Date: 30/05/2024, Time:

कौन जीतेगा कौन हारेगा यह अलग बात है लेकिन केजरीवाल को जमानत मिलने से यह साफ हो गया कि न्याय हमें मिल रहा है और मिलता रहेगा

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देश में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसे बहुत कम नेता हैं जो अकेले दम पर सियासत की पारी शुरू कर कामयाबी के शिखर पर धीरे धीरे पहुंच रहे हैं। उन्हें जेल किस भावना से भेजा गया यह एक अलग विषय है लेकिन ईडी के विरोध के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 39 दिन बाद जमानत दी। जिससे वो दिल्ली और अन्य राज्यों में लोकसभा चुनाव में प्रचार कर सके। बताते चलें कि दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर 25 को मतदान होना है। और एक जून को जमानत की अवधि समाप्त होने पर दो जून को केजरीवाल को करना पड़ेगा सरेंडर। मुख्यमंत्री रहते हुए अब तक कोई कुछ भी कह ले या ईमानदार का आंदोलन चलाने वाले अन्ना हजारे कुछ भी कहें लेकिन निष्पक्ष सोच वाले आम आदमी की निगाह में अरविंद केजरीवाल पाक साफ बताए जाते हैं। केजरीवाल को सीएम के रूप में सचिवालय की अनुमति नहीं होगी। केजरीवाल अपनी भूमिका के बारे में टिप्पणी नहीं करेंगे और केस की फाइल नहीं देखेंगे । किसी गवाह से संपर्क नहीं करेंगे और ना ही फाइलों पर हस्ताक्षर करेंगे। लेकिन मेरा मानना है कि भले ही कितनी भी पाबंदियों के बाद जमानत मिली हो मगर एक जनप्रतिनिधि का क्षेत्र की जनता की बीच खड़ा होना ही बड़ा होता है। फिर अरविंद केजरीवाल तो अब सीधे जनता के बीच रहेंगे। खैर जो भी हो भगवान के आशीर्वाद से हनुमान भक्त केजरीवाल को जमानत मिली। चुनाव परिणाम कुछ भी हो लेकिन इससे यह स्पष्ट जरूर हुआ कि देश की 40 करोड़ आबादी के सामने एक बार फिर यह सिद्ध हो गया कि अदालत से न्याय पहले भी मिल रहा था और आज भी मिल रहा है। कितने लोग इस मुददे पर अलग प्रकार से टिप्पणी करते हैं लेकिन मैंने जितना देखा पढ़ा और सुना उससे यही लगा कि हमारे न्यायालय हमारी आवाज को बुलंदिया देने का माध्यम हैं। ताकतवर कुछ समय के लिए परेशान कर सकते हैं लेकिन किसी की आवाजदबा पाना संभव नहीं है। इसलिए मुकदमे के संदर्भ में कोई भी टिप्पणी करना न्यायोचित नहीं होगा। मैं किसी सियासी दल से संबंध नहीं हूं लेकिन लगता है कि ऐसे निर्णय होते रहें जिससे आम आदमी को भयपूर्ण माहौल से छुटकारा मिले और उसकी सोच आगे बढ़ सके।
(प्रस्तुतिः संपादक रवि कुमार बिश्नोई दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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