Date: 30/05/2024, Time:

महंगी फीस लेते हैं, डॉक्टर व अन्य सुविधाएं होती नहीं, बड़े स्कूलों की प्रबंध समितियां या संचालक आधुनिक पद्धति से करे सुरक्षा व्यवस्था

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दिल्ली के स्कूलों में बम होने की धमकी 178 को मेल के माध्यम से मिली या 223 को यह विषय अलग हो सकता है क्योंकि मीडिया को जैसे पता चला होगा उनके द्वारा खबरों का प्रकाशन किया गया। समाचारों से पता चलता है कि कुछ स्कूलों को सुबह सवा चार बजे और कुछ को साढ़े नौ बजे यह मेल मिले। खबरो से पता भी चलता है कि यह मेल प्रॉक्सी सर्वर के माध्यम से रूस से भेजा गया हो सकता है। रूस मित्र देश है। इसलिए इस मामले में हर प्रकार की जांच सहयोग भी करेगा। यह बात विश्वास से कही जा सकती है। इस मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा इंटरपोल की मदद ली जा रही है। इस सबके बावजूद इतनी बड़ी अफरा तफरी और कार्रवाई हुई कि 5000 पुलिस कर्मियों को इस काम में लगाया गया जिससे बच्चे सुरक्षित अपने घरों तक पहुंच सकें। यह भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस्लामिक स्टेट से जुड़ी हो सकती है मेल आईडी। गृह मंत्रालय ने आश्वास दिया है कि अभिभावक परेशान ना हो। पुलिस कह रही हेै कि यह किसी सिरफिरे की करतूत हो सकती है। जो भी हो धमकी मिलने के बाद पुलिस प्रशासन सतर्क हुआ। स्कूलों ने भी इससे निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तो दिल्ली के अनएडेड स्कूलों की कमेटी के अध्यक्ष भारत अरोड़ा ने स्कूलों को मिली धमकी के बाद पुलिस द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की है। यह बात बिल्कुल सही लगती है कि बाहरी देशों से आ रही फर्जी मेल और कॉल नागरिकों पुलिस प्रशासन और सरकार की मुसीबत बढ़ा रही है। जो भी हो 45 बम निरोधक दस्तों स्वान दस्तों और क्राइम टीम ने 90 वाहनों के साथ दमकलकर्मियों के साथ काफी प्रयास किया। परिणामस्वरूप बच्चे सुरक्षित हैं और स्कूलों में भी कोई बवाल नजर नहीं आ रहा है। भले ही पुलिस इस मेल को फेक बता रही हो लेकिन एक बात तो जरूर है कि भले ही कोई घटना ना हुई हो मगर तनाव अभिभावकों और बच्चों में पैदा हुआ। सही बात तो यह है कि बिना कुछ बताए अगर कोई किसी घटना को अंजाम देने की कोशिश करता है तो उसे रोकने में सफलता भगवान का आशीर्वाद ही कहा जा सकता है।
ग्रामीण कहावत शेर आया शेर आया को ध्यान में रखते हुए बड़े स्कूलों को अपने स्तर पर अत्याधुनिक ऐसी पद्धति से सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम करने चाहिए जिससे कोई भी स्कूल में अंदर हथियार व बम लेकर ना घुस सके। अगर कोई व्यक्ति अकेला घूस जाता है और गड़बड़ करने की कोशिश करता है तो उसे पकड़ने की स्कूलों की जिम्मेदारी भी है। क्योंकि अपने आप को उच्चस्तरीय बताने वाले स्कूल संचालक जो मोटी फीस लेते हैं वो इसलिए दी जाती है कि बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सुरक्षित घर लौट आएं। मेरा मानना है कि ऐसी धमकियों को ध्यान में रखते हुए सरकार को सर्वे कराकर कुछ बिंदुओं पर सुरक्षा के लिए स्कूलो को निर्देश देने चाहिए और जो उनका पालन ना करे उस स्कूल का लाइसेंस निरस्त किया जाए। हर स्कूल में डॉक्टर व सुविधाओं का उपलब्ध होना भी अनिवार्य किया जाए।
(संपादकः रवि कुमार बिश्नोई दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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