नई दिल्ली, 12 फरवरी। केंद्र ने गत दिवस सुप्रीम कोर्ट में कहा कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य है और उन्हें स्वास्थ्य आधार पर रिहा करना संभव नहीं है। सरकार ने बताया कि उनकी हिरासत का आदेश अभी भी लागू है और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत उन्हें रोके रखने के लिए पर्याप्त कारण मौजूद हैं।
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और पीबी वराले की बेंच को बताया कि वांगचुक की हेल्थ चेकअप 24 बार की गई है और वे फिट, हेल्दी और किसी भी प्रकार के गंभीर जोखिम से मुक्त हैं। उन्होंने कहा कि वांगचुक को केवल कुछ पाचन संबंधी दिक्कतें थीं, जिनका इलाज किया जा रहा है। मेहता ने अदालत से कहा स्वास्थ्य के आधार पर किसी अपवाद की अनुमति नहीं दी जा सकती। हिरासत आदेश के आधार अभी भी जारी हैं। हमने इसका गंभीरता से अध्ययन किया है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को बताया कि वांगचुक ने हिंसक प्रदर्शन में युवाओं को उकसाने का काम किया। उन्होंने नेपाल और अरब स्प्रिंग के उदाहरण देते हुए युवाओं में हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। इसके जवाब में बेंच ने कहा कि वांगचुक ने सीधे हिंसा को बढ़ावा नहीं दिया, बल्कि उन्होंने केवल युवाओं के विचारों का हवाला दिया। बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वह कह रहे हैं कि युवाओं का मानना है कि शांतिपूर्ण तरीके असर नहीं दिखा रहे। पूरी बात को पढ़िए, कहीं सीधे हिंसा की ओर उकसाने का प्रमाण नहीं मिलता।
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