श्रीनगर 30 जून। तीन जुलाई से अमरनाथ यात्रा-2026 शुरू हो रही है। धाम पर जाने वाले दोनों मार्गों बालटाल और पहलगाम पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बालटाल मार्ग जहां 14 किलोमीटर का है। वहीं, पहलगाम मार्ग 48 किलोमीटर लंबा है। इसे तय करने में दो से तीन दिन लगते हैं। पहलगाम मार्ग की तुलना में बालटाल मार्ग अधिक कठिन है।
अमरनाथ यात्रा की इस दूरी को कम करने और यात्रा को सुगम बनाने के लिए रोपवे लगाने की तैयारी की जा रही है। साल 2025 में रोपवे को लेकर फैसला लिया था। पिछले साल सात रोपवे परियोजनाओं का मंजूरी मिली थी। जिनमें अमरनाथ धाम भी शामिल है।
रोपवे परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। अमरनाथ धाम पर केबल कार से न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी, बल्कि यह परियोजना पर्यटन और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह परियोजना पीपीपी मोड के तहत विकसित की जा रही है।
प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं में बालटाल-अमरनाथ भवन (अनंतनाग), पहलगाम-अमरनाथ (अनंतनाग) है। यानी बाबा बर्फानी की ओर जाने वाले दोनों मार्गों पर ही रोपवे लगाए जाना प्रस्तावित है।
रोपवे निर्माण करने वाली नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की कंपनी नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) ने प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की है। बालटाल से अमरनाथ गुफा के लिए 9 किलोमीटर का रोप-वे होगा। इससे 14 किमी के मार्ग की पैदल दूरी 10 घंटे से घटकर 40 मिनट रह जाएगी।
जानकारी के अनुसार, अगले साल परियोजना पर काम शुरू होगा। वहीं, इसे पूरा होने में करीब दो साल लगेंगे। इस तरह अमरनाथ यात्रा 2029 में श्रद्धालुओं को रोपवे की सुविधा मिलने की संभावना है।
अमरनाथ यात्रा के लिए मौजूदा समय में कोई रोपवे सेवा उपलब्ध नहीं है। इस साल सुरक्षा कारणों से यात्रा रूट को ‘नो-फ्लाइंग ज़ोन’ भी घोषित किया गया है, जिसके कारण इस बार हेलीकॉप्टर सेवाएं भी बंद हैं। श्रद्धालुओं को केवल पैदल, खच्चर या पोनी अथवा पालकी के माध्यम से ही यात्रा तय करनी होगी।

