सांसदों को नसीहत खुद को बदलें वरना परिवर्तन होते देर नहीं लगती में छिपा है भावी परिणामों का संदेश

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2014 में पूर्ण बहुमत से भाजपा और सहयोगी दलों के उम्मीदवारों को जिताकर लाने और केंद्र में सरकार बनाने तथा खुद प्रधानमंत्री बने श्री नरेंद्र मोदी जी की अगुवाई में सहयोगी नेताओं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नडडा, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह जैसे नेताओं के सहयोग से विधानसभाओ के हुए चुनावों में कई में तो अपने दम पर और कई में जोड़तोड़ कर भाजपा का परचम फहराने में सफल रहे मोदी जी 2019 मंे दोबारा अपनी सफलता का डंका बजाते हुए केंद्र में सरकार बनाने और प्रधानमंत्री बनने में भी कामयाब रहे। ऐसा क्यों हुआ यह तो किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है लेकिन जहां तक नजर आता है उनकी पाक साफ छवि वाकपुटता और निर्णय लेने की शक्ति ने तमाम परेशानियां और महंगाई तथा अपराध बढ़ने की चर्चा के बाद भी भाजपा को वोट दी लेकिन इसके बावजूद दिल्ली की सत्ता हाथ से निकल जाने और पंजाब व पश्चिम बंगाल आदि में विधानसभा चुनाव में मिली पराजय और फिलहाल लगभग एक साल से जारी किसान आंदोलन तथा कोरोना तथा फिर महंगाई एवं विभिन्न टैक्सों की मार ने जनता को हिलाकर रख दिया है इस बात से प्रधानमंत्री और भाजपा संगठन भी अनभिज्ञ नहीं है। वो बात दूसरी है कि चेहरे पर बिना कोई शिकन लाए भाजपा का हर नेता 2022 के विधानसभा चुनाव में जीतने और सरकार बनाने का दावा सीना ठोककर कर रहे हैं। मगर भविष्य की तस्वीर को ध्यान में रख देश के यशस्वी प्रधानमंत्री अब जनता के हितों की योजनाओं की घोषणाएं करने के साथ साथ अपनी पार्टी के नेताओं को भी सीधे सीधे अनकहे रूप में यह समझाने का प्रयास कर रहे लगते हैं कि आम आदमी से दूरी कहीं पराजय का कारण ना बन जाए। इसलिए दल के नेता मतदाता से सीधे संपर्क करें और ऐसा होता भी नजर आ रहा है। क्योंकि संगठन से जुड़े लोग सांसद व विधायक और मंत्री पब्लिक के बीच जा रहे हैं। और आयोजन भी करा रहे हैं। लेकिन लगता है कि शायद जितना असर होना चाहिए वो होता नजर नहीं आ रहा है इसलिए सधे शब्दों में पीएम द्वारा सांसदों को समझाया गया है कि वो संभल जाएं वरना परिवर्तन होेते देर नहीं लगेगी।
सीधे सीधे लाल टोपी यानि सपा पर बिना कहे निशाना साधते हुए पीएम ने गोरखपुर में जो कहा वो महत्वपूर्ण था। लेकिन यूपी के मेरठ में सपा और रालोद गठबंधन की हुई संयुक्त रैली में जुटी भीड़ ने बड़े बड़ों को सोचने के लिए मजबूर किया है और अनकहे रूप में यह समझा दिया है कि जरा सी भ्ीा कमी कहीं हुई कि सत्ता परिवर्तन होते देर नहीं लगेगी।
खैर फिलहाल बात हम गत सात दिसंबर को दिल्ली के अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में केंद्रीय मंत्री अमित शाह व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नडडा आदि की उपस्थिति में संसदीय दल की हुई बैठक में प्रधानमंत्री द्वारा अपने दले के सांसदों को दी गई नसीहत कि खुद बदलिए वरना बदल दिए जाएंगे क्योंकि बदलाव आते देर नहीं लगती। उन्होंने कहा कि सांसद हर कार्यक्रम में बढ़चढ़कर हिस्सा लें। लोकसभा और राज्यसभा की बैठकों में अपनी पूर्ण उपस्थिति दर्ज कराएं। कई बार कहने के बाद भी जो ऐसा नहीं कर रहे हैं उनकी जानकारी है और उनमें बदलाव की देर नहीं लगेगी। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को आदिवासी गौरव दिवस मनाने के रूप मंे लिए गए फैसले के उपहार स्वरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बैठक में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। पहली बार संसद परिसर के बाहर हुई बैठक में एक बात अत्यंत महत्वपूर्ण नजर आई कि पहली बार शायद प्रधानमंत्री द्वारा सांसदों को यह समझाना पड़़ा कि सिर्फ चुनाव जीतकर सांसद बनने के अलावा बैठकों में शामिल होना और पार्टी की नीतियों और सरकारी की योजनाओं को लागू कराना भी बहुत जरूरी है। पीएम ने स्पष्ट कहा कि वह 13 और 17 दिसंबर को काशी में होने वाले सम्मेलनों में ना जाकर चल रहे संसद सत्र में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें।
राजनीति का उंट कब किस करवट बैठ जाए और जनता का मन कब कितना बदल जाए यह किसी को समझाने की आवश्यकता ना पहले थी ना आज है। शायद इसी दृष्टिकोण से पीएम द्वारा अपनी पार्टी की मजबूत जमीन को और मजबूती प्रदान करने का काम सहयोगी सांसदों को यह नसीहत देकर कहा कि अभी भी इशारों को सांसद विधायक और पार्टी पदाधिकारी नहीं समझे तो परिवर्तन शब्द का अर्थ पांच विधानसभाओं के होने वाले चुनाव परिणाम के बाद आसानी से सबको पता चल सकता है लेकिन ग्रामीण कहावत अब पछताए क्या होत है जब चिड़िया चुग गई खेत को ध्यान में रखते हुए अच्छा तो यही है कि सुख में सुमिरन सब करें तो दुख काए को होए को आत्मसात कर भाजपाई और सहयोगी दलों के नेता जनसमस्याओं के समाधान और सरकार की जनहित की योजनाओं को लागू कराने तथा शासन की नीति के तहत कुछ भ्रष्ट लापरवारह अफसरों द्वारा जो कार्यप्रणाली अपनाई गई है उस पर अंकुश लगाने और पीएम सीएम का संदेश उन्हें समझाने का काम जितनी जल्दी पूरा कर सके उतना अच्छा है। क्यांेकि देश में पक्ष और विपक्ष जितना मजबूत हो राष्ट्र समाज और जनता के हित में उतना ही अच्छा है। ं

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