Date: 28/02/2024, Time:

ज्ञानवापी मस्जिद पहले मंदिर था, विष्णु- हनुमान -गणेश जी और त्रिशूल की आकृति का जिक्र

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वाराणसी 26 जनवरी। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने गुरुवार को ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर एक बड़ा दावा किया. आपको बता दें कि जैन ने भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के हवाले से दावा किया कि ज्ञानवापी मस्जिद वहां पहले से मौजूद एक पुराने मंदिर के अवशेषों पर बनाई गई थी. आपको बता दें कि जैन के इस दावे के बाद हलचल तेज हो गई. वहीं, दूसरी तरफ अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के वकील अखलाक अहमद ने हिंदू पक्ष के दावे को एक सिरे से यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मंदिर को तोड़कर कभी मस्जिद बनाई ही नहीं गई थी.
बता दें कि इस रिपोर्ट के अनुसार मस्जिद का गुंबद 350 साल पुराना है। इसके अलावा ज्ञानवापी की पश्चिमी दीवार नागर शैली में बनी हुई है। साथ ही ASI को हनुमान और गणेश की खंडित मूर्तियां भी मिलीं हैं। रिपोर्ट में दीवार पर त्रिशूल की आकृति मौजूद होने की बात भी कही गई है।

सर्वे रिपोर्ट
1. मस्जिद से पहले वहां बने मंदिर में बड़ा केंद्रीय कक्ष और उत्तर की ओर छोटा कक्ष था।
2. 17वीं शताब्‍दी में मंदिर को तोड़कर उसके हिस्‍से को मस्जिद में समाहित किया गया।
3. मस्जिद के निर्माण में मंदिर के खंभों के साथ ही अन्‍य हिस्सों का बिना ज्‍यादा बदलाव किए इस्‍तेमाल किया गया।
4. कुछ खंभों से हिन्‍दू चिह्नों को मिटाया गया है।
5. मस्जिद की पश्चिमी दीवार पूरी तरह हिन्‍दू मंदिर का हिस्‍सा है।
6. सर्वे में 32 शिलापट और पत्‍थर मिले हैं, जो वहां पहले हिन्‍दू मंदिर होने के साक्ष्‍य हैं।
7. शिलापटों पर देवनागरी, तेलुगु और कन्‍नड में आलेख लिखे हैं।
8. एक शिलापट में जनार्दन, रुद्र और उमेश्‍वर लिखा है, जबकि एक अन्य शिलापट में ‘महामुक्ति मंडप’ लिखा है।
9. मस्जिद के कई हिस्‍से में मंदिर के स्‍ट्रक्‍चर मिले हैं।
10. मस्जिद के निर्माण संबंधी एक शिलापट पर अंकित समय को मिटाने का प्रयास किया गया है।
जैन ने बताया कि ASI की 839 पन्नों वाली सर्वेक्षण रिपोर्ट की प्रतियां गुरुवार देर शाम अदालत द्वारा संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गईं. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से स्पष्ट है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित मस्जिद 17वीं शताब्दी में औरंगजेब के शासनकाल के दौरान एक भव्य हिंदू मंदिर को ध्वस्त किए जाने के बाद उसके अवशेषों पर बनाई गई थी.

जैन ने यह भी दावा किया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट में मंदिर के अस्तित्व के पर्याप्त सबूत मिलने की बात कही गई है, जिस पर मस्जिद का निर्माण किया गया था. उन्होंने दावा किया कि सर्वेक्षण के दौरान दो तहखानों में हिंदू देवताओं की मूर्तियों के अवशेष पाए गए हैं. जैन ने दावा किया कि ज्ञानवापी मस्जिद के निर्माण में स्तंभों सहित पहले से मौजूद मंदिर के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने दावा किया कि मंदिर को तोड़ने का आदेश और तारीख पत्थर पर फारसी भाषा में अंकित है. उन्होंने कहा कि ‘महामुक्ति’ लिखा हुआ एक पत्थर भी मिला है.
जैन ने कहा कि मस्जिद के पीछे की पश्चिमी दीवार एक मंदिर की दीवार है. उन्होंने कहा कि उस दीवार पर घण्टा, वल्लरी (लताओं का उकेरा गया चित्र) और स्वास्तिक का चिह्न मिला है. दीवार पर पत्थरों पर उकेरा गया ब्रह्म कमल का तोरण द्वार बना हुआ है.

एएसआई के मुताबिक़ इसका ज़िक्र जदुनाथ सरकार की 1947 में मासिर-ए-आलमगीरी के अंग्रेज़ी अनुवाद में भी है.
जदुनाथ सरकार के मासीर-ए-आलमगीरी के अंग्रेज़ी अनुवाद के हवाले से एएसआई अपनी रिपोर्ट में लिखता है, “2 सितंबर 1669 को यह बात दर्ज की गई कि शहंशाह औरंगज़ेब के आदेश के बाद उनके अधिकारियों ने काशी में विश्वनाथ का मंदिर तोड़ दिया.”
बता दें कि जिला अदालत के पिछले साल 21 जुलाई के आदेश के बाद एएसआई ने काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर किया गया था या नहीं।

हिंदू याचिकाकर्ताओं के यह दावा करने के बाद कि 17वीं सदी की मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर के ऊपर किया गया था, अदालत ने सर्वेक्षण का आदेश दिया था। इसके बाद एएसआई ने 18 दिसंबर को सीलबंद लिफाफे में अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट जिला अदालत को सौंपी थी।

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