Date: 22/04/2024, Time:

चंडीगढ़ मेयर चुनाव परिणाम, क्यों कर रहे हैं कुछ अधिकारी सरकार और सत्ता पक्ष को बदनाम करने की कोशिश

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केंद्र और कई प्रदेशों में सत्ताधारी दल का प्रभाव और उसके जीतने वाले सदस्यों की संख्या फिलहाल तो बढ़ती ही जा रही है। केंद्र सरकार का पीएम के रूप में नेतृत्व कर रहे माननीय नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली अच्छे विचार और सबके हित की सोचने के चलते सत्ताधारी दल की छवि भी सुधरी हुई है। उसके बावजूद उन कुछ लोगों द्वारा जिन्होंने चंडीगढ़ के मेयर पद के चुनाव में गड़बड़ी की के कार्यां से पार्टी और सरकार की छवि पर सवाल उठने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
बताते चलें कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव में पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह द्वारा मतपत्रों की जांच में कुछ को गलत तरीके से रद कर एक पक्ष के प्रति दुर्भावना दिखाई गई। जो मामला पकड़े जाने पर गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल हो गई। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी भले ही कुछ भी कह ले लेकिन दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का कथन बिल्कुल सही है कि सुप्रीम कोर्ट ने जनतंत्र को बचाया। परिणामस्वरूप आप पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप कुमार इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीत गए। उनका कहना कि मैं तो 20 जनवरी को ही चुनाव जीत गया था अगर पीठासीन अधिकारी ने ईमानदारी का परिचय दिया होता। स्मरण रहे कि मामला खुलने के बाद पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की दलीलों से कोर्ट सहमत नहीं हुआ और विशेष तथ्यों के तहत फैसला सुनाते हुए कुलदीप कुमार को मेयर घोषित कर दिया। उन्होंने नए सिरे से चुनाव की मांग को यह कहते हुए इनकार कर दिया कि जब मनोज कुमार सोनकर ने इस्तीफा दे दिया है तो नए सिरे से चुनाव की जरूरत नहीं है। मेरा मानना है कि लोकतंत्र में निर्वाचन की ताकत को सर्वोपरि बनाने और आए दिन विपक्ष द्वारा चुनाव में गडबडी के जो आरोप लगते हैं ऐसी सोच को रोकने के लिए चंडीगढ़ मेयर चुनाव में पीठासीन अधिकारी रहे अनिल मसीह के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई। जिससे भविष्य में कोई ऐसी हिमाकत चुनाव परिणामों को लेकर ना कर सके। और विपक्ष को आरोप लगाने का ना मिले मौका और सत्ता दल की गरिमा भी बनी रहे।

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