Date: 30/05/2024, Time:

डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास ‘पागलखाना’ को मिला व्यास सम्मान

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नई दिल्ली 21 फरवरी। हिंदी के प्रसिद्ध व्यंग्यकार और 2015 में पद्मश्री पुरस्कार विजेता डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी को उनके व्यंग्य उपन्यास ‘पागलखाना’ के लिए 32 वें व्यास सम्मान से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उनको झंडेवालान स्थित फाउंडेशन के सेमिनार हॉल में प्रदान किया गया। डॉ. चतुर्वेदी नरक यात्रा, बारामासी और हम न मरब जैसी चर्चित कृतियों के लेखक भी हैं। 1991 में केके बिरला फाउंडेशन द्वारा स्थापित, व्यास सम्मान पिछले 10 वर्षों के दौरान प्रकाशित किसी भारतीय नागरिक द्वारा हिंदी में लिखी गई उत्कृष्ट साहित्यिक कृति को दिया जाता है। इसमें चार लाख का नकद पुरस्कार, एक प्रशस्ति पत्र और एक पट्टिका दी जाती है।

व्यास सम्मान, फाउंडेशन द्वारा स्थापित तीन साहित्यिक पुरस्कारों में से एक है। इसमें सरस्वती सम्मान और बिहारी सम्मान भी शामिल हैं। प्रतिष्ठित साहित्यकार प्रोफेसर रामजी तिवारी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने डॉ. चतुर्वेदी को 2018 में
प्रकाशित उनके उपन्यास पागलखाना के लिए ‘व्यास सम्मान’ 2022 से नवाजने का फैसला किया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिविक रमेश थे। कार्यक्रम में केके बिरला फाउंडेशन के निदेशक डॉ. सुरेश ऋतुपर्ण और अरुणा गुप्ता सहित कई प्रतिष्ठित लेखकों ने भाग लिया।

डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने संबोधन के दौरान केवल उपभोक्तावाद द्वारा संचालित जीवन की शून्यता पर जोर दिया और भौतिकवाद से परे जीवन की वकालत की। उन्होंने प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए केके बिरला फाउंडेशन को धन्यवाद दिया।
प्रसिद्ध कवि और व्यंगकार अशोक चक्रधर ने कहा कि एक दिन ऐसा हो सकता है, जब लोगों पर डीप फेक और एआई का शासन होगा। यह पुस्तक उस भविष्य की दूरदर्शिता को दर्शाने वाली है। चयन समिति की सदस्य अपर्णा गुप्ता ने कहा कि यह पहली बार था कि एक व्यंग्य उपन्यास को चुना गया है। पागलखाना उन नागरिकों के बारे में है, जो अपने सामाजिक स्तर की परवाह किए बिना उपभोक्तावाद से गहराई और नकारात्मक रूप से प्रभावित हैं।

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