नई दिल्ली 10 फरवरी। लोकसभा में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ Rule 94(c) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा है. इस नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें कांग्रेस, SP, Left, RJD समेत लगभग सभी विपक्षी दल शामिल हैं. हालांकि TMC ने इस नोटिस से दूरी बनाई है.
नोटिस देने के लिए कांग्रेस सांसद सुरेश कोडिकुन्निल, गौरव गोगोई,मोहम्मद जावेद लोकसभा महासचिव के पास पहुंचे थे.
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही में पक्षपाती रवैया अपनाया है और विपक्ष की आवाज को दबाया है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है. स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है. सवाल ही नहीं उठता कि पीएम पर कोई हमला करे. सरकार द्वारा उन पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की. इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है.’
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि स्पीकर खुद कांग्रेस की महिला सांसदों पर आरोप लगा रहे हैं और विपक्ष के लिए सदन में कोई जगह नहीं छोड़ी जा रही. उनके मुताबिक, संसद में विपक्ष के साथ इस तरह का व्यवहार पहले कभी देखने को नहीं मिला, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है.
वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी स्पीकर को लेकर तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि स्पीकर पर सरकार का दबाव साफ दिख रहा है और उन्हें सफाई देने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ है. प्रियंका गांधी का कहना था कि यह पूरा मामला अब केवल प्रक्रिया का नहीं, बल्कि संसद की गरिमा का बन चुका है.
अखिलेश यादव ने भी उठाया स्पीकर पर सवाल
समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने लोकसभा में विपक्ष के सवालों को उठाते हुए कहा कि विपक्ष चाहता है कि सदन में गंभीर चर्चाएं हों, खासकर अमेरिका से डील पर. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय सदन में अपने तर्कों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. सरकार को आगे आकर बहुत सी बातों को न लेकर सीधे-सीधे विपक्ष के सवाल का जवाब देना चाहिए.
ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने पर उन्होंने कहा, ‘स्पीकर का सम्मान और सदन की गरिमा महत्वपूर्ण हैं. उन बातों को लेकर हमने बातचीत की है, देखिए क्या निकलता है. हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि जिस तरह से बाजार खोला जा रहा है, जिस तरह से ढील दी गई है, उस पर चर्चा होनी चाहिए.’
नियम: लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा में कार्यप्रणाली और कामकाज के नियमों के अनुच्छेद 200 द्वारा नियंत्रित होती है.

