बीमारियों से डराने की बजाय चिकित्साअधिकारी मौहल्लों में जाकर चलाएं जागरूका अभियान व नगर निगम कराए सफाई

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बीमारियां पहले भी होती थी। तब तो दवाई भी नहीं मिलती थी लेकिन जिस प्रकार से वर्तमान में कारण कुछ भी हो कुछ दवा विक्रेताओं कई चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों आदि के कोकस द्वारा कभी कोरोना या चिकनगुनिया के नाम पर तो कभी डेंगू को लेकर जो डर आम आदमी में जागरूकता के नाम पर पैदा किया जा रहा है उससे मरीज ठीक होने की बजाय मानसिक रूप से पीड़ित यह सोचकर होने लगे हैं कि डाॅक्टर को दिखाने के लिए पैसा कहां से लाए और दवाई कहां से खरीदे। क्योंकि ज्यादातर आबादी को लाॅकडाउन ने तोड़कर रख दिया है और बाकी कसर छूट देने की घोषणाओं के बावजूद जो वसूली हो रही है उसने पूरी कर दी है। क्योंकि वर्तमान में सरकारी चिकित्सा विभाग से संबंध अफसर और डाॅक्टर निचली और गरीब बस्तियों में जाकर जहां बीमारियां पैदा होने की बड़ी संभावनाएं हैं। वहां दवाई बांटने और कैंप लगाकर जागरूक करने का काम करने की बजाय जहां तक नजर आ रहा है अपने कार्यालय में बैठकर या पत्रकार वार्ता बुलाकर उनमें बड़ी बड़ी बाते करके अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने की कोशिश कर रहे है तो दूसरी तरफ नई नई बीमारियों के जन्मदाता मच्छरों के उत्पादन में भूमिका निभाने वाली गंदगी के सफाई के काम को शासन की नीति के तहत अंजाम देने के बजाय इसके लिए जिम्मेदार नगर निगम व अन्य स्थानीय निकायों के अधिकारी गंदगी फैलाने पर जुर्माना वसूल करने और कई कड़े कदम उठाने की घोषणाएं तो कर रहे हैं लेकिन करोड़ों रूपये खर्च करके भी नाले नालियो की सफाई और गंदगी साफ कराने में असफल ही नजर आ रहे हैं। इस संदर्भ में आज एक अनुभवी नागरिक का यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण नजर आया कि बीमारियों को रोकने की व्यवस्थाओं में सरकार द्वारा भरपूरा पैसा उपलब्ध कराए जाने के बाद भी असफल स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम व अन्य स्थानीय निकायों के कुछ अधिकारी बिना सूंड के सफेद हाथी के समान हो गए हैं। इनके द्वारा अपने घरों के आसपास की सफाई और अपनी सुविधाओं पर तो पूर्ण ध्यान दिया जा रहा है और नागरिकों को सिर्फ जागरूकता के नाम पर डराया जा रहा है।
मेरा पीएम मोदी से आग्रह है कि स्वच्छता अभियान में लगे लोगों को सक्रिय किया जाए। और स्थानीय निकायों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नकेल कसी जाए क्योंकि अगर यह पूर्ण जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे तो आधी बीमारियां उससे और कुछ अपने आप ही समाप्त हो सकती है।

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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