Date: 30/05/2024, Time:

क्या राजनीतिक दलों को अपने नेताओं पर विश्वास नहीं है जो वो सांसदों और विधायकों को इस्तीफा दिलाकर लड़ाते हैं चुनाव

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सत्ता हो या विपक्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जीतने या ज्यादा से ज्यादा अपने सांसदों की संख्या बढ़ाने हेतु सत्ता और विपक्ष गठबंधन के रूप में और कहीं अलग अलग भी मुफ्त की रेवड़ियां बांटने में पिछले काफी वर्षों से कोई भी पीछे नहीं है। बिना यह सोचे कि भविष्य में इसके परिणाम क्या हो सकते हैं। सब अपने अपने हिसाब से बयान देने और दूसरे से आगे बढ़कर बोलने में लगे है। लेकिन वर्तमान में एक पिछले कुछ वर्षों से चुनावों के दौरान एक अलग ही बात दिखाई देने लगी है और वो यह है कि विधानसभा चुनावों में राज्यसभा और लोकसभा के कुछ सदस्यों के इस्तीफे दिलाकर उन्हें विधायक के चुनाव लड़ाए जाते हैं और लोकसभा चुनाव में विधायकों को इस्तीफे दिलाकर चुनाव लड़ाने में सभी राजनीतिक दल एक सी सोच बनाते जा रहे हैं। एक आम आदमी भी यह जानता है कि सांसद हो या विधायक का चुनाव चुनाव लड़ने में सभी प्रतिबंधों के बाद भी काफी धन और समय बर्बाद होते हैं और किसी ना किसी रूप में इसका आर्थिक बोझ भी आम आदमी पर पड़ता है। सवाल यह उठता है कि क्या सत्ताधारी और विपक्ष के बड़े नेताओं को अपनी पार्टियों में ऐसे उम्मीदवार नहीं मिल पाते जिन्हें वह चुनावों में लड़ा सके और किसी को इस्तीफा भी ना दिलाना पड़े। मुझे लगता है कि उम्मीदवार भी होते हैं उनमें जोश भी होता है लेकिन जीत हार की गारंटी कोई नहीं दे सकता इसलिए आम मतदाता को इस्तीफा दिलाकर चुनाव लड़ाने से जो आर्थिक बोझ पड़ता है उससे बचाने के लिए इस व्यवस्था पर या तो राजनीतिक दल खुद ही सोचे या भारत निर्वाचन आयोग को सख्त निर्णय लेना चाहिए क्योंकि अब जिन विधायकों को इस्तीफा देकर चुनाव लड़ाया जाएगा फिर उनके स्थान पर दूसरे नेताओं को मैदान में उतारा जाएगा और इसमें हर हाल में नुकसान आम नागरिकों का ही होना है। इसलिए इस्तीफा दिलाकर चुनाव लड़ाने और दल बदल पर जनहित में लगनी चाहिए पूर्ण रोक।

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