Date: 30/05/2024, Time:

राहुल गांधी अमेठी से भागे नहीं, दो जगह से बड़े नेता चुनाव लड़ते रहे हैं रायबरेली और वायनाड में भी कांग्रेस युवराज को मिल रहा है भरपूर समर्थन

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गांधी परिवार के अत्यंत निकट पिछले चालीस साल से अमेठी में निवास कर रहे किशोरी लाल शर्मा को चुनाव मैदान में उतारकर और खुद अपने पूरे परिवार की मौजूदगी में रायबरेली से नामांकन कर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों के दौरान आकस्मिक रूप से यह फैसले कर दर्शा दिया है कि वो भी गोपनीय रूप से नीति तैयार कर कोई फैसला करने में किसी के मुकाबले कमजोर नहीं है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और राबर्ट वाडा की मौजूदगी में राहुल गांधी ने रायबरेली से पर्चा भरा तो यह कहीं से भागने या हार के डर से मैदान छोड़ने का मामला नहीं है क्योंकि वो वायनाड सीट से भी लड़ ही रहे हैं जहां से जीत उनकी सुनिश्चित है। दो जगह से चुनाव लड़ना बड़े नेताओं की परंपरा रही है इसलिए राहुल गांधी को लेकर इस मुददे पर सवाल उठाना महत्वपूर्ण नहीं है। नामांकन के बाद रायबरेली के केंद्रीय कांग्रेस कार्यालय में उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेसी जनों और सहयोगी दलों के साथ पूजा अर्चना की। इस मौके पर गठबंधन के नेताओं व कार्यकर्ताओं में जो उत्साह था उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि यहां की जनता राहुल गांधी को भी उनके परिवार के अन्य सदस्यों के समान सम्मान देते हुए सिर माथे बैठाएगी।
बड़े दलों के नेताओं का क्षेत्र बदलना और एक से ज्यादा जगह से चुनाव लड़ना कोई नई बात नहीं है जो यह कहा जाए कि राहुल गांधी कहीं से भागकर चुनाव लड़ रहे हैं। भारत जोड़ो यात्रा के बाद से कांग्रेस की साख में जो सुधार हुआ और कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा हुआ है वो अभूतपूर्व है। और फिर यह चर्चा भी हमेशा चलती रही है कि भले ही एक तरफ राहुल गांधी को पप्पू बताते रहे हो मगर आम जनता में चर्चाओं में रहने वाले नेताओं में उनका नाम दूसरे नंबर पर कहा जाता है। एक बात भी जागरूक नागरिक कहते हैं कि भले ही ही राहुल गांधी कुछ कहते हो तो लोग समझ ना पाते हो लेकिन ज्यादातर बाते कुछ दिनों बाद सही साबित होती है। इसके उदाहरण के रूप में कोरोना के टीके को देखा जा सकता है।
राहुल गांधी हो या कोई और चुनाव जीतेगा या नहीं विजय प्राप्त करेगा तो कहां से लेकिन यह पक्का है कि बड़े नेताओं के लिए हार जीत कोई बड़ी मायने नहीं रखती हैं उनके लिए मायने रखता है उनके साथ जुड़ा जनाधार और समर्थकों की शुभकामनाएं। जो वर्तमान समय में राहुल गांधी के साथ बहुतायत में जुड़ी हुई नजर आती है।
(संपादकः रवि कुमार बिश्नोई दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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