मेरठ, 30 मई (प्र)। कैंट बोर्ड मेरठ के नामित सदस्य डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को गत रात सीबीआई की टीम ने तीन लाख रुपये रिश्वत लेते दबोच लिया। देर रात पल्लवपुरम की अंसल टाउन सोसाइटी पहुंची सीबीआई उनके डुप्लेक्स में छानबीन करती रही। पेशे से होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. सतीश चंद्र शर्मा रक्षा मंत्रालय की ओर से नामित कैंट बोर्ड के सदस्य हैं। उनका घर लालकुर्ती में है और अंसल टाउन में डुप्लेक्स भी है। कैंट बोर्ड की बैठक होनी है। इससे पहले एक ठेकेदार ने पार्किंग ठेका नवीनीकरण के लिए आवेदन किया हुआ था। ठेका नवीनीकरण के लिए सतीश शर्मा ने ठेकेदार से तीन लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
ठेकेदार ने इसकी शिकायत सीबीआई से कर दी। सीबीआई की टीम ने जाल बिछाकर ठेकेदार को रुपये लेकर डॉ. सतीश शर्मा पास जाने के लिए कहा। बताया गया कि डॉ. सतीश शर्मा ने ठेकेदार को अंसल टाउन में पार्क के पास बुला लिया। ठेकेदार से तीन लाख रुपये लेते समय वहां पहले से मौजूद सीबीआई टीम ने डॉ. सतीश शर्मा को दबोच लिया। इसके बाद टीम डुप्लेक्स में देर रात तक कैंट बोर्ड से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करती रही। यह भी जानकारी मिल रही है कि एक नवनिर्मित मॉल के ठेकेदार ने भी उनके खिलाफ शिकायत की थी। हालांकि सीबीआई ने गिरफ्तारी के संबंध में आधिकारिक रूप से भी अभी कोई बयान जारी नहीं किया है।
चार साल से लगातार नामित सभासद बन रहा था सतीश छावनी परिषद के चुनाव नहीं होने के कारण रक्षा मंत्रालय ने 2022 में भाजपा वरिष्ठ नेता डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को नामित सभासद बनाया था। फिर इसके बाद से प्रत्येक वर्ष उसका कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा है। लगातार चार साल से कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है। जनवरी 2026 में ही सतीश चंद्र शर्मा को एक वर्ष के लिए फिर सभासद बनाया। इसे लेकर भी छावनी क्षेत्र के भाजपा नेताओं में नाराजगी है। वे अभी तक के सबसे लंबे कार्यकाल वाले नामित सभासद है। छावनी परिषद के चुनावों में सभासदों के टिकट वितरण में भी उनका हस्तक्षेप रहता आया है।
मेरठ छावनी परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों की भ्रष्टाचार की शिकायतों पर पहले भी कई बार सीबीआई गिरफ्तारी कर चुकी है। अक्टूबर 2022 में सीबीआई ने संविदा सफाई कर्मचारियों की भर्ती में रिश्वत मांगने के आरोप में कैंट बोर्ड के एक सैनेटरी सुपरवाइजर को 1.10 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। छापेमारी से पहले कई अधिकारी कार्यालय छोड़कर भाग गए थे। तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी से मिलने टीम उनके आवास पर भी पहुंची थी। इससे पहले कैंटोनमेंट जनरल हॉस्पिटल में 40 लाख रुपये की दवाओं के मामले में भी सीबीआई ने छापा मारा था। नवंबर 2023 में भी सीबीआई ने कैंट बोर्ड ऑफिस पर एक बड़ी छापेमारी की थी। सफाई निरीक्षकों की संलिप्तता के चलते कंप्यूटर हार्डडिस्क और फाइल्स जब्त की गई थी। दुकानों के अवैध निर्माण को जारी रखने के लिए घूस लेने के मामले में यह कार्रवाई हुई थी। बताया जाता है कि 2016 में भी कैंट बोर्ड में क्लर्क की नौकरी दिलाने के नाम पर 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई ने एक अधिकारी की गिरफ्तारी की थी।
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