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। डॉ. प्रीति के अलावा जो लोग जेल भेजे गए हैं, उनमें उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, मेडलाइफ हॉस्पिटल के संचालक राजेश कुमार व राम प्रकाश कुशवाहा, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह और एजेंट शिवम अग्रवाल शामिल हैं। इनसे पूछताछ के बाद पुलिस ने किडनी के सौदागरों के बड़े रैकेट का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में 10 नामजद पांच और अज्ञात समेत 15 पर रिपोर्ट दर्ज किया है। पुलिस को इस मामले में चार डॉक्टर डॉ. रोहित उर्फ राहुल, डॉ. वैभव, डॉ. अनुराग और डॉ. अफजल की तलाश है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने मंगलवार को खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस और सीएमओ की टीम द्वारा अभी भी छापेमारी जारी है। फिलहाल की पूछताछ में यह बात प्रकाश में आई है कि बिहार के समस्तीपुर निवासी आयुष से छह लाख रुपये में किडनी का सौदा हुआ था। साढ़े तीन लाख रुपये यूपीआई के माध्यम से उसके खाते में भेजे गए। वहीं मुजफ्फर नगर के नार्थ सिविल लाइंस की रहने वाली पारुल तोमर को किडनी देने के लिए 80 लाख रुपये वसूले गए थे। आयुष देहरादून में एमबीए चतुर्थ वर्ष का छात्र है।
तीन अस्पतालों में छापा भी मारा इनमें कल्याणपुर आवास विकास एक नंबर स्थित प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, केशवपुरम रोड स्थित आहूजा हॉस्पिटल, पनकी कल्याणपुर रोड स्थित मेडलाइफ हॉस्पिटल शामिल हैं। टीम ने किडनी संबंधी रोगों के भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी जुटाई। छापे की इस कार्रवाई को किडनी रैकेट से जोड़कर देखा जा रहा है।
टेलीग्राम से संचालित होता था सिंडीकेट
मुजफ्फरनगर की पारुल की दोनों किडनियां खराब हैं। वह आठ साल से डायलिसिस करा रही हैं। मेरठ में डॉ. अफजल इलाज कर रहे थे। गिरोह ऐसे लोगों को फंसाता था। पूरा सिंडिकेट टेलीग्राम ग्रुप से चलता था। डॉ. अफजल ने इसी टेलीग्राम ग्रुप पर किडनी की जरूरत बताई थी।
मेरठ पुलिस ने कानपुर पुलिस से किया संपर्क
मामले का खुलासा होने के बाद मेरठ पुलिस ने कानपुर पुलिस से संपर्क कर शहर से जुड़े लिंक की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
ऐसे बांटी गई सभी को रकम
कमिश्नर ने बताया कि रविवार को डॉ. रोहित सात डॉक्टरों की टीम लेकर आया था। ट्रांसप्लांट के बाद शिवम को सात लाख दिए, जिसमें 3.50 लाख आयुष के खाते में डाले। 2.75 लाख आहूजा हॉस्पिटल को दिए, 25 हजार मेडलाइफ को और 50 हजार उसने खुद रखे थे।
बता दें कि इस गिरोह ने उत्तराखंड के एक जरूरतमंद युवक की किडनी महज 9.5 लाख रुपये में खरीदकर मुजफ्फरनगर की एक महिला मरीज को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच डाली थी। अवैध तरीके से की गई किडनी की इस खरीद-फरोख्त का सुराग लगने पर सोमवार को पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने अस्पतालों में छापा मारा।
पति या पत्नी के किडनी दान पर वैध विवाह का प्रमाण अनिवार्य है। प्रमाणपत्र, शादी की तस्वीरें, संयुक्त निवास के अलावा दंपति के साथ रहने, संबंध की वास्तविकता तक बतानी पड़ सकती है।

