एसडीएम पिंकी मीणा प्रकरण से पता चलता है विकास कार्याें में भ्रष्टाचार

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विकास कार्यों में रिश्वत लिए जाने और समय से पूर्व कार्याें की गुणवत्ता समाप्त हो जाने की चर्चाएं खूब सुनने और पढ़ने को मिलती है। देशभर की अदालतों में भी ऐसे अनेकों मुकदमे चल रहे हैं जिनमें सालों से शायद फैसले नहीं हो पाए हैं। लेकिन राजस्थान के कोटा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो एसीबी के अधिकारियों द्वारा रेलवे के सेक्शन इंजीनियर को बीते मंगलवार की रात को बिल पास करने की एवज में हजार रूपये लेने और फिर इंजीनियर के घर से मिली लाखों की संपत्ति तथा बांदीकुई की तत्काल एसडीएम पिंकी मीणा को लेकर छपी खबर कि प्रत्येक किलोमीटर के लिए लेती थी एक लाख रूपये की घूस खबर से यह स्पष्ट होता है कि सरकारें तो शायद जनता के हित और सुविधा के लिए अनेकों योजनाएं बना रही हैं और उन्हें लागू कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। लेकिन अधिकारियों द्वारा हर कदम पर अपने हित में उनका उपयोग कर उन्हें पलीता लगाया जा रहा है।
इस संबंध में छपी खबर के अनुसार रिश्वतखोरी के मामले में फंसी एसडीएम पिंकी मीणा के खिलाफ एसीबी कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी गई। इस चार्जशीट में रिश्वतखोरी व पिंकी मीणा से जुड़े कई हिस्सों में बड़े खुलासे हुए हैं। बताया जा रहा है कि पिंकी मीणा ने हाईवे बना रही कंपनी से हर एक किलोमीटर पर 1 लाख रूपये की रिश्वत मांगी थी। इस चार्जशीट में एक और हैरान करने वाला खुलासा हुआ है जिसमें बताया गया है कि जब उसे यह सुनने में आया कि दौसा सेक्शन के एसडीएम पुष्कर मित्तल इस काम के लिए 10 लाख लाख रुपये ले रहे हैं तो तो उसने भी अपनी रिश्वत की रकम बढ़ाकर 10 लाख कर दी थी।
आपको बता दें कि, राज्य के बांदीकुई की तत्कालीन एसडीएम पिंकी मीणा के पास भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत जमीन अधिग्रहण का काम था। इसी क्रम में जब जमीन के बदले किसानों को मुआवजे की बात आई तो प्रशासन का पैसा पिंकी ने केवल इसलिए रोक रखा था ताकि कंपनी पर घूस देने के लिए दबाव बनाया जा सके। इसके अलावा जमीन पर कब्जा दिलाने का काम भी पिंकी मीणा के पास था। ऐसे में पिंकी मीणा ने दोनों काम अटका रखे थे। मुआवजा इसलिए नहीं बांटा ताकि किसान संतुष्ट न हो और कंपनी काम न शुरू कर सके। साथ ही जिन किसानों के मुआवजा प्रकरण स्वीकृत हो चुके थे, उनकी जमीन पर कब्जा दिलाने के बदले ही यह रिश्वत मांगी गई। तय हुआ कि एक किलोमीटर सड़क की जमीन पर कब्जा दिलाने के बदले एक लाख रुपए लगेंगे। लेकिन पिंकी मीणा की आदतों से तंग आकर हाइवे बनाने वाली कंपनी ने एसीबी से शिकायत कर दी। साथ ही कम्पनी ने आईपीएस मनीष अग्रवाल और दौसा सेक्शन के एसडीएम पुष्कर मित्तल की शिकायत कर दी। पुष्कर मित्तल अभी जेल में है। मनीष अग्रवाल को बहन की शादी के लिए अंतरिम जमानत मिल चुकी है, जबकि पिंकी मीणा को हाईकोर्ट से जमानत हो चुकी है।
साथ ही एसीबी ने यह भी खुलासा किया है कि इस घूस के फेर में पिंकी मीणा सीधे तौर पर शामिल नहीं होना चाहती थी। ऐसे में उसने अपने ही विभाग के एक कर्मचारी को इस काम के लिए मोहरा बनाया। ऐसे में एसीबी ने जब अमित को कम्पनी के अधिकारियों के सामने बैठाकर पूछताछ की तो मामला खुल गया। वहीं, जिस कंपनी ने शिकायत की उसने एसीबी को डिजिटल रिकाॅर्डर में सबूत दिए। पिंकी मीणा की रिश्वत मांगते हुए 3 बार की बातचीत डिजिटल रिकाॅर्डर में दर्ज है। एसीबी ने पुष्टि के बाद ही पिंकी मीणा को गिरफ्तार किया था। एसीबी ने ये सारे डिजिटल सबूत और बातचीत का ट्रांसक्रिप्ट बनाकर कोर्ट में चार्जशीट के साथ पेश किया है।
एसडीएम पिंकी मीणा और पुष्कर मित्तल, मनीष अग्रवाल आदि अधिकारियों के संदर्भ में जो कहा जा रहा है उससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार के चाहने के बावजूद कराए जा रहे विकास कार्यों में पारदर्शिता पूरी तौर पर नहीं आ पा रही है। मुझे लगता है कि निष्क्रिय और दागी छवि वाले अफसरों को समय से पूर्व सेवानिवृति के तहत की जाने वाली कार्रवाई में और तेजी आनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ जितने भी तरीके से कार्रवाई हो सकती हो वो की जाए। शायद तभी जनता को विकास कार्यों का सुख सही मायनों में समय से मिल सकता है।

 

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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