जीका वायरस काे लेकर कानपुर में अलर्ट, अफ्रीकी देशों में है ये घातक बीमारी

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कानपुर। लालबंगला के परदेवनपुरवा निवासी एयरफोर्स कर्मी की जांच में जीका वायरस की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य महकमे में अलर्ट जारी कर दिया गया है। वायुसेना के कानपुर स्थित सेवन एयरफोर्स अस्पताल में एयरफोर्स कर्मी की जांच में जीका वायरस की पुष्टि के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे ने सतर्कता के निर्देश जारी कर दिए हैं। वहीं बीते दिनों कानपुर में बुखार पीड़ितों की मौतों को लेकर माना जा रहा है कि संभव है कि जीका वायरस ही कारण हो सकता है। यह वायरस अफ्रीकी देशों में बेहद घातक माना जाता है और जानलेवा साबित होता है।

क्या है जीका वायरस
जीका विषाणु फ्लाविविरिडए विषाणु परिवार से है। यह एक प्रकार का बुखार है। इसके लक्षण डेंगू की तरह ही होते हैं। इसमें बुखार, लाल आंखें, जोड़ों में दर्द, सिर दर्द, लाल चकत्ते आदि की स्थिति बन जाती है। यह काफी खतरनाक वायरस है। अफ्रीकी देशों में यह वायरस सक्रिय रहता है। इसके अलावा दक्षिण भारत के राज्यों में भी इसके मामले पाए जा चुके हैं।

वायरस को लेकर एलएलआर अस्पताल में अलर्ट
शहर में जीका वायरस का पहला मरीज मिलने के बाद से खलबली मच गई है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एलएलआर अस्पताल (हैलट) में जीका वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। प्राचार्य प्रो. संजय काला ने कहा है कि अगर बुखार का कोई भी मरीज, जिसे कई दिनों से बुखार है। उसका डेंगू, मलेरिया और टायफाइड का टेस्ट निगेटिव आ रहा है। उसके जोड़ों में भीषण दर्द है और आंखों में जलन के साथ कीचड़ आ रहा है। ओपीडी एवं इमरजेंसी में ऐसे लक्षण के साथ आने वाले मरीजों का जीका वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए टेस्ट जरूर कराया जाए।

एक सप्ताह पहले मास्टर वारंट आफीसर हुए थे बीमार
एयरफोर्स में मास्टर वारंट आफीसर करीब एक सप्ताह पहले बीमार हुए थे और सेवेन एयरफोर्स अस्पताल में भर्ती थे। चिकित्सकों ने उनका रक्त नमूना जांच के लिए पुणे भिजवाया था। जांच रिपोर्ट में एयरफोर्स कर्मी में जीका वायरस की पुष्टि होते ही स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई। प्रशासनिक अधिकारियों की सर्किट हाउस में बैठक हुई है और इसे फैलने से रोकने के लिए रणनीति बनाने पर मंथन किया जा रहा है। एयरफोर्स कर्मी के संक्रमित होने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

जीएसवीएम में नहीं जांच की सुविधा
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया कि मेडिकल कालेज में फिलहाल जांच की सुविधा नहीं है। एलएलआर में आने वाले मरीजों का सैंपल लेकर जांच के लिए लखनऊ के संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइ) या किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) भेजा जाएगा। साथ ही महाराष्ट्र के पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलाजी (एनआइवी) भी भेजा जाएगा। अगर जीका वायरस के लक्षण वाले मरीजों की संख्या अधिक होती है तो शासन ने बात करके मेडिकल कालेज में ही जांच की सुविधा मुहैया कराएंगे।

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