चौरंगा बना दिया जाए बालात्कारियों को

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दिल्ली के निर्भया कांड़ की तरह मुंबई के साकी नाका इलाके के बाहरी क्षेत्र में 34 वर्षीय हैवानियत की शिकार हुई महिला ने 33 घंटे तक जीवन और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद दम तोड़ दिया। 10 सितंबर को सुबह के पहर में होना बताई जा रही उक्त घटना में उप्र के जौनपुर के मुल निवासी जो मुंबई में ट्रक चलता है मोहन चौहान को कोर्ट ने 21 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। इस घटना को लेकर समाज में भय का माहौल व्याप्त होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता तो दूसरी तरफ भले ही उसका रूप कोई भी हो राजनीति भी इस मामले में शुरू हो गई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्वव ठाकरे द्वारा इस घटना को मानवता पर धब्बा करार देते हुए त्वरित कार्यवाही करते हुए अपराधी को कड़ी सजा दिलाने की बात कही जा रही है। तो भारतीय जनता पार्टी के नेता पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र प्रणवीश का कहना है कि महाराष्ट्र में बढ़ी अत्याचार की घटनाओं से सिद्ध होता है कि सरकार कानून व्यवस्था संभालने में नाकाम है। मुंबई के भाजपा सांसद मनोज कोटक ने भी सरकार को आड़े लेते हुए कहा कि ऐसी घटनाऐं बढ़ रही है और सरकार सो रही है।
इंटरनेट मीडिया भी राजनीतिक दलों के साथ इस मुद्दे को लेकर सरकार की आलोचना करने में भी पीछे नहीं है। एक व्यक्ति ने ट्वीट करते हुए कहा कि यूपी के हाथरस में एक ऐसी ही घटना को लेकर ड्रामा करने वाली कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा अब कहां है। राकपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता महाअघाड़ी सरकार में मंत्री नबाव मलिक का कहना है कि हम सुनिश्चित करेंगे कि फास्टटैंग मुकदमा चलाकर न्याय जल्दी दिया जाए। ऐसे ही कुछ शब्द यहां के मुख्यमंत्री भी कह चुके है। और उनका कहना था कि राज्य के गृहमंत्री दलीप बालेश पाटिल और मुंबई के पुलिस आयुक्त हेमेंत नागराले से भी इस संदर्भ में चर्चा हुई है।

दरिदंगी पूर्ण गैंग रेप की शिकार हुई 34 वर्षीय महिला ने बचने की समाचारों के अनुसार काफी कोशिश की लेकिन बलात्कारी द्वारा उसके निजी अंगों में लोहे की छड़ डालकर उसे पीड़ित किया गया था शायद इसलिए चुनी गई और मुंबई के नगर पालिका के अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़िता तो दम तोड़ गई लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर ये निर्भया जैसे कांड़ जो मनमस्तिष्क को हिलाकर रख देते है वो कब तक होते रहेंगे।

सरकारें महिलाओं को सुरक्षा देने समाज में भयमुक्त वातावरण स्थापना करने की बात कर रही है समय समय पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि अपराधों में कमी के दावे करने से भी नहीं चुकते मैं उन्हें गलत नहीं ठहराता लेकिन 34 वर्षीय महिला के साथ 45 वर्षीय मोहन चैहान ने जो किया उसको देखकर यह जरूर लगता है कि कानून भी बन रहे है दोषियों को सजा भी मिल रही है लेकिन बेटियों को बचाने और अमन पसंद नागरिकों को भय मुक्त वातावरण में सांस लेने के अवसर प्रदान करने में लगी सरकारों के काम में ऐसे दरिंदे सफलता नहीं मिलने दे रहे वर्ना 2012 में दिल्ली के अंदर एक बस में निर्भया के साथ जो हुआ वैसा और किसी के साथ नहीं होता।

इतना ही नहीं यूपी के बिजनौर में सबसे ज्यादा व्यस्त रहने वाले इलाके रेलवे स्टेशन के पास खो खो की राष्ट्रीय खिलाड़ी की गला घोटकर हत्या कर दी गई मृतका बार बार खबरों के अनुसार सौरव छोड़ दो सौरव छोड़ दो चिला रही थी तो दूसरी ओर मेरठ के गंगानगर इलाके में अम्हेड़ा निवासी कुंवर पाल द्वारा एक महिला के साथ दुष्कर्म किया गया।
तो बताते चले कि यूपी के अलीगढ़ में एक पति द्वारा समाचार के अनुसार साजिश रच गर्भवती पत्नी को इंजेक्शन देकर एचआईवी संक्रमित कर दिया गया। इन सारी घटनाओं को मध्यनजर रख जो महसूस होता है वो यह है कि महिलाऐं अगर आगे बढ़कर अपने बचाव के लिए कोई मजबूत कदम नहीं उठायेगी तो सरकार चाहे कितने ही नियम कानून बना ले उनका उत्पीड़न आसानी से रूकने वाला नजर नहीं आ रहा है।

भाजपाईयों द्वारा मुंबई घटना के दोषी आरोपी को मृत्युदंड़ देने की मांग की जा रही है लेकिन मेरा मानना है कि अगर संविधान में संभव है या कानून में थोड़ी रदोबदल कर निर्णय लिया जा सकता है तो मुंबई की घटना के लिए जिम्मेदार टैम्पू ड्राईवर मनोज चौहान जैसे लोगों को जो समाज में एक कोड़ की भूमिका निभा रहे भी कहे जा सकते है। उनको ऐसे मामलों में पूर्ण जांच कराकर जिससे कोई बेकसूर सजा न पा जाए इन्हें चैरंगा बना दिया जाना चाहिए। क्योंकि धीरे धीरे ऐसे अमानुषिक व्यवहार को लेकर कुछ अन्य लोग भी अपनी सीमाऐं लाघने लगे है इसके उदाहरण के रूप में गाजियाबाद के समाज कल्याण अधिकारी नदीम सिद्दीकी जिन्हें निलंबित कर दिया है को देखा जा सकता है। एक खबर के अनुसार उनके द्वारा अपनी अधिनस्थ कर्मचारी के साथ छेड़छाड़ और दुअर्थी बातचीत देर रात में की जाती थी। तो अब तो कुछ रिश्तेदारों और परिवार के अपनों के द्वारा भी दी जाने वाली ऐसी घटनाऐं पढ़ने और सुनने को मिलने लगी है और क्योंकि ग्रामीण कहावत ज्यों ज्यों दवा की मर्ज बढ़ाता ही गया कि समान हदय दहला देने में सक्षम ऐसी घटनाओं के रोकथाम के लिए जांच के बाद अगर दोषी पाए जाने वाले निर्भया या मुंबई जैसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को चैरंगा बना देने पर विचार किया जाना गलत नहीं है।

अब कोई पूछेगा कि चौरंगा क्या होता है तो इस संदर्भ में पढ़ने को मिली एक खबर से पता चला कि पुराने जमाने में राजा महाराजा जो महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे वो ऐसी घटना होने पर आरोपी के कोनी और घूटनों से नीचे के हाथ पैर काटकर उन्हें चौरंगा करने का फैसला सुनाते थे जिससे उन्हें देख देखकर और कोई ऐसी घटनाओं को अंजाम देने के बारे में विचार न कर पाए। मेरा सुझाव है कि अगर नियमानुसार मानव अधिकार इसमें आड़े न आते हो तो सरकार को इस पर विचार जरूर करना ही चाहिए।

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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