लखनऊ के अलीगंज के कोचिंग सेंटर में लगी आग के बाद उस पर बुल्डोजर चलाने की तैयारी हो चुकीहै लेकिन दिल्ली के होटल और लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग की घटना के बाद और भी घटनाएं सामने आरही हैं। ऐसे में सरकार ने कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई कर उन्हें सील किया और इसे कोई ज्यादा समय भी नहीं बीता है उसके बावजूद एक खबर पढ़ने को मिली कि कोचिंग सेंटरों को मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने बड़ी राहत दी है। गाजियाबाद जिले के फार्मूले पर मेरठ में भी कदम उठाया गया है । शर्त के साथ कोचिंग सेंटरों से अब सील हटा ली जाएगी। इसके लिए कोचिंग संचालक यह शपथ पत्र देंगे कि वे संचालन संबंधित मानकों की पूर्ति कर लेंगे। इसके लिए दो महीने की छूट दी गई है। जो संचालक शपथ पत्र मेडा कार्यालय में जमा कर देंगे, उनके सेंटर की सील मेडा द्वारा खोल दी जाएगी। कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तिथि नजदीक आ रही है, जिसको लेकर छात्र- छात्राएं लगातार कोचिंग सेंटर खोलने की मांग कर रहे हैं। उधर, लखनऊ के अलीगंज आगजनी के बाद कोचिंग सेंटरों में मानक पूरा कराने के जिला प्रशासन पर शासन का दबाव है। इसमें विकल्प तलाशा गया कि कुछ समय अवधि तक सेंटर खोल दिए जाएं। एक निश्चित समय सीमा में सेंटर संचालक मानक पूरा करने की प्रक्रिया भी पूरी कर लें। शहर में 1500 सेंटर हैं, जिनमें से लगभग 70 पर सील लगाई जा चुकी है। अन्य कोचिंग सेंटरों ने स्वयं के स्तर से ही संचालन बंद कर दिया था। प्रभारी प्रवर्तन पवन शर्मा की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार कोचिंग संचालक दो महीने में मानक पूरा कर लेंगे। इसमें मानचित्र की स्वीकृति, अग्निशमन, विद्युत सुरक्षा आदि से संबंधित मानक पूरा करेंगे। जिन सेंटरों में मानक पूरा करना संभव नहीं होगा तो सेंटर दूसरी जगह स्थानांतरित होंगे।
चर्चा है कि शपथ पत्र लेकर सील कोचिंग सेंटर मेडा अफसरों द्वारा खोले जाएंगे। अगर ऐसा होताहै तो अच्छा है लेकिन आज तक घटनाओं के बाद ऐसे वादे और वार्ताएं हुई लेकिन कोई बड़ा सुधार उनमें नहीं हो पाया। इसलिए शपथ पत्र देने के बाद भी कोचिंग संचालक वादे पूरे करेंगे यह संभव नहीं लगता है क्योंकि जितना सुना जाता है मेडा के अफसर जिन अवैध निर्माणों को कंपाउड करते हैँ वो शासन की नीति के खिलाफ है मगर फिर भी कंपाउंड से अलग क्षेत्र किसी से तोड़ा हो ऐसानहीं सुना। इसलिए कुछ नागरिकों का यह कहना कि मेडा के अफसर जानबूझकर दिल्ली और लखनऊ जैसी आग की घटनाओं को बढ़ावा देने का प्रयास ना ही करे तो अच्छा है। इसके किसी भी रूप में जनहित में नहीं कहा जा सकता। वो बात और है कि किसी दबाव या अन्य कारणों से जानलेवा बनने वाले कुछ कोचिंग सेंटरों की सील खोलकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को अनकहे रुप में निमंत्रण देने की कोशिश कह सकते हैं क्योंकि पूर्व में अदालत और सरकार काफी सख्त फैसले सुना चुकी है। मेरा मानना है कि जब तब यहकोचिंग सेंटर सुरक्षित जगह पर नियमों के अनुसार ना खुले तब तक उन्हें चलाने की अनुमति ना दी जाए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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