Date: 18/06/2024, Time:

एक साथ पहली बार वरिष्ठ अधिवक्ता बनी 11 महिलाऐं

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नई दिल्ली 20 जनवरी। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए एक बार में 11 महिलाओं को सीनियर एडवोकेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। यह फैसला बेहद खास है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के 1950 में स्थापना के बाद से अब तक सिर्फ 12 महिला वकीलों को ही यह सम्मान मिला है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने 45 पुरुष वकीलों को भी उनके उत्कृष्ट कानूनी काम के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया है।

गत दिवस जिन 11 महिला वकीलों को वरिष्ठ नामित किया गया है, उनमें शोभा गुप्ता, स्वरूपमा चतुर्वेदी, लिज़ मैथ्यू, करुणा नंदी, उत्तरा बब्बर, हरिप्रिय पद्मनाभन, अर्चना पाठक दवे, शिरीन खजुरिया, एन. एस. नप्पिनाई, एस. जनानी और निशा बागची शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों ने शुक्रवार को आयोजित एक पूर्ण अदालत की बैठक में 19 जनवरी, 2024 से 56 अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ताओं के रूप में नामित किया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ के मार्गदर्शन में 11 महिलाओं और 34 पहली पीढ़ी के वकीलों सहित कुल 56 वकीलों को वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया गया है। न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा, जो अब सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं, ने 2007 में सर्वोच्च न्यायालय की ओर से प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ता पद से सम्मानित होने वाले पहले वकील के रूप में इतिहास रचा था।
इसके बाद 2013 में किरण सूरी, मीनाक्षी अरोड़ा और विभा दत्ता मखीजा को वरिष्ठ वकील बनाया गया, जिससे वरिष्ठ वकीलों की संख्या बढ़कर चार हो गई. 2015 में, दो और महिला वकीलों को नामांकित किया गया-वी मोहना और महालक्ष्मी पावनी – जिससे कुल संख्या छह हो गई. दो सेवानिवृत्त महिला उच्च न्यायालय न्यायाधीशों को भी बाद में नामांकित किया गया. 2006 में न्यायमूर्ति शारदा अग्रवाल और 2015 में न्यायमूर्ति रेखा शर्मा को वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया गया. यह ऐतिहासिक उपलब्धि सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के 57 साल बाद हुई है।

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