Date: 18/07/2024, Time:

नए नियमों में रेहड़ी वाले पर हुई एफआईआर दर्ज अपराधिक कानूनों से गरीब शरीफ और असहाय ना हो पीड़ित, सरकार को रखना होगा ध्यान, इवेंट ना बनाकर इस पर हो कार्रवाई

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लागू किए गए नए अपराधिक कानूनों को लेकर सत्ताधारी दल और विपक्ष की अलग अलग राय है मगर मेरा मानना है कि जो कानून बनाए गए हैं अगर उनसे निर्बल और असहाय लोगों की मदद का मार्ग प्रशस्त होता है तो कोई बुराई किसी बदलाव में नहीं है। कंेद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कह रहे हैं कि तीन साल में एफआईआर दर्ज होने के बाद मिलेगा न्याय। मुझे लगता है कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद तीन साल का समय लगना बहुत है। सरकार को इस पर पुनः विचार कर इसे तीन माह 90 दिन में न्याय मिलने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए क्योंकि तीन साल में एफआईआर कराने वाला और आरोपी किस स्थिति में होंगे और बाहुबलियों द्वारा पीड़ित को कितना प्रभावित किया जा सकता है यह पूर्व के मामलों को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
कानून बन गया है। जितनी सक्रियता पुलिस प्रशासनिक अधिकारी नागरिकों को इसे समझाने में दिखा रहे हैं वो अपने आप में एक बड़ी बात है इसके लिए सरकार को बधाई। क्योंकि इससे पहले तो थाना में या अन्य जगहों पर नागरिकों को पूछने पर भी हड़काया जाता था और कभी कभी सामूहिक रूप से पिटाई कर बेइज्जती कमजोरों की की जाती थी। समाचार पत्रों में जिलों में एफआईआर होने की चर्चा है। जिलों में पहले स्थान पर रहने के प्रयास हुए। पहली एफआईआर दर्ज तो यूपी में किसी एक स्थान पर हुई होगी मगर इसे लेकर दावे हो रहे है। इसे देखकर कहा जा सकता है कि नए कानूनों को इवेंट की तरह जनता में ले जाने की कोशिश की जा रही है।
देश की राजधानी दिल्ली से छपे एक समाचार में बताया गया है कि बीएनएस की धारा 285 के तहत रेहड़ी पटरी पर नए कानूनों के तहत दर्ज हुई पहली प्राथमिकी। क्योंकि नियम बना है तो मामले भी दर्ज होंगे। दोषी गरीब है या अमीर यह देखे बिना कार्रवाई होना तय है। लेकिन जहां तक मुझे लगता है इन नए अपराधिक कानूनों को लागू करने के साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय को देशभर में ुपुलिसकर्मियों को यह भी समझाना होगा कि वो इस कानून का दुरूपयोग कर गरीबों और अमन पसंद नागरिको को परेशान ना करें। दोषियों को ही कार्रवाई के तहत नामित कराया जाना चाहिए। क्योंकि पूर्व में जो नियम कानून बने हुए हैं उनमें से कुछ के तहत पुलिसकर्मियों द्वारा जिस प्रकार से बेकसूरों के उत्पीड़न की खबरें मिलती है। यह ना सुनने को मिले तो ही नागरिकों को लाभ और सरकार की मंशा सफल होगी।
(प्रस्तुतिः संपादक रवि कुमार बिश्नोई दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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