मेरठ 10 जून (प्र)। सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवाओं (एएफएमएस) के अंतर्गत छावनी में कार्यरत स्थानीय स्वास्थ्य संगठन (स्टेशन हेल्थ आर्गेनाइजेशन – एसएचओ) की जल गुणवत्ता निगरानी प्रयोगशाला को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक आइएसओ 9001:2015 का प्रमाण- पत्र प्राप्त मिला है। यह उपलब्धि सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने, जनस्वास्थ्य संरक्षण को सुदृढ़ बनाने और पर्यावरणीय स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आइएसओ प्रमाणन संस्था एसक्यूसी सर्टिफिकेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से जारी प्रमाण-पत्र में जल गुणवत्ता निगरानी, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यावरणीय स्वच्छता, पेयजल सुरक्षा, रोग नियंत्रण और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों सहित संगठन की गुणवता प्रबंधन प्रणाली (क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम) को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणित किया गया है।
स्टेशन स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों के अनुसार पिछले एक वर्ष के दौरान संगठन की टीम छावनी क्षेत्र के 50 से अधिक पंप हाउसों और उपभोक्ता स्तर तक प्रतिदिन जल अवशिष्ट मुक्त क्लोरीन (फ्री क्लोरीन की जांच कर रही है। वर्तमान में प्रतिमाह लगभग 800 से 1000 जल नमूनों का परीक्षण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ता स्तर से एकत्रित जल नमूनों की नियमित जीवाणु संबंधी (बैक्टीरियोलाजिकल) जांच भी की जाती है। हर तीन माह में लगभग 120 नमूनों का सूक्ष्मजीव परीक्षण कर जल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। आइएसओ जल गुणवत्ता निगरानी परियोजना का उद्घाटन मंगलवार को मेरठ छावनी स्थित सैन्य अस्पताल में कमांडेंट व सीनियर एग्जीक्यूटिव मेडिकल आफिसर ब्रिगेडियर विक्रम पात्रा ने किया।
जल गुणवत्ता निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए एसएचओ और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) की और से छावनी क्षेत्र की जल वितरण प्रणाली का संयुक्त सर्वेक्षण भी किया गया। जनवरी 2026 में किए गए इस सर्वे का उद्देश्य ऐसे संवेदनशील बिंदुओं की पहचान करना था जहां सीवेज लाइन और पेयजल पाइपलाइन के बीच संभावित क्रास कनेक्शन का जोखिम हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार यह एक विस्तृत मैपिंग गतिविधि थी, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार के प्रदूषण जोखिम को समय रहते चिन्हित कर रोका जा सके। हालांकि सर्वेक्षणके दौरान समग्र जल गुणवत्ता संतोषजनक मिली।
जलजनित रोगों की रोकथाम में मिलेगी मदद
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार दूषित जल डायरिया, हैजा, टाइफाइड, पेचिश और हेपेटाइटिस जैसे जलजनित रोगों का प्रमुख कारण होता है। ऐसे में जल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और वैज्ञानिक परीक्षण सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सैन्य स्टेशन की जलापूर्ति प्रणाली के अंतर्गत आवासीय क्षेत्रों कार्यालयों, विद्यालयों, प्रशिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और अन्य प्रतिष्ठानों को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। आइएसओ प्रमाणित प्रयोगशाला विभिन्न जल स्रोतो, भूमिगत जल भंडारो, ओवरहेड टैंको और वितरण बिंदुओं से नमूने एकत्र कर उनके भौतिक, रासायनिक और जीवाणु संक्धी परीक्षण करेगी।
अधिकारियों ने बताया कि अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षित जल की उपलब्धता संक्रमण नियंत्रण प्रयोगशाला परीक्षणों, चिकित्सा प्रक्रियाओं और रोगी देखभाल के लिए अत्यंत आवश्यक है। नई निगरानी व्यवस्था से अस्पतालों और अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों में गुणवत्तापूर्ण पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 6 स्वग्जल और स्वच्छता के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सभी लोगों को सुरक्षित और गुणवतापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना है। साथ ही यह भारत सरकार के विकसित भारत – 2047′ के विजन को भी मजबूती प्रदान करती है।

