Date: 22/06/2024, Time:

एक दिन गायों का हेल्थ चैकअप करने से ? अपने बच्चों को स्वस्थ और गायों को बचाना है तो उनकी देखभाल का जिम्मा सबको लेना होगा

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जब से पैदा हुए जन्म देने वाली मां धरती मां और गौ माता ये तीन शब्द हमेशा सुनने को मिले और भावना से जुड़े रहे। क्येंकि मां ने जन्म देने के बाद देखभाल की जिम्मेदारी ली तो धरती मां ने खेलने और स्वस्थ रहने के लिए अपनी सीना उपलब्ध करा दिया और गौमाता ने शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए दूध मक्खन उपलब्ध कराया। मगर जैसे जैसे अब समय में बदलाव आ रहा है हम अपनी मांओं के ऋण को भूलकर अपने स्वार्थ को पूरा करने में लग गए हैं। इसीलिए कुछ बच्चे मां बाप से मुंह मोडकर उन्हें वृद्धाआश्रमों में छोड़ने लगे हैं। धरती का इतना हम उपयोग कर रहे हैं उसके नुकसान की ओर हमारा ध्यान नहीं है। अगर गौमाता की बात करें तो गायों को जो नागरिक पाल रहे हैं और जो लोग व साधु संन्यासी व संगठन गौशाला चला रहे हैं उनमें रहने वाली गौमाता को छोड़ दे तो जो दिखाई दे रहा है गांव हो या शहर इनके पालक दूध दूहने के बाद खुला छोड़ देते है। देहात में तो इन्हें खेतों में घास खाने को मिल जाती है लेकिन शहरों में कूड़ों के ढेरों में शुद्ध दूध देने वाली गौमाता को खाने का सामान टटोलते हुए देखा जा सकता हैं जब कभी ऐसा वीडियो या समाचार वायरल होता है और वो पीएम सीएम सहित जिम्मेदार अफसरों तक पहुंच जाता है तो उसे लेकर बवाल होता है लेकिन हमारे सरकारें और वर्तमान सरकार गायों के लिए गौशाला और अधिकारियों को हर जिले में भारी बजट उपलब्ध करा रही है। पीएम मोदी द्वारा स्वच्छता अभियान चलाया गया है। समय समय पर गौमाता पर विभिन्न दर्जा देने की मांग उठ रही है। इस सरकार से जनप्रतिनिधि हमेशा औरों के साथ गोपालन में योगदान देते रहे हैं लेकिन वर्तमान में सड़कों पर जो नजर आ रहा है उसे देखकर तो यही कह सकते हैं कि सरकार बजट, सुविधा साधन उपलब्ध करा रही है लेकिन जिम्मेदार अपनी भूमिका सही नहीं निभा रहे हैं। इसलिए गायों और गोवंशों के कचरा खाने के वीडियो प्रचारित होते दिखाई देते हैं।
आज हम देशभर में पशु दिवस मना रहे हैं जिसके तहत एसएमएफजी नामक संगठन के स्वामीनाथ सुब्रमणियम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस दिन देशभर में गायों की देखभाल के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है और उनका संगठन पशु चिकित्सकों के साथ मिलकर इस दिन एक लाख से ज्यादा गायों का चैकअप करता है और यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन गायों की जो स्थिति दयनीय होती जा रही है वो दुख का विषय तो है ही सरकार को भी इस ओर विशेष रूप से ध्यान होगा।
क्योंकि अब वो व्यवस्था नहीं चलेगी कि साल भर दादा दादी मा बाप को पूछते नहीं और जब बेटी बेटे का रिश्ता आता है तो लाने वालों से उनका परिचय कराया जाता है और फिर उनके नाम पर लेनदेन की चर्चा शुरू हो जाती है और फिर जो बाद में बेकद्री होती है वो सब जानते है। कुछ ऐसा ही गायों के रखरखाव में हो रहा है मगर मुझे लगता है कि अब यह ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा क्यांकि हम दूषित दूध पीने को मजबूर होंगे। इसलिए गोप्रेमी आगे आए और सरकार किसानों को गाय पालने की जिम्मेदारी दे और बजट भी उपलब्ध कराएं।

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