Date: 21/02/2024, Time:

रेप पीड़िता के टू फिंगर टेस्ट पर हाईकोर्ट नाराज, डॉक्टरों पर पांच लाख जुर्माना लगाया

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शिमला, 15 जनवरी। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग रेप पीड़िता का टू फिंगर टेस्ट करने वाले डॉक्टरों को फटकार लगाई है। इसी के साथ पीड़िता का टू फिंगर टेस्ट करने वाले डॉक्टर 5 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। जस्टिस तरलोक सिंह चौहान औरत्येन वैद्य ने पालमपुर के सिविल अस्पताल के उस हर डॉक्टर को ये जुर्माना लगाया जिन्होंने ये टेस्ट किया है। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट के लिए इस्तेमाल किए गए टेस्ट सहित पूरी प्रक्रिया कानून के मुताबिक बेहद खराब थी।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदेश सरकार जल्द से जल्द पीड़िता को पांच लाख रुपये का मुआवजा दे। बाद में यह रकम डॉक्टरों की सैलरी से काटी जाए। कोर्ट ने कहा कि इन डॉक्टरों ने रेप पीड़िता की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। डॉक्टरों की वजह से पीड़िता को मानसिक कष्ट पहुंचा है। इसके अलावा, उसे टू फिंगर टेस्ट से पहले डराया-धमकाया भी गया है।
बता दें कि कांगड़ा जिले के पालमपुर में एक नाबालिग लड़की से रेप की घटना पेश आई थी। जिसके बाद मेडिकल के लिए पीड़िता को पालमपुर के सिविल अस्पताल में ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसका टू फिंगर टेस्ट किया। जिसके बाद ये मामला हिमाचल हाईकोर्ट तक पहुंच गया। अब इस मामले में होईकोर्ट ने टेस्ट करने वाले डॉक्टरों को जुर्माना ठोका है। जुर्माने की राशि डॉक्टरों के वेतन से काटने के आदेश दिए गए हैं।

न्यायमूर्ति चौहान और वैद्य ने उच्च न्यायालय में सभी स्वास्थ्य पेशेवरों को इस टेस्ट का सहारा लेने से बचने का निर्देश दिया। यदि वे ऐसा करते हैं तो अवमानना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी। रिपोर्ट के लिए उपयोग किए गए प्रोफार्मा पर, न्यायाधीशों ने कहा कि यह 2013 में एक संशोधन द्वारा पेश किए गए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53ए का उल्लंघन करता है।
यह यौन हिंसा से बचे लोगों से निपटने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और प्रोटोकॉल को भी ओवरराइड करता है।

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