देहरादून 09 अप्रैल। देश-दुनिया के लिए नए वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहे उत्तराखंड के युवाओं के लिए जीवनसाथी की तलाश कठिन होती जा रही है।
पिथौरागढ़ और चम्पावत जैसे सीमांत जिलों में विवाह योग्य लड़कियों की कमी से नेपाल से शादियों की खबरें लंबे समय से सुर्खियां बन रही हैं। अब यह संकट देहरादून तक पहुंच गया है। जिला अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट बताती है राजधानी में 25 से 34 साल की उम्र के तीन लड़कों पर महज एक लड़की है। पहाड़ के कई गांव ऐसे हैं जहां माता-पिता अपने जवान बेटों के लिए लड़कियां तलाशते-तलाशते थक गए हैं। पहाड़ों पर बीते कुछ वर्षों में इस समस्या का ठीकरा बेटियों के सिर फोड़ा जाता है। तर्क दिया जाता है कि लड़कियां अब पति से नौकरी के साथ देहरादून-हल्द्वानी जैसे महानगरों में घर या एक प्लॉट की भी उम्मीद कर रही हैं। रिपोर्ट बताती है कि बेटियों पर लग रहे आरोप बेमानी हैं। असल समस्या लिंगानुपात में अंतर का है।
रिटायरमेंट की उम्र बीतने पर भी रह गए अकेले
देहरादून में ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं जो रिटायरमेंट की उम्र बीतने के बाद भी अकेले हैं। 60 से 80 वर्ष के 5714 पुरुष ऐसे हैं जो एकाकी जीवन जी रहे हैं। इस तरह की महिलाओं की संख्या 2968 है।
उत्तर प्रदेश
25-34 आयु वर्ग का औसत देखें तो हर 100 पुरुषों पर 55-60 अविवाहित महिलाएं हैं। लगभग दो युवकों पर एक युवती है। यह डाटा राज्य सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग का है।
हरियाणा
राज्य के जींद और कैथल जिले में इस आयु वर्ग में हर 100 अविवाहित पुरुषों पर लगभग 35-40 अविवाहित महिलाएं ही उपलब्ध हैं। लगभग तीन युवकों पर एक युवती है।
पंजाब
25-34 साल के आयु वर्ग में हर 100 पुरुषों पर करीब 42 महिलाएं अविवाहित श्रेणी में आती हैं। प्रत्येक तीन युवकों पर एक युवती है। पंजाब सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग का यह डाटा है।
राजस्थान
25-34 वर्ष के आयु वर्ग में हर 100 पुरुषों पर करीब 45 से 48 महिलाएं हैं। हर दो युवकों पर एक युवती। यह जानकारी राजस्थान के अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग से ली गई है।
उत्तराखंड
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शादी के इंतजार में 35 की उम्र पार कर 49 साल तक पहुंच गए युवकों की संख्या 7025 है। इनमें से भी 3281 युवक 40 की उम्र पार चुके हैं।

