Date: 30/05/2024, Time:

निर्वाचन आयुक्त अरूण गोयल ने क्यों दिया इस्तीफा, साफ हो कारण!

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टीएन सेंशन का भारत निर्वाचन आयुक्त बनने के बाद से इस महत्वपूर्ण पद की गरिमा और गौरव तथा धमक काफी बढ़ गई। परिणाम स्वरूप जो राजनीतिक दल पहले इसकी पूरी तौर पर अवहेलना करते थे वो भी निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन हर हाल में करते नजर आने लगे। वो बात ओर है कि पर्दे के पीछे से कहीं कोई गड़बड़ कर ले अगर उसका पता टीएन सेंशन को चल जाता था तो फिर नियम का उल्लंघन करने वाले नेता और दल को उसका खामियाजा भी भुगतना ही पड़ता था। वर्तमान में भारत निर्वाचन आयोग इस समय अपने निष्पक्षता और कड़वे निर्णय लेने के लिए जाना जाता है। और जहां तक दिखाई देता है वो किसी को भी चाहे सत्ताधारी दल का नेता हो या विपक्ष का बक्सने को तैयार नहीं है और अच्छी बात यह है कि आयोग को इस काम में सब तरह से पूरी मदद मिल रही है।
इस सबके बावजूद 19 नवंबर 2022 में निर्वाचन आयुक्त नियुक्त हुए श्री अरूण गोयल जिनका कार्यकाल 2027 तक था ने क्यों दिया इस्तीफा जब कि पूर्व में श्री अनुप चंद पांडे फरवरी माह में सेवानिवृत्त हो चुके है। और बताते है कि 2025 में अरूण गोयल का मुख्य निर्वाचन आयुक्त बनना तय था। ऐसे में व्यक्तिगत कारणों को लेकर उनके द्वारा इस्तीफा दिया जाना मामूली बात नहीं है। इसके पीछे कोई न कोई बड़ा कारण तो जरूर होगा।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जून खड़गे द्वारा इस ओर ध्यान दिलाने हेतु सवाल उठाया है। मुझे लगता है कि इस्तीफे के पीछे के कारणों का खुलासा लोकतंत्र में आम आदमी की जानकारी हेतु जरूर होना चाहिए। बताते चले कि माननीय प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्य अस्थाई समिति जिसमें सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश और लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को रखा गया है और इनकी सहमति पर निर्वाचन आयुक्त बनाये जाने की व्यवस्था जग जाहिर है।
वर्तमान समय में तीन सदस्य निर्वाचन आयोग में अब केवल मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ही है। इसलिए चर्चा है कि 15 मार्च को लोकसभा चुनाव से पूर्व पीएम की अध्यक्षता में दो निर्वाचन आयुक्त तय करने हेतु शाम 6 बजे बैठक होगी। जिसमें यह पक्का समझा जा रहा है कि श्री अरूण गोयल और अनुप चंद पांड़े के स्थान पर दो सदस्य निर्वाचन आयुक्तों के नाम पर मोहर लग सकती है। भारत एक बड़ा लोकतांत्रिक देश है और इसमें चुनाव की प्रक्रिया एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यवस्था है इसलिए 2024 के लोकसभा चुनाव से पूर्व हर हाल में तीन सदस्य निर्वाचन आयोग होना चाहिए। और इसमें किसी को कोई अड़ंगेबाजी भी मेरी निगाह में नहीं करनी चाहिए।
लेकिन एक बात जरूर है कि इतने बड़े महत्वपूर्ण पद की हर बात पारदर्शी होना अत्यंत आवश्यक है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए मुझे लगता है कि कहीं न कहीं कुछ न कुछ आपसी मतभेद तो जरूर रहे होंगे वर्ना आसानी से यह महत्वपूर्ण पद छोड़ने का निर्णय शायद कोई भी लेने को तैयार नहीं होगा। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए खुद इस्तीफा देने वाले निर्वाचन आयुक्त को स्थिति स्पष्ट करने में देर नहीं करनी चाहिए बाकी तो नियमावली और कानूनी प्रक्रिया अपनाने में नियुक्ति कमेटी कोई कोर कसर नहीं रखेगी।
मेरा मानना है कि निष्पक्ष मतदान पूर्ण कराने हेतु फर्जी न्यूज और सीमा से ज्यादा खर्च तथा अन्य वस्तुओं का उपयोग रोकने के लिए निर्वाचन आयोग को थोड़ा सख्ती और करनी चाहिए अगर कोई उल्लंघन करता पाया जाए तो जिस प्रकार से आम आदमी के ऊपर कार्रवाई की जाती है वो ही तरीका नियम का पालन कराने वालों पर भी लागू हो। क्योंकि आज की तारीख में भारतीय लोकतंत्र और हमारी निर्वाचन प्रणाली की मिसाल अनेक देशों में दी जाती है। भारत का ये सम्मान इस मामले में बना रहे इसके लिए मैं विश्वास से कह सकता हूं कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी कहीं भी कुछ भी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर कुछ भी गलत नहीं होने देंगे। और यह मत मेरा ही नहीं देश के हर जागरूक तथा निष्पक्ष सोच वाले नागरिकों है। इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता।

प्रस्तुतिः अंकित बिश्नोई सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के राष्ट्रीय महामंत्री पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी पत्रकार व संपादक

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