अब गर्भ में ही आनुवांशिक बीमारियों की पहचान हो सकेगी

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लखनऊ. अब केजीएमयू में महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चों में आनुवांशिक बीमारियों की पहचान हो सकेगी। इसके लिए क्वीन मैरी में जेनेटिक डायग्नॉस्टिक यूनिट खुलेगी। इसका नाम निदान केंद्र होगा। गर्भ में बीमारी का पता चलने पर दंपत्ति बच्चे के जन्म पर भी निर्णय लेने में सक्षम होंगे। अधिकांश अनुवांशिक बीमारियों का इलाज आजीवन चलता है। इसका इलाज महंगा भी होता है। यह सेंटर केजीएमयू के तीन विभाग के सहयोग से संचालित होगा। क्वीन मैरी की डॉ. मिली जैन के नेतृत्व में यह केन्द्र शुरू होगा। इसके सहयोगी विभाग पीडियाट्रिक और हिमेटोलाजी हैं।

डॉ. मिली जैन के मुताबिक आनुवांशिक बीमारियां बच्चों में जंम से होती हैं। इनका इलाज जीवन भर चलता है। इन बीमारियों से पीड़ित बच्चे सामान्य जीवन नही जी पाते हैं। जेनेटिक स्क्रीनिंग से गर्भ में बीमारी का पता चलने पर दंपत्ति गर्भपात या जन्म के तुरंत बाद उस बीमारी का इलाज शुरू कर सकेंगे। पीडियाट्रिक विभाग की प्रमुख डॉ. शैली अवस्थी ने कहा कि बायोटेक्नॉलाजी विभाग को आर्थिक मदद के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।  मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।

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