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    Home»न्यूज़»लोक सेवक का स्पष्टीकरण जरूरी नहीं : कोर्ट
    न्यूज़

    लोक सेवक का स्पष्टीकरण जरूरी नहीं : कोर्ट

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comMay 22, 2026No Comments2 Views
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    लखनऊ, 22 मई (ता)। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लोक सेवक से एफआईआर दर्ज करने से पहले स्पष्टीकरण लेना कानूनी रूप से आवश्यक नहीं है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच एजेंसी के पास प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध दर्शाने वाली पर्याप्त सामग्री उपलब्ध हो, तो अलग से प्रारंभिक जांच किए बिना भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
    यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दीनानाथ यादव की याचिका खारिज करते हुए पारित किया। यादव ने 17 दिसंबर 2025 को उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत दर्ज एफआईआर को चुनौती दी थी।
    एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि सतर्कता विभाग की खुली जांच में याची की ज्ञात आय लगभग 1.95 करोड़ रुपये पाई गई। वहीं, उनके द्वारा करीब 2.51 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के प्रमाण मिले। इस प्रकार, लगभग 55 लाख रुपये की अतिरिक्त संपत्ति और व्यय सामने आया, जिसका संतोषजनक स्रोत नहीं कहा गया।
    याची की ओर से न्यायालय को कहा गया कि एफआईआर दर्ज करने से पहले उनसे उनकी आय, खर्च और संपत्तियों के संबंध में कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा गया था। यह भी तर्क दिया गया कि बिना प्रारंभिक जांच और जवाब का अवसर दिए एफआईआर दर्ज करना कानून के विपरीत है।
    राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि सर्वाेच्च न्यायालय पहले ही कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में एफआईआर दर्ज होने से पहले आरोपी लोक सेवक को सफाई देने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है।
    सरकार ने कहा कि यदि जांच एजेंसी को उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया अपराध दिखाई देता है, तो वह सीधे एफआईआर दर्ज कर सकती है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जांच अधिकारी का दायित्व केवल यह देखना होता है कि उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया अपराध बनता है या नहीं।
    इस स्तर पर आरोपी को सुनवाई या स्पष्टीकरण का अधिकार नहीं दिया जा सकता।

    Court Order Explanation from Public Servant Not Necessary: ​​Court lucknow tazza khabar tazza khabar in hindi Uttar Pradesh
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