मुख्यमंत्री जी थानेदारों की कार्यप्रणाली पर लगाना होगा अंकुश! हाईकोर्ट द्वारा भगवान श्रीराम एवं श्रीकृष्ण को सम्मान दिए जानें के निर्देश, राम बारातों में हंगामा व छेड़छाड़, शांति समितियों की बैठकें क्यों नहीं हुई

71
loading...

इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सोशल मीडिया में भगवान श्रीराम एवं श्रीकृष्ण को लेकर अश्लील टिप्पणी करने वाले आकाश जाटव उर्फ सूर्यप्रकाश को दोबारा ऐसा अपराध न करने की चेतावनी देते हुए सशर्त उसकी जमानत मंजूर करने के साथ ही कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। इसमें कुछ प्रतिबंध भी है। स्वतंत्रता के नाम पर किसी को दूसरे की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव द्वारा दिए गए आदेश से स्पष्ट होता है कि किसी की भी धार्मिक भावनाओं को अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं है। उसके बावजूद शहर कोतवाली के अंतर्गत होने वाली रामलीला की हर वर्ष निकलने वाली बारात पर गत शुक्रवार को इसी थाना क्षेत्र के गुदड़ी में किसी के द्वारा भगवान के डोले पर पत्थर फेंका गया। इसके पीछे उसकी क्या मंशा रही होगी यह तो वही जान सकता है लेकिन इस बात से बारात निकालने और रामलीला कराने वाली समिति के सदस्यों में रोष व्याप्त हो गया मगर स्थिति बिगड़ती इससे पूर्व नागरिकों द्वारा मामले को संभाला गया। कानून और शाति व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने शायद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की हर नागरिक को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने की भावना को ठीक से नहीं समझा या समझना नहीं चाहा जो भी हो। नौ अक्टूबर शनिवार को सदर बाजार क्षेत्र में निकली भगवान राम की बारात देखकर अपने घर जा रही महिलाओं आदि से भूसा मंडी के पास हारून निवासी मौरगंज द्वारा छेड़छाड़ की गई जिसकी ममता नामक महिला ने परिवार समेत सदर थाने पहुंचकर नामजद तहरीर दी। दूसरे दिन कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल रामलीला कमेटी और राम बारात से संबंध लोगों को लेकर एसएसपी से मिले आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। परिणाम स्वरूप नामजद व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की बात पुलिस कह रही है। इंस्पेक्टर सदर बाजार देवी सिंह रावत का कहना है कि आरोपी की तलाश में दबिश दी जा रही है। दूसरी तरफ कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल द्वारा पुलिस को अल्टीमेटम दिया गया कि 24 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए।
इस मामले में छेड़छाड़ से पीड़ित दोनों बहनों द्वारा साहस का परिचय देते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। दूसरी तरफ एसएसपी प्रभाकर चौधरी का कहना है कि घटना को लेकर सांप्रदायिक तनाव नहीं हुआ है। यह एक अच्छी बात है। तो उत्तर प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी द्वारा भी इन घटनाओं को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई है। बताया जा रहा है कि इन दोनों शोभायात्राओं को लेकर पुलिस के समक्ष कई परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं।
पुराने लोग और यहां रह चुके अफसर अच्छी तरह जानते हैं कि देश के कई शहरों में पूर्व में धार्मिक आयोजनों व यात्राओं के दौरान हिंसा या बवाल करने की कोशिश असामाजिक तत्वों द्वारा की जाती रही हैं। लेकिन प्रशासन और पुलिस की चौकसी के चलते उपद्रवी अपनी मंशा में कुछ मामलांे को छोड़ सफल नहीं हो पाते लेकिन जहां तक यूपी के जनपद मेरठ के शहर क्षेत्र में धार्मिक आयोजनों में बारातों के दौरान के इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए तो छोटी छोटी बातों पर यहां बवाल होते रहे हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए हिंदू मुस्लिम के संयुक्त निवास वाले क्षेत्रों में हमेशा ऐसे अवसरों पर पुलिस पिकेट तैनात करने के साथ चौकसी बरती जाती थी और ध्यान रखा जाता था कि इन आयोजनो में मिश्रित आबादी मंें जाने वाले लोग अपने घर आसानी से पहंुच सके। इसके लिए गुदड़ी वैली बाजार खैरनगर आदि क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ा दी जाती थी। लेकिन इस बार पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने ऐसी मजबूत व्यवस्था को अंजाम क्यों नहीं दिया यह विषय सोचनीय है।
बताते चलें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री समय समय पर आम आदमी को भयमुक्त वातावरण में सांस लेने का अवसर प्रदान करने का और पूरे प्रदेश में शांति भाईचारा कायम रखने हेतु मौहल्ला समितियों आदि की बैठकें करने के निर्देश देते रहे हैं। लेकिन इतने बड़े त्योहारों की जानकारी होने के बावजूद भी वृहद स्तर पर यह बैठकंे क्यों नहीं हुई और पुलिस के सूत्र क्या कर रहे थे। जो थानेदारों को पहले ही इस बारे में पता ही नहीं चल पाया।
जहां तक मुझे लगता है कि थाना पुलिस स्वयं भी और जब बड़े अफसरों द्वारा नागरिकों की बैठक बुलाई जाती है तब भी जानकारी रखने वाले प्रबुद्ध नागरिकों को आमंत्रित करने की बजाय इन बैठकों में अपने चाटुकारों, फाइनेंसरों और दलाल बताए जाने वाले लोगों को आमंत्रित करते हैं। इनमे वो लोग होते हैं जो जानकारी तो कुछ रखते नहीं और सिर्फ थानेदारों की जी हजूरी और सुविधाओं का ध्यान रखते हैं। इसलिए इतिहास को अफसरों और थानेदारों को पता नहीं चलता और ऐसी घटनाएं हो जाती है। मुख्यमंत्री जी प्रदेश में सदभाव शांति और भाईचारा तथा कानून का भी राज कायम रखने और आम आदमी को भयमुक्त वातावरण में सांस लेेने का मौका स्थायी रूप से उपलब्ध कराने हेतु अफसरों को निर्देश दें कि विशेष मौकों पर नहीं कम से कम एक माह में जिला नगर और थाना व तहसील स्तरों पर क्षेत्र के प्रमुख और जानकार नागरिकों की एक बैठकें बुलाई जाए। और उनसे फीडबैक लेकर व्यवस्थाएं की जाएं तो मुझे लगता है कि इस प्रकार की घटनाओं को होने से पहले ही रोका जा सकता है या उससे निपटने के इंतजाम किए जा सकते हैं। क्योंकि बिना सोचे समझे आदेश देने के क्या अंजाम हो सकते हैं इसके उदाहरण के रूप में जब मेरठ में वीके नायर एसएसपी होते थे उस समय के डीजीपी श्री भटनागर द्वारा बिना एसएसपी की राय के मिश्रित आबादी के क्षेत्रों की पिकेट हटवाने तथा बाबूलाल यादव जब यहां कप्तान हुआ करते थे तब डीएम जीसी चतुर्वेदी के यहां आए सुझावों को बाबूलाल यादव द्वारा नजरअंदाज करने से जो हिंसा भड़की थी उसका रिकॉर्ड पुराने पुलिस में आसानी से मिल सकता है। और यह भी पता चल सकता है कि अपने कृपा पात्रों की बजाय आम आदमी से सलाह लेने से बड़ी बड़ी घटनाएं होने से पहले ही रोक दी गई। इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी थानेदारों को यह समझाना है कि फाइनेंसरों और चाटुकारों से भी संबंध रखों लेकिन क्षेत्र के प्रमुख नागरिकों को दोस्त पुलिस की भांति सम्मान दो तो कई घटनाएं नहीं होंगी। यह बात विश्वास के साथ कही जा सकती है।

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

2 × three =