Date: 21/02/2024, Time:

सीएम दें ध्यान! कैसे हो गया कृष्ण नगरी मथुरा में सरकारी कार्यक्रम में बार बालाओं का डांस

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देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी व सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा भारतीय संस्कृति से युवाओं को अवगत कराने और उसकी गरिमा बनाए रखने के साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि कहीं भी कोई ऐसा कार्य ना हो पाए जिसे लेकर विवाद की स्थिति बने मगर लगता है कि कुछ सरकारी नौकर पीएम और सीएम की प्यार भरी भाषा समझ नहीं पा रहे हैं वरना कृष्ण नगरी मथुरा में सरकारी कार्यक्रम में बार बालाओं के डांस का आयोजन किसी भी रूप में नहीं हो पाता। एक खबर के अनुसार श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के पदाधिकारियों ने जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर ब्रज के राजा दाऊजी महाराज बलदेव में सरकारी प्रोग्राम में बार-बालाओं द्वारा अश्लील नृत्य पर रोक लगाने और दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि का केस लड़ रहे हिंदुवादी दिनेश शर्मा का कहना है कि हम जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दे चुके हैं और सनातनी हिंदुओं में बहुत रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रम में रास करना चाहिए, महारास करना चाहिए। गीता, रामायण का पाठ हनुमान, चालीसा का पाठ करना चाहिए। इस प्रकार के अश्लील नृत्य शोभा नहीं देते हैं, इससे हमारे सनातन धर्म की बदनामी होती है।
राष्ट्रीय मंत्री पींडी चौधरी का कहना है कि सनातन धर्म को बदनाम करने की यह एक साजिश है। राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेश पाठक ने कहा कि अब हिंदू जाग चुका है, हमारी सनातन धर्म को जो भी बदनाम करेगा हम उसके खिलाफ आवाज उठाएंगे।
राष्ट्रीय महासचिव कन्हैया लाल बृजवासी ने कहा कि हिंदूवादी सरकार में इस प्रकार के गलत नृत्य शोभा नहीं देते हैं। बृज भूमि के प्रदेश अध्यक्ष मनोज शर्मा ने कहा कि जिसने भी यह कार्य किया है उसके खिलाफ हम कार्रवाई की मांग करते हैं। इस दौरान हरिओम ठाकुर, राधेश्याम गुप्ता, जिला अध्यक्ष डॉ. हरिचंद्र, नरेश अग्रवाल, जिला महानगर अध्यक्ष नरेश ठाकुर, वीरपाल चौधरी, रामवीर सिंह, सरोज गोला, मीना गुप्ता, देवकीनंदन, पुष्पा रावत आदि मौजूद रहे। इस आयोजन का कई हिंदू संगठनों द्वारा खुला विरोध करते हुए जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर ब्रज के राजा दाउदी महाराज बलदेव में हुए ऐसे आयोजन की निंदा की गई है। मेरा भी मानना है कि मुख्यमंत्री जी इस कार्यक्रम के संदर्भ में छपी खबर को गंभीरता से लेते हुए दोषी अधिकारियों व अन्यों के खिलाफ कार्रवाई करें। इससे भविष्य में इस प्रकार की ऐसी परिस्थितियां पैदा ना हो पाए जिनके बारे में चर्चा करते हुए भी धार्मिकजनों को शर्म महसूस हो।

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