यूपी सरकार के दावे सही है या विपक्ष की बात, मतदाता करेगा तय

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डाॅक्टरों की सेवानिवृत्ति उम्र 70 साल करना ठीक नहीं
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्राप्त की गई उपलब्धियों एवं जनहित के किए गए कार्यों और इसके लिए चलाई गई योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने हेतु यूपी सरकार में शामिल सभी जनप्रतिनिधियों के साथ साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह सहित संगठन के हर स्तर के कार्यकर्ता हर प्रयास कर रहे हैं। तो केंद्र सरकार में मंत्री और केंद्रीय भाजपा संगठन भी इस मामले में पीछे नहीं है।
साढ़े चार साल में कितना काम हुआ कितना नहीं इसे जनता पूरी तौर पर समझती है। सरकार की सफलता का परिणाम क्या निकलेगा यह 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि डबल इंजन की पूर्ण बहुमत की सरकार द्वारा जो उपलब्धि और काम के दावे किए गए हैं जनता ने उसे कितना सराहा है। फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के कामों को खूब प्रशंसा मिल रही है। दूसरी तरफ विपक्षी दल और उनके नेता इन उपलब्धियों के दावों की बखिया उधेड़ने और किए जा रहे दावों को झूठा करार देने मेें पीछे नहीं है। क्योंकि बसपा मुखिया मायावती दावों को हकीकत से दूर बता रही हैं तो प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सपा मुखिया अखिलेश यादव साढ़े चार साल के कार्यकाल को निराशा भरा बताने में पीछे नहीं है तो उत्तर प्रदेश प्रभारी कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी का कहना है कि यह सिर्फ झूठ है। आप पार्टी के सांसद यूपी प्रभारी संजय सिंह का कहना है कि विकास का लेखा जोखा नहीं यह दावे लतीफों की किताब है।
अगर ध्यान से देखें तो सपा और विपक्ष दोनों में कोई भी गलत नहीं है। सब अपना अपना काम कर रहे हैं। रिजल्ट हर बात का मतदाताओं को देना है। इसी वर्ष हुए पंचाचती चुनाव की क्या स्थिति रही वो सबको याद है। और आगे क्या होगा यह मतदाताओं को तय करना है। मीडिया का काम है सबकी बात को जनता के सामने ले जाना। वो चाहे सोशल इलैक्टोनिक अथवा प्रिंट मीडिया हो वो काम हमारे द्वारा ईमानदारी से किया जा रहा है। फैसला तो जिसे करना है वो ही करेगा। मगर एक बात विशेष तौर पर कह सकता हूं कि यूपी में डाॅक्टरों की सेवानिवृत उम्र 70 साल किए जाना उचित नहीं कह सकते। क्योंकि इससे बेरोजगारी को बढ़ावा मिलेगा। क्योंकि जो युवा मोटी धनराशि खर्च कर चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे हैं अगर पुराने सेवानिवृत नहीं होंगे तो उन्हें मौका मिल पाना समय से संभव नहीं है।

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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