कौन बचाएगा नकली और मिलावटी माल बेचने वालों के हाथों लुट रहे उपभोक्ता को

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नामी गिरामी ब्रांडेड कंपनियों की मोहर और चिट लगाकर डुप्लीकेट कपड़े बेचे जाने तथा नकली किताबें छापने और बेचने के मामले आजकल काफी प्रकाश में आ रहे हैं। लेकिन एक तो जब पुलिस के सहयोग से कंपनी के लोगों द्वारा छापे मारे जाते हैं तब तो यह घटना समाचार पत्रों की सुर्खियां कई दिन तक बनी रहती हैं लेकिन बाद में इनमें क्या हुआ यह पता नहीं चल पाता। और इस संदर्भ में नियम और कानून होने के बावजूद इस फर्जीवाड़े के धंधे में लगे लोग मामले को कैसे मैनेज कर लेते हैं यह भी किसी को पता नहीं चल पाता लेकिन कुछ दिनों बाद जब ऐसी ही और घटनाएं खुलती हैं तो फिर पूर्व के सारे मामले स्वप्न की भांति सामने आते चले जाते हैं लेकिन नकली माल बिकने बनने और छपने का सिलसिला बदस्तूर सुरसा की मुंह की भांति जारी है। यह कैसे रूके और आम आदमी मुनाफा खोरों के हाथों लुटने से कैसे बचे इस और शायद कोई विशेष ध्यान नहीं दे रहा है।
पिछले वर्ष यूपी के मेरठ में एनसीईआरटी की नकली किताबे छापने में एक भाजपा नेता का नाम आया। और उससे संबंध संस्थानों में फर्जी किताबों का बड़ा भंडार भी मिला। उससे पहले भी कहीं ना कहीं देशभर में दो नंबर की किताबें छापने और बेचने की खबरें सुनने और पढ़ने को मिलती रहीं है। अब नया मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के लोनी थाना की ट्रानिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र में नामी कंपनियों की नकली किताबें छापने वाला प्रिंटिंग प्रेस पकड़ा है। छापे में स्पैक्ट्रम बुक्स, मैकग्राहिल, केडी पब्लिकेशन, क्रोनिकल बुक्स, यूबीएसपीडी, ओरिएंट ब्लैक स्वान समेत अन्य कंपनियों की करीब चार करोड़ की नकली किताबें बरामद हुई हैं। पुलिस ने प्रेस को सील कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी धार्मिक किताब छापने की आड़ में यह धंधा करता था। वह नामी कंपनियों की 500 रुपये कीमत वाली किताब की नकली किताब छापकर उसे 200 में बेचता था।प्रिंटिंग प्रेस संचालक गुल मोहम्मद 12वीं पास है और दिल्ली के दरियागंज का रहने वाला है। प्रेस में ही किताबों की छपाई से लेकर पैकिंग होती थी। करीब एक साल से प्रेस में ये किताबों छापी जा रही थीं। तीन से चार लाख की कीमत वाली मशीनों पर संचालक कारीगरों से काम कराता था।
जिन कंपनियों की नकली किताबें छापी जा रही थीं, उनके लीगल एडवाइजर एडवोकेट संजीव कुमार राघव ने कहा कहना है कि सूचना मिली थी कि ट्राॅनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र में कई नामी कंपनियों की नकली किताबें छापी जा रही हैं। और उनको देश भर में सप्लाई किया जा रहा है। स्थानीय पुलिस के साथ छापा मारा गया। प्रेस में स्पैक्ट्रम बुक्स, मैकग्राहिल, केडी पब्लिकेशन, क्रोनिकल बुक्स, यूबीएसपीडी, ओरिएंट ब्लैक स्वान समेत कई नामी कंपनियों की नकली किताबें मिलीं। इनकी कीमत करीब चार करोड़ है। प्रेस को सील कर दिया गया है। पुलिस को आरोपी संचालक गुल मोहम्मद के खिलाफ तहरीर दी गई है। एसपी देहात डाॅ. ईराज राजा ने कहा कि पुलिस टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
उससे पूछताछ की जा रही है। कुछ और नाम भी सामने आए हैं। आरोपी ने फिरोज नाम के व्यक्ति से किराए पर बिल्डिंग ले रखी थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। पूछताछ में प्रकाश में आए नामों पर भी कार्रवाई की जाएगी। आरोपी करीब एक साल से यहां प्रेस चला रहा था। वह पटना, लखनऊ समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में किताबों की सप्लाई करता था। वह आनलाइन किताबें भी बेचता था। आरोपी कंपनी की असली किताब खरीदता था। फिर उसी से कंटेंट लेकर अपने प्रेस में छपवाता था। वह किताबों पर कंपनी का नकली होलोग्राम लगाकर हूबहू किताब तैयार कर लेता है। होलोग्राम को देखकर खरीदारों को भी असली और नकली में फर्क नहीं पता चलता था।
संजीव कुमार ने कहा कि करीब 12 दिन पहले कंपनी ने पटना में छापा मारा था। वहां पता चला कि अनिल नाम का एक व्यक्ति यहां से पटना और देश के अलग-अलग इलाकों में डुप्लीकेट किताबों की सप्लाई कर रहा है।
इसी प्रकार से यूपी के मेरठ में टीपी नगर पुलिस और ब्रांड प्रोटेक्टर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (गुरुग्राम) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ब्रांडेड कंपनी के नाम पर नकली उत्पादों की आनलाइन बिक्री का भंडाफोड़ किया है। टीम ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया है। इनके पास से तीन नामी और ब्रांडेड कंपनियों के नाम वाली 170 से ज्यादा डुप्लीकेट शर्ट बरामद की हैं। ब्रांड के हिसाब से इनकी कीमत करीब ढाई लाख रुपये तक की बताई जा रही है।
कंपनी के निदेशक धीरेंद्र सिंह ने गत शुक्रवार शाम टीपी नगर एसओ विजय गुप्ता के साथ मिलकर ट्रांसपोर्ट नगर से एक शख्स को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम अनिल सैनी निवासी गोलाबढ़ बताया। जिसमें उसके पास मिले प्लास्टिक के बड़े बैग की तलाशी ली गई। उसके पास से काफी संख्या में ब्रांडेड कंपनियों की डुप्लीकेट शर्ट मिलीं।
पूछताछ में यह भी पता चला कि ये शर्ट उसने रिठानी निवासी अरिहंत जैन से खरीदी हैं। टीम ने उसे साथ लेकर अरिहंत जैन के प्रतिष्ठान पर छापा मारा और वहां से भी बड़ी मात्रा में डुप्लीकेट शर्ट बरामद की गईं। पुलिस दोनों को थाने ले आई। उनके खिलाफ काॅपीराइट एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में केस पंजीकृत किया गया है। धीरेंद्र सिंह ने कहा कि अरिहंत जैन का पूरा बिजनेस फेसबुक पर आॅनलाइन चलता है। करीब दो माह पहले से कंपनी को नकली उत्पाद तैयार करने की सूचनाएं मिली थीं। इसके बाद ही यह कार्रवाई की गई। अभी यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है अनिल सैनी और अरिहंत के पास तक यह माल कैसे पहुंचा।
टीम यह भी पड़ताल कर रही बताते हैं कि ब्रांडेड के नाम पर और कितने लोग ऐसे उत्पाद बेच रहे हैं और किन-किन क्षेत्रों में उनका नेटवर्क है। सीओ अमित राय का कहना है कि इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है। दो लोग हिरासत में लिए गए हैं। उनसे और जानकारियां जुटाने के लिए पूछताछ की जा रही है।
इससे कुछ माह पूर्व प्रसिद्ध रेडिमेड कपड़ों के विक्रेता बिंदल की प्रदेश के कई जिलों में चल रहे शोरूमों में महंगे ब्रांड के नकली वस्त्र बिकते हुए पकड़े गए थे। तब उपभोक्ताओं में भी अफरा तफरी मची थी क्योंकि इस फर्म से उच्च वर्ग के लोग महंगे कपड़े खरीदते थे और पुलिस ने भी ऐसे कार्यों को रोकने के लिए दावे किए थे। इससे पहले सपनों की नगरी मुंबई में लाखों रूपये की कीमत के पर्स और बैग आदि बेचने वाली एक दुकान पर छापे में काफी तादात में डुप्लीकेट माल मिला था। तो खेल का सामान गेंद फुटबाल, बल्ले के साथ ही अन्य उपयोग की चीजें भी बहुतायत में नकली बिकने के समाचार कोई नए नहीं होते। खाद्य सामग्री में मिलावट की बात तो अब आम कही जाती है।
सवाल यह उठता है कि इस महंगाई के युग और आर्थिक मंदी के दौर में आदमी पता नहीं कैसे कैसे अपनी और बच्चों की जरूरतों को नजरअंदाज कर समाज में अपना स्थान बनाए रखने के लिए जरूरत का सामान खरीदता है और वो भी उसे नकली मिले तो उसकी क्या स्थिति रही होगी यह कोई मुक्तभोगी ही जान सकता है। मेरा मानना है कि कानून, गृह और खाद्य मंत्रालय संयुक्त रूप से आम आदमी को इस लूट से बचाने के लिए ऐसा अभियान चलाए और नीति बनाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे। जिससे भविष्य में इस कार्य में कमी आ सके। और जो लोग ऐसे मामलों में सम्मिलित पाए जाए उनके व्यवसाय करने पर पूरी तरह लगाई जाए रोक जिससे यह लोग किसी और को धोखाधड़ी का शिकार ना बना पाए।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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