हर बच्चे को साक्षर बनाने का सपना कैसे पूरा होगा

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साक्षरता से हर क्षेत्र में विकास और प्रगति के द्वार अपने आप ही खुलते चले जाते हैं। और जहां की जनता शिक्षित होती है वहां स्वर्णिम विकास और प्रगति की फसल लहलहाती है। इस बात को हमारी सरकारों ने खूब अच्छी तरह समझा और जनप्रतिनिधि इसके लिए योजना बनवाने के साथ साथ शिक्षा विभाग और जिलों में बजट भी पूरी तौर पर उपलब्ध करा रहे हैं। तथा बच्चे स्कूल जाएं और पढ़ें तथा मां-बाप को भी ना हो कोई परेशानी इस बात को ध्यान में रखते हुए देशभर में तमाम प्रकार की नीतियां सरकारों ने बनाई है। लेकिन शिक्षा से संबंध खबरें पढ़ पढ़कर और गरीब बस्तियों के बच्चों की स्थिति देखकर यह लगता है कि हर बच्चे को साक्षर बनाने और उसके देश की उन्नति में योगदान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, शिक्षा मंत्रियों द्वारा जो स्वप्न देखा गया है उसे इस योजना से जुड़े लोग छिन्न बिन्न करने में लगे हैं और इसके लिए मिला बजट कहां जा रहा है यह भी वो ही जान सकते हैं।

कहा जा रहा है कि यूपी के 11 जिलों को स्टार स्कूलों की टॉप टेन श्रेणी में गिना जा रहा है। इससे संबंध एक खबर के अनुसार बरेली, इटावा समेत कई जिलों ने स्कूलों की सूरत संवारदी है। मुख्यमंत्री योगी की ऑपरेशन कायाकल्प की योजना से बेसिक शिक्षा के स्कूलों की हालत बदल गई है। इस वर्ष विभाग ने स्कूलों की रैंकिंग केवल ऑपरेशन कायाकल्प के आधारपरकी है। 2020 में जहां केवल 842 स्कूल ही फाइव स्टार थे, अब बढ़ कर 7092 हो गए हैं। प्रदेश में 1,32,675 स्कूल हैं। इस वर्ष की रैंकिंग मेंटू स्टार व वन स्टार की श्रेणियों में कमी आई है। वहीं फोरस्टार की श्रेणी में 4393 से बढ़कर 28817 स्कूल हो गए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की महानिदेशक अनामिका सिंह ने स्कूलों की रैंकिंग जारी कर दी है। कोरोना के कारण बीते शैक्षिक सत्र में स्कूल नहीं खुले और इस वर्ष स्टूडेंट असेसमेंट टेस्ट नहीं हुआ,
इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर यूपी में 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। जिसके तहत इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती में एमआरसी अभ्यर्थियों के मामले में एकल पीठ के निर्णय पर हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया है। बेसिक शिक्षा परिषद से कहा है कि मेरिट में ऊपर होने के कारण सामान्य वर्ग में चयनित आरक्षित श्रेणी के मेधावी अभ्यर्थियों (एमआरसी) को दो माह में उनकी प्राथमिकता का जिला आवंटित किया जाए। कोर्ट ने सामान्य वर्ग में ऊंची मेरिट के अभ्यर्थियों को भी उनकी पसंद के तीन प्राथमिकता वाले जिलों में किसी एक में पद रिक्त होने पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।

यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएन भंडारी एवं न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने अमित शेखर भारद्वाज सहित सैकड़ों अभ्यर्थियों की विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया है। हालांकि, खंडपीठ ने यह भी कहा है कि निर्णय को नजीर नहीं माना जाएगा।

इतना सब होने के बावजूद आज भी बच्चे स्कूलों की खस्ताहाल इमारतों और गंदे फर्श तथा घासफूंस से घिरे कमरों में टाट पटटी पर बैठकर शिक्षा प्राप्त करने के लिए मजबूर हैं। और यह हाल गांव देहात का नहीं शहरों का भी बताया जाता है। चर्चा है कि ऐतिहासिक जनपद मेरठ के केसरगंज विद्यालय में लंबी लंबी घास उगी हुई है। कोरोना अभी समाप्प्त नहीं हुआ है। तीसरी लहर आने की चर्चा सुनाई दे रही है। डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है। लेकिन यहां बच्चे घास से घिरे मैदान में राष्ट्रीय कन्या जूनियर हाईस्कूल में टाट पटटी पर बैठकर शिक्षा प्राप्प्त करने को मजबूर हैं जबकि सरकार द्वारा छोटे से छोटे स्कूल को साफ सुथरा रखने और अच्छी व्यवस्थाएं देने के लिए बजट दिया जा रहा बताया जाता है। इतना ही नहीं स्कूलों की खस्ता हालत और अभिभावकों में बढ़ती नाराजगी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इसी जनपद के मवाना होकर हस्तिनापुर जाने वाले मार्ग पर पड़ने वाले इंचौली थाना क्षेत्र के गांव सिखैड़ा में डा. आबेडकर कन्या जूनियर हाईस्कूल निर्माण की 19 साल पहले घोषणा की गई थी लेकिन समिति का गठन तो कर दिया गया मगर इस कमेटी के अध्यक्ष धर्मपाल सिंह का आरोप है कि स्कूल के लिए दी गई भूमि पर कुछ दबंगों का कब्जा है। इसलिए स्कूल नहीं बन पा रहा है। उनका कहना है कि अगर स्कूल निर्माण नहीं हुआ तो गांव से अनुसूचित जाति के लोग पलायन कर जाएंगे।
शिक्षा की स्थिति सिर्फ यूपी में ही ऐसी हो ऐसा नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन द्वारा एक टवीट में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल दावा कर रहे हैं कि निजी स्कूलों के दो लाख बच्चे सरकारी स्कूलों में दाखिला ले चुके हैं वो गलत है क्योंकि वर्ष 2013 से 16 तक सरकारी स्कूलों में 1.18 लाख बच्चे घट गए हैं और प्राइवेट स्कूलों में 3.4 लाख बच्चे बढ़ गए। माकन का कहना है कि 2019 में पहली बार सरकारी स्कूलों से ज्यादा बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। अजय माकन का तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के द्वारा शिक्षा के लिए किए जा रहे दावों को लेकर बहुत कुछ कहा गया है।

मैं किसी की आलोचना या सम आलोचना इस विषय को लेकर नहीं करना चाहता हूं लेकिन मैं खुद अनपढ़ और निरक्षर हूं। इसका मुझे कोई अफसोफ भी नहीं है लेकिन कई मौकों पर शब्द ज्ञान ना होने के चलते जो समस्याएं होती हैं मुझे लगता है कि वो और किसी के समक्ष ना आए इसलिए पढ़ लिखकर बच्चे अपने माता पिता की हर तरह से सेवा कर सके और देश के विकास में सहभागी बने। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए मुझे लगता है कि जीवन में शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है और हर बच्चे को यह मिलनी ही चाहिए। और जब सरकार आम आदमी के खून पसीने के कमाई टैक्सों के रूप में प्राप्त कर रही है तो गरीब और बेसहारा मध्यम वर्ग के बच्चों को भी पूर्ण रूप से साक्षरता का लाभ हर हाल में मिलना चाहिए। मेरा प्रधानमंत्री और अन्य जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के साथ ही यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साहब से आग्रह है कि जो बजट शिक्षा के लिए दिया जा रहा है उसका सही उपयोग हो यह सुनिश्चित करने के साथ ही साक्षरता में विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न करने वाले लोग चाहे कोई भी हो उनके खिलाफ समय रहते कार्रवाई होनी ही चाहिए।

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